12 जुलाई 2026
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श्रीगंगानगर रेप केस: हनुमान बेनीवाल की मांग — बाल यौन शोषण दोषियों को सार्वजनिक फांसी का बने कानून

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श्रीगंगानगर रेप केस: हनुमान बेनीवाल की मांग — बाल यौन शोषण दोषियों को सार्वजनिक फांसी का बने कानून

सारांश

श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय नाबालिग के कथित यौन उत्पीड़न मामले ने राजस्थान में राजनीतिक भूचाल ला दिया है। आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल ने भजनलाल सरकार पर प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाते हुए बाल यौन शोषण दोषियों को सार्वजनिक फांसी देने के कानून की मांग की है।

मुख्य बातें

श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटना सामने आई।
आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल ने 11 जुलाई को एक्स पर पोस्ट कर राजस्थान सरकार की कड़ी आलोचना की।
बेनीवाल का आरोप — पीड़िता को कई दिनों तक बंधक रखा गया, लेकिन स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगी।
मांग: बाल यौन शोषण दोषियों को चौराहों पर सार्वजनिक फांसी देने का कानून बनाया जाए।
पीड़िता के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई, इलाज, पुनर्वास और मनोवैज्ञानिक परामर्श की मांग।
घटना ने राजस्थान में व्यापक जन-आक्रोश और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की हैं।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के सांसद एवं राष्ट्रीय संयोजक हनुमान बेनीवाल ने श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ कथित यौन उत्पीड़न की कड़ी निंदा करते हुए 11 जुलाई को मांग की कि बच्चों के यौन शोषण के दोषियों को चौराहों पर सार्वजनिक रूप से फांसी देने का कानून बनाया जाए। बेनीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार पर निशाना साधा और राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।

मुख्य घटनाक्रम

आरएलपी संयोजक ने अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और राजस्थान मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) को टैग किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित तौर पर पीड़िता को कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया और उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया, जबकि स्थानीय पुलिस को इस घटना की भनक तक नहीं लगी। बेनीवाल ने कहा कि इस घटना ने राजस्थान को शर्मसार किया है और यह गंभीर प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करती है।

पुलिस और प्रशासन पर सवाल

बेनीवाल ने सवाल उठाया कि स्थानीय प्रशासन की जानकारी के बिना होटलों में इस प्रकार का कथित अपराध कैसे हो सकता है। उन्होंने पुलिस, आबकारी विभाग और निगरानी के लिए जिम्मेदार अन्य अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि स्थानीय खुफिया नेटवर्क और पुलिस तंत्र की यह विफलता अक्षम्य है।

न्याय और पुनर्वास की मांग

आरएलपी नेता ने केवल मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी को अपर्याप्त बताया। उन्होंने उन सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आरोपी को संरक्षण दिया हो, साथ ही उन लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी। बेनीवाल ने राजस्थान सरकार से पीड़िता के इलाज, पुनर्वास और मनोवैज्ञानिक परामर्श की पूरी जिम्मेदारी लेने तथा फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मामले की रोजाना सुनवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

सार्वजनिक फांसी के कानून की पुरानी मांग

बेनीवाल ने बताया कि वे संसद में पहले भी बच्चों के खिलाफ अपराधों के दोषियों के लिए सख्त कानूनों की मांग कर चुके हैं। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि ऐसे मामलों में दोषी पाए गए अपराधियों को सार्वजनिक रूप से फांसी देने का कानून बनाया जाए, क्योंकि उनके अनुसार कड़ी सजा ही ऐसे अपराधों पर अंकुश लगा सकती है।

व्यापक राजनीतिक प्रतिक्रिया

नाबालिग के साथ कथित उत्पीड़न की इस घटना ने पूरे राजस्थान में व्यापक जन-आक्रोश और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की हैं। विभिन्न दलों के नेताओं ने दोषियों के खिलाफ त्वरित जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। यह घटना राज्य में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चल रही बहस को और तीखा कर देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल अनुत्तरित रहता है कि क्या मौजूदा पॉक्सो कानून के तहत सख्त अनुपालन और त्वरित न्याय पहले सुनिश्चित किया गया है। राजस्थान में बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट की उपलब्धता और दोषसिद्धि दर पर सवाल उठना ज़रूरी है। पुलिस की खुफिया विफलता — जहाँ एक नाबालिग कथित तौर पर कई दिनों तक बंधक रही — यह दर्शाती है कि समस्या केवल कानून की नहीं, बल्कि उसके क्रियान्वयन की है। नए कानूनों की मांग से पहले मौजूदा तंत्र की जवाबदेही तय करना ज़्यादा ज़रूरी और तत्काल कदम होगा।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीगंगानगर नाबालिग यौन उत्पीड़न मामला क्या है?
राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक 13 वर्षीय लड़की के साथ कथित यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है। आरोप है कि पीड़िता को कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया और उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया, जबकि स्थानीय पुलिस को घटना की जानकारी नहीं हो सकी।
हनुमान बेनीवाल ने क्या मांग की है?
आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल ने बाल यौन शोषण के दोषियों को शहर के चौराहों पर सार्वजनिक रूप से फांसी देने का कानून बनाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने फास्ट-ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई और पीड़िता के पुनर्वास की भी मांग की है।
बेनीवाल ने राजस्थान सरकार पर क्या आरोप लगाए?
बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार पर गंभीर प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि स्थानीय खुफिया नेटवर्क और पुलिस तंत्र कथित अपराध को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहे।
इस मामले में किनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है?
बेनीवाल ने केवल मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी को अपर्याप्त बताते हुए उन सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आरोपी को संरक्षण दिया। इसके अलावा लापरवाह पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की गई है।
पीड़िता के लिए क्या राहत मांगी गई है?
बेनीवाल ने राजस्थान सरकार से पीड़िता के संपूर्ण इलाज, पुनर्वास और मनोवैज्ञानिक परामर्श की जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया है। साथ ही फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मामले की रोजाना सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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