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ऑपरेशन टाइगर: उद्धव गुट के 7 सांसद और 16 विधायक शिंदे खेमे के संपर्क में — MLC कृपाल तुमाने का दावा

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ऑपरेशन टाइगर: उद्धव गुट के 7 सांसद और 16 विधायक शिंदे खेमे के संपर्क में — MLC कृपाल तुमाने का दावा

सारांश

महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' की आँच तेज हो गई है। शिंदे गुट के MLC कृपाल तुमाने का दावा है कि उद्धव ठाकरे के 7 सांसद और 16 विधायक पाला बदलने की कगार पर हैं। संजय राउत ने इसे नकारा, लेकिन एक अन्य सांसद का 'कल का पता नहीं' वाला बयान नई अटकलों की जमीन तैयार कर गया।

मुख्य बातें

शिवसेना (शिंदे गुट) के एमएलसी कृपाल तुमाने ने दावा किया कि उद्धव गुट के 7 सांसद और 16 विधायक उनके संपर्क में हैं।
तुमाने के अनुसार शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 7 सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में काम करने को तैयार हैं।
वरिष्ठ सांसद संजय राउत ने 'ऑपरेशन टाइगर' की अटकलों को खारिज करते हुए पार्टी को 'अक्षुण्ण और एकजुट' बताया।
शिर्डी सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे ने अटकलें नकारीं, लेकिन कहा — 'कल के बारे में कुछ नहीं कह सकता।' मातोश्री बैठक में सांसदों की कम उपस्थिति की खबरों के बाद पार्टी ने स्पष्ट किया कि कुछ सदस्य वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे।

महाराष्ट्र की राजनीति में 16 जून 2025 को नया भूचाल आया, जब शिवसेना (शिंदे गुट) के एमएलसी कृपाल तुमाने ने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के 7 सांसद और 16 विधायक उनके खेमे के सक्रिय संपर्क में हैं। यह दावा ऐसे समय में आया है जब 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर अटकलें चरम पर हैं और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

तुमाने का दावा: बातचीत अंतिम चरण में

एमएलसी कृपाल तुमाने ने कहा, 'शिवसेना (यूबीटी) के नौ सांसदों में से सात एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में काम करने को तैयार हैं। वे उनकी नीतियों के अनुसार काम करना चाहते हैं और अपने निर्वाचन क्षेत्रों का विकास सुनिश्चित करना चाहते हैं।' तुमाने ने यह भी कहा कि इन नेताओं के साथ 'बातचीत अंतिम चरण में है' और पाला बदलने की घटना 'जल्द ही हो सकती है।' उन्होंने उद्धव गुट के भीतर गहरे असंतोष और नाराजगी का भी उल्लेख किया।

मातोश्री बैठक और विरोधाभासी संकेत

यह राजनीतिक हलचल उद्धव ठाकरे के आवास 'मातोश्री' पर शिवसेना (यूबीटी) सांसदों की एक हालिया बैठक के बाद तेज हुई। रिपोर्टों के अनुसार, इस अनौपचारिक बैठक में अधिकांश सांसद व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं थे। बाद में पार्टी ने स्पष्टीकरण दिया कि सभी सांसदों ने भाग लिया था, लेकिन कुछ वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे। गौरतलब है कि यह पिछली ऐसी बैठकों से अलग था, जिसने अटकलों को और हवा दी।

उद्धव खेमे की पलटवार: 'पार्टी एकजुट और मजबूत'

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ सांसद संजय राउत ने 'ऑपरेशन टाइगर' की सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी 'अक्षुण्ण, एकजुट और मजबूत' बनी हुई है। शिर्डी से सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे ने भी इन खबरों को 'महज सुनी-सुनाई बातें' बताकर नकारा। हालाँकि, उनका यह बयान — 'आज मैं यूबीटी के साथ खड़ा हूं, कल के बारे में कुछ नहीं कह सकता, मैं कोई भविष्यवक्ता नहीं हूं' — राजनीतिक विश्लेषकों के लिए नई बहस का विषय बन गया।

महाराष्ट्र की राजनीति में क्या बदल सकता है

यह ऐसे समय में आया है जब बाल ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना पहले ही दो गुटों में बँट चुकी है। आलोचकों का कहना है कि यदि तुमाने के दावे सच साबित हुए, तो इससे राज्य में शिवसेना के दोनों गुटों का समर्थन आधार हमेशा के लिए बदल सकता है। गौरतलब है कि 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुई बगावत के बाद से उद्धव गुट पर दबाव लगातार बना हुआ है — और 'ऑपरेशन टाइगर' उसी कड़ी की अगली कड़ी मानी जा रही है।

आगे क्या होगा

फिलहाल तुमाने के दावे केवल एक पक्ष की बात हैं और उद्धव गुट ने इन्हें राजनीतिक प्रोपेगेंडा करार दिया है। लेकिन वाकचौरे के अस्पष्ट बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिन निर्णायक हो सकते हैं। विश्लेषकों की नजर अब उद्धव गुट की अगली आधिकारिक बैठक और शिंदे खेमे के अगले कदम पर टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अक्सर संख्याएँ बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जाती हैं। असली सवाल यह है कि क्या उद्धव गुट के नेता वाकई अपनी पार्टी से नाखुश हैं, या यह शिंदे खेमे की मनोवैज्ञानिक रणनीति है। वाकचौरे का 'कल का पता नहीं' वाला बयान इस पूरे प्रकरण का सबसे ईमानदार — और सबसे चिंताजनक — पहलू है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज ने पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया। 2022 की बगावत के बाद उद्धव गुट हर राजनीतिक संकट में कमजोर दिखता है, लेकिन हर बार बच भी निकलता है — इस बार की असली परीक्षा तब होगी जब संख्याएँ सदन में गिनी जाएँगी।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन टाइगर क्या है?
'ऑपरेशन टाइगर' महाराष्ट्र में चर्चित वह कथित राजनीतिक अभियान है, जिसके तहत शिवसेना (शिंदे गुट) उद्धव ठाकरे की पार्टी के सांसदों और विधायकों को अपने खेमे में लाने की कोशिश कर रही है। यह नाम राजनीतिक हलकों और मीडिया में प्रचलित हुआ है, हालाँकि शिंदे गुट ने इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया है।
कृपाल तुमाने कौन हैं और उनका दावा क्या है?
कृपाल तुमाने शिवसेना (शिंदे गुट) के विधान परिषद सदस्य (MLC) हैं। उन्होंने दावा किया है कि शिवसेना (यूबीटी) के 7 सांसद और 16 विधायक उनके खेमे के संपर्क में हैं और पाला बदलने की बातचीत अंतिम चरण में है।
संजय राउत ने इन अटकलों पर क्या कहा?
शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ सांसद संजय राउत ने 'ऑपरेशन टाइगर' की सभी अटकलों को सिरे से खारिज किया और कहा कि पार्टी 'अक्षुण्ण, एकजुट और मजबूत' बनी हुई है। राउत उद्धव ठाकरे के सबसे कट्टर समर्थकों में गिने जाते हैं।
भाऊसाहेब वाकचौरे का बयान क्यों चर्चा में है?
शिर्डी से शिवसेना (यूबीटी) सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे ने अटकलों को 'सुनी-सुनाई बातें' बताया, लेकिन साथ ही कहा कि 'कल के बारे में कुछ नहीं कह सकता।' यह अस्पष्ट बयान राजनीतिक विश्लेषकों के लिए नई बहस का विषय बन गया है।
मातोश्री बैठक विवाद का मामला क्या था?
उद्धव ठाकरे के आवास 'मातोश्री' पर हुई एक हालिया बैठक में अधिकांश सांसदों की व्यक्तिगत अनुपस्थिति की खबरें आईं। बाद में पार्टी ने स्पष्ट किया कि कुछ सांसद वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे, लेकिन इस स्पष्टीकरण ने पार्टी में आंतरिक दरार की अटकलों को और बल दिया।
राष्ट्र प्रेस
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