दिल्ली कैबिनेट का बड़ा फैसला: मिर्जा गालिब की हवेली समेत 75 स्मारक NGO को सौंपे जाएंगे
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली कैबिनेट ने 30 जून 2026 को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके तहत चांदनी चौक के बल्लीमारान स्थित मिर्जा गालिब की हवेली सहित दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग के अधीन 75 ऐतिहासिक स्मारकों का रखरखाव ट्रस्ट, एनजीओ, फाउंडेशन और अन्य गैर-सरकारी संस्थाओं को सौंपा जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई इस कैबिनेट बैठक का निर्णय दिल्ली की विरासत संरक्षण नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है।
कौन-से प्रमुख स्मारक शामिल हैं
आधिकारिक बयान के अनुसार, आसफ अली रोड स्थित तुर्कमान गेट और कुदसिया गार्डन की बारादरी भी इस सूची में हैं। महरौली पुरातात्विक पार्क और उत्तरी एवं दक्षिणी रिज क्षेत्र के आसपास लगभग एक दर्जन स्मारक स्थित हैं।
लोदी गार्डन स्थित एक बुर्ज, एक नामहीन मस्जिद, बावली और चारदीवारी से घिरे उद्यान के अवशेष भी इस सूची का हिस्सा हैं। हिंदूराव अस्पताल के निकट उत्तरी रिज क्षेत्र में स्थित 'म्यूटिनी मेमोरियल' को भी इस योजना में शामिल किया गया है।
अन्य उल्लेखनीय स्मारक
डिफेंस कॉलोनी स्थित शेख अली की गुमटी, लोदी रोड फ्लाईओवर के पास गोल गुंबद, हौज खास टैंक के समीप डियर पार्क में मुंडा गुंबद और बड़ा लाओ का गुंबद भी इस सूची में शामिल हैं। इसके अलावा वसंत विहार में प्रिया सिनेमा के पास डीडीए पार्क स्थित मस्जिद, बावली और जल चैनल तथा खेल गांव के निकट सीरी ऑडिटोरियम स्थित दरवेश शाह की मस्जिद भी गैर-सरकारी संस्थाओं को सौंपी जाएंगी।
बदरपुर गांव में बदरपुर सराय के उत्तरी, केंद्रीय और दक्षिणी प्रवेश द्वार तथा परिसर के अवशेष भी इस योजना के दायरे में आते हैं। राणा प्रताप बाग में महलदार खान गार्डन का प्रवेश द्वार, द्वारका सेक्टर-12 की बावली, एस.पी. मुखर्जी मार्ग स्थित मालचा महल, कुतुब रोड का इमामबाड़ा और करोल बाग के पास दक्षिणी रिज क्षेत्र में भुली भटियारी का महल भी इस सूची में सम्मिलित हैं।
योजना की रूपरेखा
इस प्रस्ताव के अंतर्गत चयनित संस्थाएं इन स्मारकों को 'गोद' लेकर उनके संरक्षण और नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी उठाएंगी। यह सभी 75 स्मारक दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग के अधीन आते हैं और इनका प्रशासनिक नियंत्रण सरकार के पास ही बना रहेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में विरासत संरक्षण के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी के मॉडल को बढ़ावा देने की चर्चा जोर पकड़ रही है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार पहले से ही 'अडॉप्ट ए हेरिटेज' जैसी योजनाओं के माध्यम से इसी दिशा में काम कर रही है।
आगे क्या होगा
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब पुरातत्व विभाग इच्छुक संस्थाओं से आवेदन आमंत्रित करेगा और चयन प्रक्रिया के बाद रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। मिर्जा गालिब की हवेली जैसे सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्मारकों के संरक्षण में यह कदम दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।