शरद पवार-एकनाथ शिंदे मुलाकात विवाद: सरनाईक बोले — राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन नहीं
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक ने गुरुवार, 9 जुलाई को स्पष्ट किया कि यदि शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, उनके पुत्र आदित्य ठाकरे और सांसद संजय राउत कभी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ एक ही वाहन में यात्रा करते दिखें, तो इसे राजनीतिक दृष्टि से गलत नहीं ठहराया जाना चाहिए। उनका यह बयान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) प्रमुख शरद पवार की विधान भवन में शिंदे के कक्ष में हुई मुलाकात पर राउत की तीखी आलोचना के बाद आया।
सरनाईक का बयान: राजनीति में स्थायी दुश्मनी नहीं
सरनाईक ने कहा, 'अगर कल संजय राउत, आदित्य ठाकरे या उद्धव ठाकरे एकनाथ शिंदे की कार में यात्रा करते हैं तो इसे गलत नहीं माना जाना चाहिए। मैंने हमेशा कहा है कि राजनीति में कोई भी स्थायी दुश्मन या स्थायी दोस्त नहीं होता है।' उन्होंने राउत की सोच को 'संकीर्ण' करार देते हुए कहा कि पवार एकनाथ शिंदे का सम्मान करते हैं और उन्हें एक अच्छे सहयोगी के रूप में देखते हैं।
पवार-शिंदे मुलाकात और विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि शरद पवार ने विधान भवन में एकनाथ शिंदे के चैंबर में जाकर उनसे मुलाकात की थी। इस पर संजय राउत ने वरिष्ठ नेताओं पर 'गद्दारों' को वैधता देने का आरोप लगाया था। सरनाईक ने बताया कि जैसे ही शिंदे को पवार के आगमन की सूचना मिली, उन्होंने चल रही कैबिनेट बैठक को तुरंत छोड़कर उनसे भेंट की और बाद में बैठक में वापस लौटे। सरनाईक के अनुसार, 'यह दोनों नेताओं के बीच परस्पर सम्मान और अच्छे संबंधों का प्रमाण है।'
मनीषा कायंदे का राउत पर पलटवार
शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने भी राउत के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'संजय राउत कौन होते हैं शरद पवार को सलाह देने वाले? शरद पवार एक अनुभवी राजनेता हैं। उन्हें पता है कि किससे, कब और क्यों मिलना है। क्या उन्हें कुछ भी करने से पहले संजय राउत से इजाजत लेनी होगी?' कायंदे ने व्यंग्यात्मक लहजे में यह भी जोड़ा कि 'संजय राउत को हर सुबह जो पेट दर्द होता है, उसका इलाज एक दिन जरूर एकनाथ शिंदे करेंगे।'
राजनीतिक संदर्भ: महाराष्ट्र में बदलते समीकरण
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में विभिन्न दलों के बीच संबंधों को लेकर अटकलें तेज हैं। 2022 में शिंदे गुट द्वारा शिवसेना से अलग होने के बाद से उद्धव ठाकरे खेमे और शिंदे गुट के बीच तीखी राजनीतिक तनातनी जारी है। पवार की शिंदे से मुलाकात को विपक्षी खेमे में अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की मुलाकातें विपक्षी एकजुटता को कमजोर करती हैं, जबकि सत्तापक्ष इसे सामान्य राजनयिक शिष्टाचार बता रहा है।
आगे क्या
सरनाईक के इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। यह देखना होगा कि क्या शिवसेना के दोनों धड़ों के बीच भविष्य में किसी प्रकार का राजनीतिक संवाद संभव होता है या यह केवल एक राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है।