दिल्ली जल बोर्ड की नई IFC नीति: G-H कॉलोनियों में 70% छूट, ₹13 लाख का बिल घटकर ₹1.62 लाख
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने 22 अप्रैल 2026 को पानी और सीवर से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क (IFC) की संरचना में व्यापक बदलाव की घोषणा की, जिससे राजधानी के लाखों निवासियों — विशेषकर निम्न और मध्यम आय वर्ग की कॉलोनियों में रहने वालों — पर आर्थिक बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी। नई नीति के तहत IFC अब पानी की वास्तविक माँग के आधार पर तय होगा, न कि प्रॉपर्टी के कुल क्षेत्रफल पर।
नई IFC नीति में क्या बदला
नई व्यवस्था में IFC केवल नई डेवलपमेंट या किसी प्रॉपर्टी में अतिरिक्त निर्माण पर लागू होगा। जिन रीडेवलपमेंट परियोजनाओं में पानी की माँग नहीं बढ़ेगी, उन पर कोई IFC नहीं लगेगा। इसके अलावा, नॉन-FAR और खुले क्षेत्रों को IFC गणना से बाहर रखा जाएगा।
यह शुल्क केवल 200 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर बनी संपत्तियों पर लागू होगा। प्लॉट का आकार सेल डीड, कन्वेंस डीड, रजिस्टर्ड GPA या एग्रीमेंट टू सेल जैसे दस्तावेज़ों के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।
श्रेणीवार छूट का ढाँचा
E और F श्रेणी की कॉलोनियों के निवासियों को IFC में 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी, जबकि G और H श्रेणी की कॉलोनियों में यह राहत 70 प्रतिशत तक होगी। 200 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर बनी 50 वर्ग मीटर तक की छोटी आवासीय इकाइयों को पानी और सीवर IFC में अतिरिक्त 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
आयकर अधिनियम की धारा 12AB के तहत पंजीकृत संस्थान और धार्मिक स्थल भी 50 प्रतिशत छूट के पात्र होंगे। जिन संस्थागत और व्यावसायिक भवनों में ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) सक्रिय रूप से काम कर रहा है, उन्हें सीवर IFC में 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी। हालाँकि, STP बंद पाए जाने पर प्रतिदिन 0.05 प्रतिशत का जुर्माना लगाया जाएगा।
आम जनता पर आर्थिक असर
नई नीति का व्यावहारिक प्रभाव उदाहरण से स्पष्ट होता है। 200 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर बने 300 FAR और चार मंजिला मकान के लिए A और B श्रेणी की कॉलोनियों में पहले जहाँ लगभग ₹13.18 लाख IFC देना पड़ता था, वह अब घटकर करीब ₹5.40 लाख रह जाएगा। E और F श्रेणी में यही शुल्क लगभग ₹2.70 लाख और G व H श्रेणी में करीब ₹1.62 लाख होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में निर्माण लागत लगातार बढ़ रही है और छोटे भूखंड मालिकों पर पुरानी IFC संरचना के कारण असंगत वित्तीय दबाव था।
बुनियादी ढाँचे के विस्तार को भी मंजूरी
दिल्ली जल बोर्ड ने नजफगढ़ इलाके में 12 नए विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का ठेका दिया है। इनकी कुल क्षमता 46.5 MGD होगी और परियोजना पर करीब ₹860 करोड़ खर्च होंगे।
केशोपुर STP की क्षमता 12 MGD से बढ़ाकर 18 MGD की जाएगी। इसके अलावा त्रिलोकपुरी में पुराने ट्रंक सीवर के जीर्णोद्धार और शाहदरा के रोहतास नगर में नए अंडरग्राउंड रिज़र्वायर व बूस्टर पंपिंग स्टेशन के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है।
गौरतलब है कि नजफगढ़ और शाहदरा दोनों क्षेत्र दिल्ली में जलभराव और सीवेज ओवरफ्लो की दृष्टि से संवेदनशील रहे हैं। यह निवेश दीर्घकालिक जल प्रबंधन की दिशा में एक संरचनात्मक कदम माना जा रहा है।