क्या सूक्ष्म और लघु उद्योगों को <b>सीएम रेखा गुप्ता</b> की बड़ी सौगात मिली है?
सारांश
Key Takeaways
- कॉमन फैसिलिटी सेंटर छोटे उद्यमियों के लिए साझा सुविधाएं प्रदान करेंगे।
- इससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी।
- परियोजना की कुल लागत 60 करोड़ रुपये है।
- यह केंद्र पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन को बढ़ावा देंगे।
- छोटे उद्यमियों को आधुनिक तकनीक का लाभ मिलेगा।
नई दिल्ली, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली सरकार ने राजधानी के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सचिवालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में बादली और बवाना के औद्योगिक क्षेत्रों में दो कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) स्थापित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस निर्णय पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी सरकार दिल्ली के छोटे और सूक्ष्म उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। छोटे उद्यमी अक्सर भारी निवेश न कर पाने के कारण आधुनिक तकनीक और महंगी मशीनों का उपयोग नहीं कर पाते। ये कॉमन फैसिलिटी सेंटर उनके लिए इस समस्या का समाधान प्रदान करेंगे और उनके व्यवसाय में सहूलियत भी बढ़ाएंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह परियोजना केंद्र सरकार की सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम (एमएसई-सीडीपी) योजना के तहत कार्यान्वित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य एक ही छत के नीचे ऐसी सुविधाएं प्रदान करना है, जिन्हें व्यक्तिगत रूप से खरीदना छोटे उद्यमियों के लिए संभव नहीं होता। इन केंद्रों के माध्यम से सूक्ष्म और लघु उद्योगों को साझा मंच दिया जाएगा, जहां वे बिना भारी निवेश के आधुनिक मशीनों, टेस्टिंग लैब और प्रशिक्षण सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।
इस परियोजना की अनुमानित लागत 60 करोड़ रुपये है, जिसमें प्रत्येक सेंटर पर 30 करोड़ रुपये खर्च होंगे। उन्होंने कहा कि सीएफसी के माध्यम से श्रमिकों के कौशल, तकनीकी प्रशिक्षण और उत्पाद गुणवत्ता सुधार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही, पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट और टिकाऊ तकनीक से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इन केंद्रों से क्लस्टर की इकाइयों को लागत में बचत होगी, खासकर माइक्रो और नई इकाइयों को बड़ा लाभ मिलेगा। साझा सेवाओं और सामूहिक खरीद से उत्पादन लागत में कमी आएगी और बाजार तक पहुंच मजबूत होगी। इससे न केवल उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी, बल्कि नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे और औद्योगिक क्लस्टरों का सतत विकास सुनिश्चित होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के सूक्ष्म और लघु उद्यम आत्मनिर्भर बनें, आधुनिक तकनीक से जुड़े और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान मजबूत करें। इस दिशा में सीएफसी परियोजनाएं एक मजबूत आधार प्रदान करेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि कैबिनेट द्वारा स्वीकृत यह निर्णय दिल्ली के औद्योगिक विकास को नई गति देगा और छोटे उद्यमियों के लिए विकास के नए अवसर खोलेगा।