13 जुलाई 2026
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हनुमान बेनीवाल की टिप्पणियों पर भाजपा का पलटवार: मदन राठौड़ बोले — अभद्र भाषा लोकतंत्र की जड़ें खोखली करती है

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हनुमान बेनीवाल की टिप्पणियों पर भाजपा का पलटवार: मदन राठौड़ बोले — अभद्र भाषा लोकतंत्र की जड़ें खोखली करती है

सारांश

भाजपा राजस्थान के आठ से अधिक वरिष्ठ नेताओं ने एकजुट होकर RLP सांसद हनुमान बेनीवाल की कथित अभद्र टिप्पणियों की निंदा की। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए मीडिया से भी ऐसे नेताओं को हतोत्साहित करने की अपील की।

मुख्य बातें

भाजपा राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने 28 मई 2026 को RLP सांसद हनुमान बेनीवाल की टिप्पणियों की कड़ी निंदा की।
राठौड़ ने कहा कि कुछ नेता सुर्खियाँ बटोरने के लिए अभद्र भाषा का सहारा ले रहे हैं, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए गंभीर खतरा है।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी और डॉ.
अरुण चतुर्वेदी सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खिलाफ कथित टिप्पणियों को निंदनीय बताया।
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि बेनीवाल की भाषा एक सांसद के पद की गरिमा के विपरीत है।
भाजपा ने मीडिया से भी अपील की कि वे अभद्र भाषा का सहारा लेने वाले नेताओं को हतोत्साहित करें।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने 28 मई 2026 को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सांसद हनुमान बेनीवाल की टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कुछ राजनेताओं द्वारा इस्तेमाल की जा रही भाषा अब एक ऐसे स्तर तक पहुँच गई है जो किसी भी लोकतांत्रिक मानक पर स्वीकार्य नहीं है। राठौड़ के अनुसार, यह प्रवृत्ति केवल व्यक्तिगत मर्यादा का उल्लंघन नहीं, बल्कि संसदीय परंपराओं और राजनीतिक संस्कृति के लिए एक गंभीर चुनौती है।

मुख्य आरोप और भाजपा का रुख

राठौड़ ने आरोप लगाया कि कुछ नेता सुर्खियों में बने रहने और अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए जानबूझकर अभद्र भाषा का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा, 'राजनीति में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है। राजनीतिक विरोध स्वाभाविक है, लेकिन सार्वजनिक चर्चा में गरिमा और शिष्टता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।' उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने पद की गरिमा और अपनी भाषा के प्रति सदैव सचेत रहना चाहिए।

वरिष्ठ भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि भाषाई मर्यादा और सार्वजनिक जीवन की गरिमा बनाए रखना हर निर्वाचित प्रतिनिधि की मूलभूत जिम्मेदारी है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खिलाफ की गई कथित टिप्पणियों को निंदनीय और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया।

राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि भारतीय राजनीति की परंपरा हमेशा से शिष्ट संवाद और वैचारिक बहस की रही है, लेकिन कुछ नेता राजनीतिक लाभ के लिए शिष्टता की सभी सीमाएँ लाँघ रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के विरुद्ध इस्तेमाल की गई कथित भाषा को दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक संस्कृति के लिए हानिकारक बताया।

मंत्री और पार्टी पदाधिकारियों के बयान

गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने बेनीवाल की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के विरुद्ध इस्तेमाल की गई भाषा अनुचित है और एक सांसद के पद की गरिमा के बिल्कुल विपरीत है।

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दधीच ने कहा कि असहमति और विरोध लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं, लेकिन व्यक्तिगत हमले और अभद्र टिप्पणियाँ स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं को कमज़ोर करती हैं। प्रदेश महासचिव श्रवण सिंह बागड़ी ने भी कहा कि वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, परंतु राजनीतिक विरोध के नाम पर अभद्र भाषा को किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता।

प्रदेश महासचिव भूपेंद्र सैनी ने कहा कि जनता ऐसी राजनीति की अपेक्षा रखती है जो विकास, सुशासन और जन कल्याण पर केंद्रित हो — न कि ध्यान खींचने वाले विवादास्पद बयानों पर। भाजपा महासचिव मिथिलेश गौतम ने भी इन बयानों को लोकतांत्रिक मूल्यों और भारतीय राजनीतिक संस्कृति के विपरीत बताते हुए निंदा की।

मीडिया से अपील और 'राजनीतिक शुद्धिकरण' की माँग

राठौड़ ने मीडिया से आग्रह किया कि वे उन नेताओं को हतोत्साहित करें जो अपमानजनक भाषा का सहारा लेते हैं और वैचारिक रूप से उनका विरोध करें। उनका कहना था कि ऐसा किए बिना राजनीतिक चर्चा को स्वस्थ मानकों पर वापस नहीं लाया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की बयानबाज़ी राजनीतिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों पर जनता के भरोसे को गंभीर रूप से कमज़ोर कर सकती है।

आगे क्या

भाजपा के इस सामूहिक पलटवार से स्पष्ट है कि पार्टी बेनीवाल की टिप्पणियों को केवल एक बयान तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे एक व्यापक राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में आगामी चुनावी सरगर्मियों के बीच विभिन्न दलों के बीच वाकयुद्ध तेज़ होता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति की तरह दिखती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि भाजपा ने बेनीवाल की टिप्पणियों का विशिष्ट उद्धरण सार्वजनिक नहीं किया, जिससे 'अभद्र भाषा' का आरोप सत्यापन से परे बना रहता है। राजस्थान में जब सत्ताधारी दल इस तरह एकमुश्त प्रतिक्रिया देता है, तो यह अक्सर विपक्षी नेता को अप्रत्यक्ष रूप से और बड़ा मंच दे देता है। असली सवाल यह है कि क्या 'भाषाई मर्यादा' की यह माँग चुनावी मौसम में भाजपा के लिए एक नैतिक ऊँचाई का दावा है, या बेनीवाल की बढ़ती राजनीतिक प्रासंगिकता से उपजी बेचैनी।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान बेनीवाल ने ऐसा क्या कहा जिस पर भाजपा ने आपत्ति जताई?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, RLP सांसद हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राजस्थान मंत्रिमंडल के विरुद्ध कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। भाजपा नेताओं ने इन टिप्पणियों को लोकतांत्रिक मूल्यों और एक सांसद के पद की गरिमा के विपरीत बताया, हालाँकि टिप्पणियों का सटीक पाठ सार्वजनिक रूप से उद्धृत नहीं किया गया।
मदन राठौड़ ने इस विवाद पर क्या कहा?
भाजपा राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि राजनीति में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है। उन्होंने यह भी कहा कि आज की राजनीति को 'शुद्धिकरण' की आवश्यकता है और ऐसी बयानबाज़ी जनता के राजनीतिक संस्थाओं पर भरोसे को कमज़ोर करती है।
भाजपा के किन-किन नेताओं ने बेनीवाल की आलोचना की?
प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के अलावा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी और डॉ. अरुण चतुर्वेदी, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम, प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दधीच, महासचिव श्रवण सिंह बागड़ी, भूपेंद्र सैनी और मिथिलेश गौतम ने एकजुट होकर बेनीवाल की टिप्पणियों की निंदा की।
क्या भाजपा ने मीडिया को भी इस मामले में कोई संदेश दिया?
हाँ, मदन राठौड़ ने मीडिया से आग्रह किया कि वे उन नेताओं को हतोत्साहित करें जो अपमानजनक भाषा का सहारा लेते हैं। उनका कहना था कि मीडिया की भूमिका राजनीतिक चर्चा को स्वस्थ मानकों पर वापस लाने में अहम है।
हनुमान बेनीवाल कौन हैं और उनकी पार्टी का क्या रुख है?
हनुमान बेनीवाल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सांसद हैं और राजस्थान की राजनीति में एक प्रमुख जाट नेता के रूप में जाने जाते हैं। इस विवाद पर उनकी पार्टी या उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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