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महिला आरक्षण विधेयक 2023 की अधिसूचना: महुआ मोइत्रा की तीखी प्रतिक्रिया

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महिला आरक्षण विधेयक 2023 की अधिसूचना: महुआ मोइत्रा की तीखी प्रतिक्रिया

सारांश

महिला आरक्षण विधेयक के अधिसूचना पर महुआ मोइत्रा ने उठाए गंभीर सवाल। जानिए क्या कहती हैं टीएमसी और कांग्रेस के सांसद।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सांसदों की चिंताएं बढ़ रही हैं।
महुआ मोइत्रा ने अधिसूचना को हास्य कथा बताया।
सरकार पर चुनावी रणनीति के तहत सवाल उठाए जा रहे हैं।
कांग्रेस और टीएमसी के सांसदों ने साझा किया अपना दृष्टिकोण।
जनगणना और परिसीमन के मुद्दे पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महिला आरक्षण विधेयक के संदर्भ में जारी अधिसूचना और परिसीमन को लेकर तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया।

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा, "इस देश की महिलाएं इतनी भी अज्ञानी नहीं हैं कि एक ऐसा कानून जो पहले से पारित हो चुका है, उसे अब किसी और मुद्दे से जोड़ा जाए। उदाहरण के लिए, दक्षिण भारत का हिस्सा 24 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत किया जा रहा है। केंद्र सरकार इन दोनों मुद्दों को जोड़ने की कोशिश कर रही है। परिसीमन, महिला आरक्षण विधेयक का हिस्सा नहीं है। यहां तक कि सरकार ने खुद कहा था कि यह जनगणना के आधार पर होगा। आज आप कह रहे हैं कि यह मौजूदा जनगणना पर नहीं, बल्कि 2011 की जनगणना पर आधारित होगा।"

महिला आरक्षण कानून 2023 के संदर्भ में सरकार द्वारा जारी अधिसूचना पर महुआ मोइत्रा ने कहा, "यह स्पष्ट रूप से एक 'गलतियों की हास्य कथा' है। ऐसा लगता है कि कानून और न्याय मंत्रालय को अचानक यह एहसास हुआ कि जिस विधेयक में वे संशोधन करने की योजना बना रहे थे, वह तो अब तक लागू ही नहीं हुआ था क्योंकि इसे अधिसूचित नहीं किया गया था। ऐसा प्रतीत होता है कि किसी ने उन्हें याद दिलाया कि वे संशोधन पर चर्चा कर रहे थे, लेकिन असली विधेयक को अभी तक अधिसूचित नहीं किया गया था। इसके बाद, इसे जल्दी में अधिसूचित किया गया।"

महिला आरक्षण विधेयक पर टीएमसी सांसद कीर्ति झा आजाद ने कहा, "मेरा कहना है कि अभी महत्वपूर्ण चुनाव चल रहे हैं। संसद के 81 सदस्य व्यस्त हैं। ऐसे में संशोधन विधेयक अभी क्यों लाया गया? इसे चार-पांच दिन बाद भी लाया जा सकता था। वैसे भी चुनाव 29 तारीख को समाप्त हो रहा था, लेकिन उन्हें इतनी जल्दी क्या थी? वे इसे इस सोच में लाए कि महिलाएं उन्हें वोट देंगी, लेकिन इसका उल्टा असर होगा।"

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, "हमारी रणनीति पहले दिन से स्पष्ट रही है। सबसे पहले जनगणना कराओ, उसे ठीक से लागू करो और फिर परिसीमन आयोग बनाओ और उसी के अनुसार सभी प्रक्रियाएं पूरी करो। लेकिन, सरकार ऐसा करने को तैयार नहीं है। असल में, यह सरकार इवेंट प्रबंधन में लगी हुई है। अभी, वे 'नारी शक्ति' और 'नारी वंदन' के नाम पर एक बड़ा अभियान चला रहे हैं। शाम तक वे सार्वजनिक स्थलों पर पुतले जलाने लगेंगे और यह दावा करेंगे कि विपक्ष इसके खिलाफ है।"

कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी ने कहा, "यह महिलाओं के आरक्षण के लिए विधेयक नहीं है, यह परिसीमन के लिए विधेयक है। सबसे पहले, उन्हें यह बात स्वीकार करनी चाहिए। वे इसे मान नहीं रहे हैं। पूरे देश में यह धारणा बनी हुई है कि यह महिलाओं के लिए विधेयक है। इसलिए, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह महिलाओं के आरक्षण का विधेयक नहीं है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन का मुद्दा राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। सांसदों की चिंताओं और तर्कों को समझना आवश्यक है। यह एक गंभीर राजनीतिक मंथन का समय है, जहां विभिन्न पक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण विधेयक 2023 क्या है?
यह विधेयक महिलाओं को संसद और विधानसभा में आरक्षण प्रदान करने का प्रयास करता है।
महुआ मोइत्रा ने क्या कहा?
महुआ मोइत्रा ने अधिसूचना को 'गलतियों की हास्य कथा' बताया और सरकार पर तंज कसा।
क्या यह अधिसूचना सही समय पर लाई गई?
कुछ सांसदों का मानना है कि यह अधिसूचना चुनाव के समय में लाना जल्दबाजी है।
परिसीमन का क्या महत्व है?
परिसीमन चुनावी क्षेत्रों के आकार और सीमाओं को निर्धारित करता है, जो महत्वपूर्ण है।
क्या कांग्रेस का रुख इस मुद्दे पर है?
कांग्रेस ने जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पर सरकार की रणनीति की आलोचना की है।
राष्ट्र प्रेस
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