10 अगस्त 2026
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'ऑपरेशन टाइगर' पर मंत्री छगन भुजबल का बयान: एनसीपी को ऐसे ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं

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'ऑपरेशन टाइगर' पर मंत्री छगन भुजबल का बयान: एनसीपी को ऐसे ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं

सारांश

उद्धव ठाकरे गुट के 6 बागी सांसदों के शिंदे-शिवसेना में शामिल होने से महाराष्ट्र की सियासत गर्म है। मंत्री छगन भुजबल ने एनसीपी को ऐसे ऑपरेशन से दूर बताया, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे कानूनी और सफल करार दिया। चुनावी मौसम में यह घटनाक्रम महायुति गठबंधन की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

मुख्य बातें

उद्धव ठाकरे (यूबीटी) के 6 बागी सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए; मीडिया ने इसे 'ऑपरेशन टाइगर' नाम दिया।
मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि एनसीपी को ऐसे किसी ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं है।
भाजपा सांसद अशोक चव्हाण ने पूरे घटनाक्रम को कानूनी और वैध बताया।
मंत्री गिरीश महाजन ने दावा किया कि केंद्र में अब महायुति के पास पर्याप्त संख्याबल है।
सपा विधायक अबू आजमी ने यूसीसी कमेटी और राम मंदिर चंदे पर सरकार पर निशाना साधा।
शिवसेना विधायक नीलेश नारायण राणे ने आजमी के बयान पर पलटवार करते हुए यूसीसी लागू करने की वकालत की।

महाराष्ट्र की राजनीति में 23 जून को उस वक्त नई हलचल देखने को मिली जब उद्धव ठाकरे (यूबीटी) गुट के 6 बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने को लेकर सत्तारूढ़ महागठबंधन के नेताओं ने खुलकर प्रतिक्रिया दी। इस पूरे घटनाक्रम को मीडिया ने 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री छगन भुजबल ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को ऐसे किसी ऑपरेशन की न तो ज़रूरत है और न ही वे इस तरह के राजनीतिक दांव-पेच में विश्वास रखते हैं।

भुजबल का सीधा जवाब

मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान जब भुजबल से पूछा गया कि क्या एनसीपी भी कोई ऐसा ऑपरेशन चलाने की योजना बना रही है, तो उन्होंने दो टूक कहा, 'हम ऑपरेशन नहीं करते, उसकी ज़रूरत भी नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि 'ऑपरेशन टाइगर' की सफलता या विफलता का असली पैमाना चुनाव के दौरान जनता की प्रतिक्रिया से तय होगा।

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत के बयानों पर टिप्पणी करने से भुजबल ने किनारा करते हुए कहा, 'वे पार्टी के प्रवक्ता और सांसद हैं, साथ ही संपादक भी — उनके पास बोलने का खजाना है, मैं उन पर क्या कहूं?'

एनसीपी और भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया

एनसीपी नेता जीशान सिद्दीकी ने कहा कि 'ऑपरेशन टाइगर' नाम मीडिया का दिया हुआ है। उनके अनुसार शिवसेना (यूबीटी) के लोग हमेशा से नाखुश रहे हैं, क्योंकि वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक अपनी पहुँच नहीं बना पाते। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे के स्थानीय कार्यकर्ताओं को भी उनसे मिलने का आसान मौका नहीं मिलता।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद अशोक चव्हाण ने इस पूरे मामले को कानूनी रूप से सही बताते हुए कहा, 'जो कुछ भी किया गया है, वह कानून के मुताबिक और पूरी तरह वैध है।' वहीं, भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा, 'जब सभी कह रहे हैं कि ऑपरेशन टाइगर सफल हुआ, तो सभी लोग गलत तो नहीं हो सकते।'

मंत्री गिरीश महाजन ने दावा किया कि केंद्र में अब उनके पास पर्याप्त संख्याबल है। उन्होंने कहा, 'बंगाल, महाराष्ट्र और कई अन्य राज्यों से सांसद हमारे साथ जुड़ रहे हैं, भविष्य में किसी भी विधेयक को पास कराने के लिए हमारे पास पर्याप्त संख्या होगी।'

यूसीसी और राम मंदिर चंदे पर विवाद

इसी बीच, समाजवादी पार्टी (सपा) विधायक अबू आजमी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का मसौदा तैयार करने के लिए कमेटी को मंजूरी दिए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह कदम एनआरसी की दिशा में उठाया जा रहा है और मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। राम मंदिर के चंदे को लेकर भी उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और कहा कि चुनावी फायदे के लिए राम के नाम का इस्तेमाल हो रहा है।

शिवसेना विधायक नीलेश नारायण राणे ने आजमी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि वे सदन में धर्म के नाम पर बंटवारा पैदा करना चाहते हैं और वित्त या विकास जैसे असली मुद्दों से ध्यान हटाते हैं। राणे ने यूसीसी लागू करने की पुरज़ोर वकालत की और कहा कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए ऐसे कदम ज़रूरी हैं।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ शुरू हो रही हैं और सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन अपनी स्थिति मज़बूत करने की कोशिश में है। गौरतलब है कि शिवसेना के विभाजन के बाद से दोनों गुटों के बीच सांसदों और विधायकों को अपनी ओर खींचने की होड़ जारी है। आने वाले चुनावों में जनता की प्रतिक्रिया ही तय करेगी कि 'ऑपरेशन टाइगर' वाकई कितना सफल रहा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह महाराष्ट्र में चुनाव-पूर्व संख्याबल की उस होड़ का प्रतीक है जो शिवसेना विभाजन के बाद से लगातार जारी है। भुजबल का यह कहना कि 'एनसीपी को ऐसे ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं', दरअसल महायुति के भीतर की उस अंदरूनी प्रतिस्पर्धा को उजागर करता है जहाँ हर घटक दल अपनी अलग पहचान बनाए रखना चाहता है। असली सवाल यह है कि क्या ये बागी सांसद अगले चुनाव में अपने क्षेत्रों में जनता का भरोसा जीत पाएंगे — क्योंकि संख्याबल और जनादेश हमेशा एक नहीं होते। यूसीसी और राम मंदिर चंदे जैसे मुद्दों का इस राजनीतिक उठापटक के साथ एक साथ उठना यह बताता है कि महाराष्ट्र का चुनावी एजेंडा तेज़ी से ध्रुवीकरण की दिशा में बढ़ रहा है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ऑपरेशन टाइगर' क्या है और महाराष्ट्र में इसकी चर्चा क्यों हो रही है?
'ऑपरेशन टाइगर' वह नाम है जो मीडिया ने उस घटनाक्रम को दिया है जिसमें उद्धव ठाकरे (यूबीटी) गुट के 6 बागी सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए। यह महाराष्ट्र में चुनाव-पूर्व राजनीतिक पुनर्गठन का हिस्सा माना जा रहा है।
मंत्री छगन भुजबल ने 'ऑपरेशन टाइगर' पर क्या कहा?
मंत्री छगन भुजबल ने मुंबई में मीडिया से बातचीत में कहा कि एनसीपी ऐसे ऑपरेशन नहीं करती और उसे इसकी ज़रूरत भी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि इस ऑपरेशन की सफलता का सही आकलन चुनाव के दौरान जनता की प्रतिक्रिया से होगा।
भाजपा नेताओं ने इस मामले पर क्या रुख अपनाया?
भाजपा सांसद अशोक चव्हाण ने कहा कि जो कुछ हुआ वह पूरी तरह कानूनी है। भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने ऑपरेशन को सफल बताया और मंत्री गिरीश महाजन ने दावा किया कि केंद्र में अब महायुति के पास पर्याप्त संख्याबल है।
यूसीसी और राम मंदिर चंदे पर महाराष्ट्र विधानसभा में क्या विवाद हुआ?
सपा विधायक अबू आजमी ने यूसीसी कमेटी को मंजूरी दिए जाने पर आपत्ति जताई और राम मंदिर चंदे में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। शिवसेना विधायक नीलेश नारायण राणे ने पलटवार करते हुए यूसीसी लागू करने की वकालत की और आजमी पर सदन में व्यवधान डालने का आरोप लगाया।
एनसीपी नेता जीशान सिद्दीकी ने इस पूरे मामले को कैसे देखा?
एनसीपी नेता जीशान सिद्दीकी ने कहा कि 'ऑपरेशन टाइगर' नाम मीडिया का दिया हुआ है। उनके अनुसार शिवसेना (यूबीटी) के लोग पहले से ही नाखुश थे क्योंकि वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक नहीं पहुँच पाते थे और उद्धव ठाकरे के स्थानीय कार्यकर्ताओं को भी उनसे मिलने का मौका आसानी से नहीं मिलता।
राष्ट्र प्रेस
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