दिल्ली CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला: जल-सीवर इंफ्रा शुल्क में G-H कॉलोनियों को 70% छूट
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 22 मई 2026 को दिल्ली सचिवालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जल और सीवर अवसंरचना शुल्क (IFC) को युक्तिसंगत बनाने की घोषणा की, जिससे राजधानी के निवासियों, आवासीय इकाइयों, संस्थानों और उद्योगों को सीधी वित्तीय राहत मिलेगी। इस निर्णय में G और H श्रेणी की कॉलोनियों को 70% तक और E व F श्रेणी की कॉलोनियों को 50% की छूट दी गई है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री गुप्ता ने स्पष्ट किया कि अब IFC भवन के कुल क्षेत्रफल के आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक जल मांग के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। यह बदलाव उन संपत्ति मालिकों के लिए विशेष रूप से राहतकारी है जिनकी इमारत बड़ी है लेकिन पानी की खपत कम है।
इसके अतिरिक्त, IFC केवल नई निर्माण परियोजनाओं या मौजूदा संपत्ति पर किए गए अतिरिक्त निर्माण पर ही लागू होगा। पुनर्विकास परियोजनाओं में जहाँ पानी की माँग में कोई वृद्धि नहीं होती, वहाँ यह शुल्क नहीं लगेगा।
किन्हें मिलेगी राहत
E और F श्रेणी की कॉलोनियों में स्थित संपत्तियों पर IFC में 50% की छूट लागू होगी, जबकि G और H श्रेणी की कॉलोनियों में यह छूट 70% तक होगी। ये श्रेणियाँ सामान्यतः आर्थिक रूप से कमज़ोर और निम्न-मध्यम वर्गीय बस्तियों को दर्शाती हैं।
200 वर्ग मीटर से बड़े भूखंडों पर निर्मित 50 वर्ग मीटर या उससे कम क्षेत्रफल वाली आवासीय इकाइयों को 50% की अतिरिक्त छूट मिलेगी, जिससे छोटे परिवारों और मध्यम वर्ग को प्रत्यक्ष लाभ होगा।
गणना से बाहर रखे गए क्षेत्र
गैर-फ्लोर एरिया रेशियो (Non-FAR) वाले क्षेत्रों के साथ-साथ खुले और बिना ढके स्थानों को पानी की माँग की गणना या IFC के आकलन में शामिल नहीं किया जाएगा। यह प्रावधान उन संपत्ति मालिकों के लिए फायदेमंद है जिनके पास आँगन, पार्किंग या बगीचे जैसे खुले क्षेत्र हैं।
सरकार का उद्देश्य
मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य नागरिकों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ कम करना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और विकास को प्रोत्साहन देना है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जल प्रबंधन, सीवेज उपचार और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में दिल्ली को एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करना चाहती है।
गौरतलब है कि यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब दिल्ली में बुनियादी ढाँचे की लागत और जल संकट को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। नई IFC नीति राजधानी में निर्माण और पुनर्विकास गतिविधियों को गति देने में सहायक हो सकती है।