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मनीष तिवारी का आरोप: महिला आरक्षण बिल के नाम पर परिसीमन किया जा रहा है

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मनीष तिवारी का आरोप: महिला आरक्षण बिल के नाम पर परिसीमन किया जा रहा है

सारांश

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह परिसीमन को 'महिला आरक्षण बिल' के रूप में पेश कर रही है, जिससे सीमावर्ती राज्यों की शक्ति में कमी आएगी। जानिए इस मुद्दे पर उनका क्या कहना है।

मुख्य बातें

मनीष तिवारी ने परिसीमन को महिला आरक्षण बिल के रूप में पेश करने की आलोचना की है।
कहा गया है कि इससे सीमावर्ती राज्यों की लोकसभा में ताकत कम हो जाएगी।
महिला आरक्षण बिल पहले से पास हो चुका है।
परिसीमन विधेयक में 'जनसंख्या' की परिभाषा में बदलाव किया गया है।
समानता और संतुलन के लिए महत्वपूर्ण चर्चा की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी ने गुरुवार को दावा किया कि केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया परिसीमन 'महिला आरक्षण बिल' के तहत छिपा हुआ है। उनका कहना है कि यदि परिसीमन इसी ढंग से किया गया, तो सीमावर्ती राज्यों की लोकसभा में राजनीतिक ताकत में कमी आएगी।

यह टिप्पणी लोकसभा में एक लंबी चर्चा के दौरान आई, जब कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक और परिसीमन विधेयक, 2026 पेश किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया।

मनीष तिवारी ने कहा, ''यह वास्तव में परिसीमन का विधेयक है, जिसे महिला आरक्षण बिल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।''

उन्होंने बताया कि महिला आरक्षण बिल पहले ही 2023 में पारित हो चुका है, जिसमें यह तय किया गया था कि इसे 2023 के बाद होने वाली पहली जनगणना और उसके बाद परिसीमन के आधार पर लागू किया जाएगा।

उन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो सरकार पहले 2023 के बाद की जनगणना की बात कर रही थी, वही अब 2011 की जनगणना पर वापस क्यों आ गई है।

तिवारी ने कहा, ''इस विधेयक में कहीं नहीं लिखा है कि लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ाई जाएगी।''

उन्होंने चेतावनी दी कि सीटों की संख्या बढ़ाने जैसे फैसले लेना परिसीमन आयोग का काम है, 'सरकार का नहीं।'

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन आयोग की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार यह तय नहीं कर सकती कि सीटों की संख्या कितनी बढ़ेगी।

बिल के संभावित प्रभाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य भारत में सीटें 199 से बढ़कर 308 हो सकती हैं, उत्तर-पश्चिम भारत में 16 सीटों की बढ़ोतरी हो सकती है, पंजाब में 13 से 19 सीटें हो जाएंगी, जबकि दक्षिणी राज्यों में 132 से बढ़कर 198 सीटें हो सकती हैं। वहीं पूर्वोत्तर राज्यों को 14 अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं।

उन्होंने कहा कि मुद्दा केवल प्रतिशत का नहीं, बल्कि कुल संख्या का है।

तिवारी ने तर्क दिया कि इससे छोटे और सीमावर्ती राज्यों की लोकसभा में राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी, खासकर वे राज्य जिन्होंने विकास के लक्ष्यों को पूरा किया है।

उन्होंने कहा कि परिसीमन विधेयक की धारा 3 में 'जनसंख्या' की परिभाषा बदल दी गई है। पहले यह आखिरी जनगणना पर आधारित थी, अब इसे संसद द्वारा तय की जाने वाली जनगणना से जोड़ा गया है।

लोकतंत्र के मूल सिद्धांत 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य' का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसे संघीय ढांचे की जरूरतों के साथ संतुलित करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि पूरी बहस इसी संतुलन को बनाए रखने की है और इस पर गंभीर और व्यवस्थित चर्चा की जरूरत है, न कि जल्दबाजी में विधेयक पास करने की।

तिवारी ने इसे 'असल मुद्दा' बताते हुए कहा कि इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने सरकार से अपील की कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जाए, बजाय इसके कि सदन की कुल सीटें बढ़ाई जाएं।

उन्होंने कहा, ''सदन अभी भी 543 सीटों के हिसाब से पूरी तरह काम नहीं कर पाता, 815 सीटों का सदन कैसे चलेगा? संसद की संख्या के साथ छेड़छाड़ न करें।''

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस पर गंभीर बहस की आवश्यकता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण बिल क्या है?
महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ाना है।
परिसीमन क्या होता है?
परिसीमन का मतलब है चुनावी क्षेत्र की सीमाओं को फिर से निर्धारित करना, ताकि जनसंख्या के अनुसार सीटों का वितरण सही हो सके।
क्यों मनीष तिवारी ने सरकार पर आरोप लगाया?
उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार परिसीमन को महिला आरक्षण बिल के रूप में पेश कर रही है, जिससे कुछ राज्यों की राजनीतिक शक्ति कम हो जाएगी।
ये परिवर्तन छोटे राज्यों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं?
छोटे राज्यों को उनकी जनसंख्या के हिसाब से उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाएगा, जिससे उनकी राजनीतिक ताकत में कमी आएगी।
क्या महिला आरक्षण बिल पहले से पास हो चुका है?
हाँ, महिला आरक्षण बिल 2023 में पास हो चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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