28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महिला आरक्षण बिल 2023 में पास हुआ, सरकार जनता को गुमराह कर रही है: टीएस सिंह देव

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महिला आरक्षण बिल 2023 में पास हुआ, सरकार जनता को गुमराह कर रही है: टीएस सिंह देव

सारांश

कांग्रेस नेता टी.एस. सिंह देव ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार प्रचार कर रही है, जबकि असल में बिल पहले ही पास हो चुका है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण बिल 2023 में पारित किया गया था।
सरकार जनता को गुमराह कर रही है।
यह बिल असल में संविधान संशोधन का है।
सीटों की संख्या बढ़ाने का निर्णय परिसीमन आयोग द्वारा लिया जाएगा।
जनगणना के आंकड़ों पर ही परिसीमन निर्भर करेगा।

अंबिकापुर, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के पूर्व उप मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता टी.एस. सिंह देव ने महिला आरक्षण बिल के संदर्भ में केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि सरकार जनता को गुमराह कर रही है।

टी.एस. सिंह देव ने राष्ट्र प्रेस की रिपोर्टिंग के दौरान बताया, "महिला आरक्षण बिल 2029 का नहीं, बल्कि 2023 में पारित हो चुका है। इसमें लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें सर्वसम्मति से मंजूर हो चुकी हैं। यह कोई नया बिल नहीं है। सरकार जो चर्चा कर रही है, वह केवल लोगों को भ्रमित करने का प्रयास है।"

उन्होंने आगे कहा, "वास्तविक चर्चा इस बात पर हो रही है कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटें कितनी बढ़ाई जाएंगी। लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि महिला आरक्षण बिल पहले से ही पारित हो चुका है, और इसे लागू करने की तिथि जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन पर निर्भर करेगी।"

टी.एस. सिंह देव ने सरकार के दृष्टिकोण पर सवाल उठाते हुए कहा, "सरकार महिला आरक्षण के नाम पर कह रही है कि हम सीटें बढ़ाएंगे, लेकिन राज्यों की घोषणा किए बिना राष्ट्रीय स्तर पर सीटों की घोषणा करेगी। असल में, परिसीमन आयोग ही तय करेगा कि किस राज्य को कितनी अतिरिक्त सीटें मिलेंगी।"

कांग्रेस नेता ने जनगणना के मुद्दे पर भी हमला बोलते हुए कहा, "जनगणना हो या न हो, संविधान में स्पष्ट लिखा है कि अंतिम प्रकाशित जनगणना के आंकड़ों को आधार मानकर परिसीमन किया जाएगा। अगर सरकार आगे जनगणना नहीं कराती तो उसकी कोई आवश्यकता भी नहीं थी।"

टी.एस. सिंह देव ने आरोप लगाया कि सरकार जो नया बिल प्रस्तुत कर रही है, वह वास्तव में महिला आरक्षण का बिल नहीं, बल्कि संविधान संशोधन का बिल है। इसका महिला आरक्षण से कोई संबंध नहीं है। सरकार भाजपा शासित राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ाना चाहती है, जबकि गैर-भाजपा शासित राज्यों में कम करना चाहती है।

उन्होंने कहा, "देश के भोले लोग सोच रहे हैं कि सरकार महिला आरक्षण लेकर आई है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि यह बिल 2023 में ही पारित हो चुका है। वर्तमान में जो बिल लाया जा रहा है, वह केवल लोकसभा और राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ाने का संविधान संशोधन है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि महिला आरक्षण बिल पहले ही पास हो चुका है। यह एक गंभीर मुद्दा है, जो राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। लोगों को इस पर जागरूक होना चाहिए।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण बिल कब पास हुआ था?
महिला आरक्षण बिल 2023 में ही पास हो चुका है।
सरकार ने महिला आरक्षण के नाम पर क्या कहा है?
सरकार ने कहा है कि वह सीटें बढ़ाएगी, लेकिन राज्यों की घोषणा किए बिना।
महिला आरक्षण बिल का असली मकसद क्या है?
टी.एस. सिंह देव के अनुसार, यह केवल संविधान संशोधन का बिल है, न कि वास्तविक महिला आरक्षण का।
टी.एस. सिंह देव ने किस पर सवाल उठाए हैं?
उन्होंने सरकार के महिला आरक्षण बिल पर उठाए गए सवालों को लेकर गुमराह करने का आरोप लगाया है।
क्या जनगणना की आवश्यकता नहीं है?
टी.एस. सिंह देव के अनुसार, जनगणना हो या न हो, परिसीमन अंतिम प्रकाशित जनगणना के आधार पर होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले