22 अक्टूबर 2026
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महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था बदहाल: कांग्रेस अध्यक्ष सपकाल का सरकार पर तीखा हमला, किसानों को ₹5,000 को बताया 'जख्म पर नमक'

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महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था बदहाल: कांग्रेस अध्यक्ष सपकाल का सरकार पर तीखा हमला, किसानों को ₹5,000 को बताया 'जख्म पर नमक'

सारांश

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने एक ही प्रेस वार्ता में राज्य सरकार को कई मोर्चों पर घेरा — किसानों की ₹5,000 की 'प्रतीकात्मक' मदद, बिश्नोई गैंग से बिगड़ती कानून-व्यवस्था, और एसबीआई डेटा ब्रीच पर नागरिक निजता के सवाल। यह हमला महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी दबाव की बढ़ती धार का संकेत देता है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 22 अक्टूबर 2026 को मुंबई में राज्य व केंद्र सरकार पर कई मुद्दों पर तीखा हमला किया।
किसानों को दिवाली पर दी जा रही ₹5,000 की सहायता को 'जख्मों पर नमक' करार देते हुए इसे अपर्याप्त बताया।
लॉरेंस बिश्नोई को गुजरात की जेल से मुंबई की आर्थर रोड जेल में स्थानांतरित कर जाँच कराने की माँग की।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की घोषणा की।
मनोज जरांगे पाटिल पर लगे ₹500 करोड़ के आरोपों में ईडी से तत्काल कार्रवाई की माँग।
तुषार गांधी की हिरासत को 'शर्मनाक' बताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला कहा।

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन वसंतराव सपकाल ने 22 अक्टूबर 2026 को मुंबई में राज्य और केंद्र सरकार पर कई मोर्चों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने महाराष्ट्र की बिगड़ती कानून-व्यवस्था, एसबीआई के कथित डेटा ब्रीच, किसानों को दिवाली पर दी जा रही ₹5,000 की सहायता राशि और मनोज जरांगे पाटिल पर लगे ₹500 करोड़ के आरोपों समेत कई गंभीर मुद्दे उठाए। सपकाल ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज़ दबाने के साथ-साथ नागरिकों की निजता और लोकतांत्रिक अधिकारों को भी कमज़ोर कर रही है।

अमित शाह के बयान पर पलटवार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष पर आरोप लगाया था कि वे वोट चोरी के झूठे आरोप लगाकर घुसपैठियों के वोट बचाना चाहते हैं। इस पर सपकाल ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार को यह बताना चाहिए कि उसने कितने घुसपैठियों की पहचान की और कितनों को देश से बाहर भेजा। उनका कहना था कि ठोस जवाब देने की बजाय ऐसे बयानों से जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाने की कोशिश की जा रही है।

महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था और लॉरेंस बिश्नोई प्रकरण

लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े मामलों और फिल्मी हस्तियों की सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ कांच अपग्रेड किए जाने के संदर्भ में सपकाल ने महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने माँग की कि बिश्नोई को गुजरात की जेल से मुंबई की आर्थर रोड जेल के अंडा सेल में स्थानांतरित कर उससे जुड़े मामलों की जाँच की जाए। उनके अनुसार राज्य में लोगों में भय का माहौल बन चुका है और स्थिति लगातार बिगड़ रही है।

चुनाव आयुक्त और संसदीय प्रक्रिया पर सवाल

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर संसद में चर्चा और महाभियोग प्रस्ताव के प्रयासों के संदर्भ में सपकाल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की टिप्पणी पर पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब विपक्ष संसद में मुद्दे उठाने की कोशिश करता है, तो सदस्यों के माइक बंद कर दिए जाते हैं। सपकाल ने स्पष्ट किया कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा और यह बात दर्ज की जानी चाहिए।

एसबीआई डेटा ब्रीच और नागरिक निजता की चिंता

एसबीआई के कथित डेटा ब्रीच पर सपकाल ने कहा कि यह मामला केवल बैंक के आँकड़ों तक सीमित नहीं है। उन्होंने अमेरिका के साथ हुए कथित समझौते में आधार कार्ड का डेटा साझा किए जाने के आरोपों का उल्लेख किया और दावा किया कि मतदाता सूची के संचालन में निजी कंपनियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उनके अनुसार नागरिकों की निजता एक मौलिक अधिकार है, जिसे वर्तमान सरकार कथित तौर पर कमज़ोर कर रही है।

किसान सहायता और तुषार गांधी की हिरासत

महाराष्ट्र सरकार द्वारा किसानों को दिवाली पर ₹5,000 की सहायता देने की घोषणा पर सपकाल ने कड़ी नाराज़गी जताई और इसे 'किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने' जैसा करार दिया। उनका तर्क था कि इतनी छोटी राशि किसानों की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने में असमर्थ है। इसके अलावा, महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी को अगस्त क्रांति मैदान जाते समय उनके घर से हिरासत में लिए जाने की घटना को उन्होंने 'शर्मनाक' और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया।

मनोज जरांगे पाटिल मामले में ईडी से कार्रवाई की माँग

मनोज जरांगे पाटिल पर लगे ₹500 करोड़ से जुड़े आरोपों पर सपकाल ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से तत्काल और कठोर कार्रवाई की माँग की। उन्होंने कहा कि आरोपों की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी नहीं होनी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन और उससे जुड़े नेताओं को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से गर्म है।

संपादकीय दृष्टिकोण

गैंगस्टर, किसान राहत और चुनाव आयुक्त पर हमला बोले, तो मुख्य संदेश अक्सर धुंधला हो जाता है। किसानों को ₹5,000 की 'प्रतीकात्मक' सहायता की आलोचना सबसे ज़मीनी और ठोस मुद्दा है, क्योंकि महाराष्ट्र के किसानों की ऋण-संकट और फसल-नुकसान की समस्याएँ वर्षों पुरानी हैं और चुनावी नैरेटिव को सीधे प्रभावित करती हैं। एसबीआई डेटा ब्रीच और आधार डेटा-साझेदरी के आरोप गंभीर हैं, लेकिन उन्हें अभी तक स्वतंत्र सत्यापन का इंतज़ार है। असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष इन बिखरे आरोपों को एक सुसंगत राजनीतिक एजेंडे में बदल पाएगा, या सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन इन्हें 'शोर' कहकर खारिज करने में सफल रहेगा।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हर्षवर्धन सपकाल ने किसानों की ₹5,000 सहायता पर क्या कहा?
सपकाल ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा किसानों को दिवाली पर दी जा रही ₹5,000 की सहायता को 'किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने' जैसा बताया। उनका कहना था कि इतनी छोटी राशि किसानों की गहरी आर्थिक समस्याओं का कोई वास्तविक समाधान नहीं है।
लॉरेंस बिश्नोई को लेकर सपकाल की क्या माँग है?
सपकाल ने माँग की कि गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को गुजरात की जेल से मुंबई की आर्थर रोड जेल के अंडा सेल में स्थानांतरित किया जाए, ताकि उससे जुड़े मामलों की सही जाँच हो सके। उनके अनुसार महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है और लोगों में भय का माहौल है।
मनोज जरांगे पाटिल मामले में ईडी से क्या कार्रवाई चाही गई है?
सपकाल ने मनोज जरांगे पाटिल पर लगे ₹500 करोड़ से जुड़े आरोपों की जाँच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से तत्काल और सख्त कार्रवाई की माँग की। उन्होंने कहा कि आरोपित व्यक्तियों के खिलाफ बिना देरी कार्रवाई होनी चाहिए।
सपकाल ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर क्या रुख अपनाया?
सपकाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की घोषणा की और कहा कि यह बात दर्ज की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष को संसद में बोलने से रोकने के लिए माइक बंद किए जाते हैं।
एसबीआई डेटा ब्रीच पर कांग्रेस का क्या कहना है?
सपकाल ने कहा कि एसबीआई का कथित डेटा ब्रीच केवल बैंकिंग आँकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आधार डेटा और मतदाता सूची के संचालन से जुड़े गंभीर सवाल भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार नागरिकों की निजता को कमज़ोर कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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