परिसीमन पर जदयू नेता श्याम रजक का जवाब: 'यह संवैधानिक प्रक्रिया है, राजनीतिक चश्मे से न देखें'
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने 2 अगस्त 2026 को पटना में कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा संसद में परिसीमन विधेयक के विरोध पर तीखी प्रतिक्रिया दी। रजक ने स्पष्ट किया कि परिसीमन कोई नई या असाधारण प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को मज़बूत करने का संवैधानिक उपकरण है।
परिसीमन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
श्याम रजक ने कहा कि देश में पहले भी समय-समय पर परिसीमन होता रहा है और कुछ परिस्थितियों में यह प्रक्रिया बीच में स्थगित होती रही, किंतु इसका मूल उद्देश्य किसी का अधिकार छीनना नहीं, बल्कि नागरिकों को बेहतर प्रतिनिधित्व दिलाना है। उन्होंने कहा कि जब किसी क्षेत्र की आबादी बढ़ती या घटती है, तो निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव अनिवार्य हो जाता है।
रजक के अनुसार इस प्रक्रिया से मतदाताओं को अपने जनप्रतिनिधि तक पहुँचने में सुविधा होती है और जनप्रतिनिधि भी अपने क्षेत्र की समस्याओं पर अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय संवैधानिक प्रक्रिया के रूप में समझने की अपील की।
संसदीय गरिमा पर जदयू नेता का रुख
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर संसद परिसर में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन और उसके बाद राहुल गांधी तथा निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए रजक ने कहा, 'संसद बहस और संवाद का मंच है, कोई रंगमंच नहीं।' उनका मत था कि विरोध का तरीका भी संसदीय गरिमा के अनुरूप होना चाहिए।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करना सभी जनप्रतिनिधियों की साझा जिम्मेदारी है और संसद परिसर में ऐसा कोई भी प्रदर्शन, जो सदन की गरिमा को प्रभावित करे, उचित नहीं कहा जा सकता।
एनएसए डोभाल के बयान पर प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के 'आज़ादी का मतलब मनमर्जी नहीं' वाले बयान पर रजक ने सहमति जताते हुए कहा कि यह नियम केवल आम नागरिकों पर नहीं, बल्कि सरकार, प्रशासन, मीडिया और हर संस्था पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सत्ता पक्ष मनमानी करता है तो वह भी गलत है और यदि प्रशासन अपनी सीमाएँ लाँघता है तो वह भी अस्वीकार्य है।
रजक ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र संविधान से चलता है और संविधान ने हर संस्था तथा हर नागरिक के अधिकार व जिम्मेदारियाँ तय की हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की मनमानी का लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई स्थान नहीं है।
जम्मू-कश्मीर आतंकवाद पर जदयू का स्पष्ट संदेश
जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुई आतंकी घटना पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की टिप्पणियों के संदर्भ में रजक ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और वहाँ के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केंद्र व राज्य दोनों सरकारों की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और आतंकवाद से निपटना सेना और सुरक्षाबलों का काम है। रजक ने नागरिकों से भी अपील की कि वे सुरक्षा एजेंसियों का सहयोग करें और आतंकवादियों को किसी भी प्रकार की शरण या सहायता न दें। यह बयान ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ है।