दिल्ली कैबिनेट ने अभिलेखागार व पुरातत्व रिसर्च फेलोशिप को मंजूरी दी, 27 फेलो को ₹25,000–₹50,000 मासिक
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार, 11 जुलाई 2026 को घोषणा की कि दिल्ली कैबिनेट ने राजधानी की हजारों वर्ष पुरानी ऐतिहासिक विरासत के वैज्ञानिक अध्ययन, व्यवस्थित दस्तावेजीकरण और डिजिटाइजेशन को बढ़ावा देने के लिए अभिलेखागार (आर्काइव्स) और पुरातत्व (आर्कियोलॉजी) के क्षेत्र में दो अलग रिसर्च फेलोशिप योजनाओं को मंजूरी दी है। इस निर्णय के तहत कुल 27 फेलो को एक-एक वर्ष के कार्यकाल के लिए ₹25,000 से ₹50,000 तक की मासिक फेलोशिप प्रदान की जाएगी।
फेलोशिप योजनाओं का उद्देश्य
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली केवल देश की राष्ट्रीय राजधानी नहीं है, बल्कि यह हजारों वर्षों की संस्कृति, सभ्यता और इतिहास की जीवंत विरासत का केंद्र भी है। उन्होंने कहा, 'इन फेलोशिप के माध्यम से, दिल्ली का इतिहास शोध-आधारित और प्रामाणिक तरीके से आने वाली पीढ़ियों और दुनियाभर के शोधकर्ताओं के सामने पेश किया जाएगा।' उनके अनुसार, अभिलेखागारों, पांडुलिपियों, पुरातात्विक स्थलों और स्मारकों में सदियों से सुरक्षित यह विरासत अब व्यापक वैश्विक पहुँच के लिए तैयार होगी।
आर्काइव्स रिसर्च फेलोशिप: कार्यक्षेत्र और चयन
आर्काइव्स रिसर्च फेलोशिप का लक्ष्य उच्च-गुणवत्ता वाले अभिलेखीय शोध को प्रोत्साहित करना, अभिलेखीय प्रबंधन को सुदृढ़ करना और ऐतिहासिक दस्तावेजों को जनसामान्य के लिए सुलभ बनाना है। इस योजना के अंतर्गत हर वर्ष 15 फेलो चुने जाएंगे, जो रिकॉर्ड प्रबंधन, डिजिटलीकरण, माइक्रोफिल्मिंग, रीप्रोग्राफी, शोध-प्रकाशन और उर्दू व फारसी जैसी ओरिएंटल भाषाओं से जुड़े विषयों पर काम करेंगे।
यह योजना शोधकर्ताओं, इतिहासकारों, भाषाविदों, संरक्षण विशेषज्ञों और विरासत विशेषज्ञों को एक संस्थागत मंच प्रदान करेगी, जहाँ वे दिल्ली के अभिलेखीय विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर विशेष अध्ययन कर सकेंगे।
पुरातत्व रिसर्च फेलोशिप: अनदेखे स्मारकों पर फोकस
पुरातत्व रिसर्च फेलोशिप विशेष रूप से दिल्ली के उन ऐतिहासिक स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों पर केंद्रित होगी जो अब तक कम चर्चित रहे हैं। इन स्थलों के इतिहास, वास्तुकला, पुरातत्व और संरक्षण पर गहन शोध को प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे विरासत संरक्षण और पर्यटन दोनों क्षेत्रों को नई गति मिलेगी।
आम जनता और शोध जगत पर असर
गौरतलब है कि दिल्ली में मुगल काल, दिल्ली सल्तनत, ब्रिटिश युग और उससे भी पहले के हजारों वर्षों के ऐतिहासिक अभिलेख बिखरे पड़े हैं, जिनका बड़ा हिस्सा अभी तक डिजिटल रूप में उपलब्ध नहीं है। यह फेलोशिप उस रिक्तता को भरने का प्रयास है। शोधकर्ताओं और विश्वविद्यालयों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर होगा, क्योंकि प्राथमिक स्रोत सामग्री तक पहुँच अब अधिक व्यवस्थित होगी।
आगे की राह
कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद अब फेलो चयन की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। दिल्ली सरकार के अनुसार, यह पहल राजधानी के आधिकारिक और प्रामाणिक इतिहास को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। आने वाले समय में डिजिटाइज्ड अभिलेखों और शोध-प्रकाशनों के माध्यम से दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत और अधिक सुलभ होगी।