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पटियाला कोर्ट का स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह को समन, 20 जुलाई को पेश होने का निर्देश

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पटियाला कोर्ट का स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह को समन, 20 जुलाई को पेश होने का निर्देश

सारांश

पटियाला की CJM अदालत ने पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह, उनके बेटे राहुल सैनी और चार अन्य को 'श्वेता जिंदल बनाम डॉ. बलबीर सिंह' मामले में समन जारी किए हैं। BNSS की धारा 223 के तहत जारी इन समनों में 20 जुलाई को पेश होने का निर्देश है — AAP सरकार के लिए यह एक नई कानूनी चुनौती है।

मुख्य बातें

पटियाला CJM अदालत ने 11 जुलाई को पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ.
बलबीर सिंह समेत छह आरोपियों को समन जारी किए।
मामला ' श्वेता जिंदल बनाम डॉ.
बलबीर सिंह (विधायक) ' — थाना त्रिपड़ी, पटियाला से संबंधित।
समन BNSS की धारा 223 के तहत जारी; सभी आरोपियों को 20 जुलाई को अदालत में पेश होना होगा।
आरोपियों में राहुल सैनी (पुत्र), जसबीर गांधी (कार्यालय प्रभारी), पार्षद गुरकृपाल सिंह , गुरप्रीत सिंह और AAP पंजाब शामिल।
निर्धारित तिथि पर अनुपस्थिति की स्थिति में कानूनी कार्रवाई का प्रावधान।

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक डॉ. बलबीर सिंह की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। पटियाला की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत ने 11 जुलाई को 'श्वेता जिंदल बनाम डॉ. बलबीर सिंह (विधायक)' मामले में डॉ. बलबीर सिंह सहित छह आरोपियों को समन जारी किए हैं। अदालत ने सभी को 20 जुलाई को CJM पटियाला की अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला पटियाला के थाना त्रिपड़ी से संबंधित है। अदालत ने ये समन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के तहत जारी किए हैं, जो दंडनीय अपराध के आरोप में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उपस्थिति अनिवार्य करती है। गौरतलब है कि यह मामला एक निजी शिकायत के रूप में दर्ज हुआ है, जिसमें याचिकाकर्ता श्वेता जिंदल ने विधायक और अन्य के विरुद्ध आरोप लगाए हैं।

किन-किन को जारी हुए समन

अदालत द्वारा जारी समन में जिन छह आरोपियों को नोटिस भेजा गया है, वे इस प्रकार हैं:

१. पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री एवं विधायक डॉ. बलबीर सिंह
२. उनके पुत्र राहुल सैनी
३. कार्यालय प्रभारी जसबीर गांधी
४. नगर निगम वार्ड नंबर-14 के पार्षद गुरकृपाल सिंह
५. डेरेवाला मोबाइल शॉप के मालिक गुरप्रीत सिंह
६. आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब

अदालत के निर्देश

न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सभी आरोपियों की उपस्थिति अनिवार्य है। आरोपी व्यक्तिगत रूप से या अपने अधिकृत अधिवक्ता के माध्यम से 20 जुलाई को अदालत में पेश हो सकते हैं। यदि निर्धारित तिथि पर उपस्थिति नहीं होती, तो कानून के प्रावधानों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

राजनीतिक महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब आम आदमी पार्टी पंजाब में अपनी सरकार को लेकर पहले से ही कई विवादों का सामना कर रही है। स्वास्थ्य मंत्री के स्तर के एक वरिष्ठ मंत्री को अदालती समन मिलना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। पार्टी की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, पटियाला की अदालत में निर्धारित है। इस सुनवाई में सभी छह आरोपियों की उपस्थिति या उनके वकीलों की पैरवी तय करेगी कि मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इसे व्यक्तिगत से संस्थागत विवाद की श्रेणी में ले जाता है। 20 जुलाई की सुनवाई से पहले पार्टी की चुप्पी खुद एक संकेत है — और अगर सुनवाई में कोई ठोस जवाब नहीं आया, तो विपक्ष के लिए यह एक और हथियार बन सकता है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पटियाला कोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह को समन क्यों जारी किया?
पटियाला की CJM अदालत ने 'श्वेता जिंदल बनाम डॉ. बलबीर सिंह (विधायक)' मामले में BNSS की धारा 223 के तहत दंडनीय अपराध के आरोप में जवाब देने के लिए डॉ. बलबीर सिंह को समन जारी किया है। यह मामला पटियाला के थाना त्रिपड़ी से संबंधित है।
इस मामले में किन-किन लोगों को समन मिला है?
अदालत ने कुल छह लोगों को समन जारी किए हैं — पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह, उनके पुत्र राहुल सैनी, कार्यालय प्रभारी जसबीर गांधी, पार्षद गुरकृपाल सिंह, गुरप्रीत सिंह (डेरेवाला मोबाइल शॉप) और आम आदमी पार्टी पंजाब।
अदालत में पेशी की तारीख क्या है?
सभी आरोपियों को 20 जुलाई को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM), पटियाला की अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। वे व्यक्तिगत रूप से या अधिकृत वकील के माध्यम से पेश हो सकते हैं।
BNSS की धारा 223 क्या है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 अदालत को दंडनीय अपराध के मामलों में आरोपियों को समन जारी करने का अधिकार देती है। इसके तहत आरोपी को अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होता है।
अनुपस्थित रहने पर क्या होगा?
अदालत ने स्पष्ट किया है कि 20 जुलाई को निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं होने की स्थिति में कानून के प्रावधानों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें गैर-जमानती वारंट जारी करना भी शामिल हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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