डालमिया भारत को Q2 में ₹205 करोड़ का शुद्ध घाटा, राजस्व ₹3,563 करोड़ पर पहुँचा
सारांश
मुख्य बातें
डालमिया भारत लिमिटेड को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2026) में ₹205 करोड़ का एकीकृत शुद्ध घाटा हुआ, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने ₹239 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था। यह उलटफेर मुख्यतः परिसंपत्तियों के मूल्यह्रास और कर्मचारी पृथक्करण योजना से जुड़े ₹339 करोड़ के एकमुश्त असाधारण खर्च के कारण हुआ।
मुख्य वित्तीय प्रदर्शन
घाटे के बावजूद सीमेंट निर्माता कंपनी के परिचालन राजस्व में सालाना आधार पर 4.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। समीक्षाधीन तिमाही में परिचालन से राजस्व बढ़कर ₹3,563 करोड़ हो गया, जो एक वर्ष पूर्व की समान अवधि में ₹3,417 करोड़ था।
हालाँकि, परिचालन मार्जिन पर दबाव स्पष्ट रूप से दिखा। EBITDA सालाना आधार पर 29.2 प्रतिशत गिरकर ₹493 करोड़ रह गया, जो एक साल पहले ₹696 करोड़ था। इसी क्रम में EBITDA मार्जिन पिछले वर्ष के 20.37 प्रतिशत से घटकर 13.84 प्रतिशत पर आ गया।
असाधारण खर्च के कारण
कंपनी की नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, डालमिया भारत ने कुछ परिसंपत्तियों के वसूली योग्य आर्थिक मूल्य का पुनर्मूल्यांकन करने के बाद तिमाही में ₹282 करोड़ का मूल्यह्रास घाटा दर्ज किया। यह घाटा मुख्यतः कंपनी के तीन कैप्टिव पावर प्लांट से संबंधित था और कम लागत वाले नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर कंपनी के रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है। इस खर्च में एक बंद किए जा चुके ब्रांड के मूल्य में आई गिरावट भी शामिल थी।
इसके अतिरिक्त, कंपनी ने कुछ चुनिंदा इकाइयों में पात्र कर्मचारियों के लिए पृथक्करण योजना लागू की, जिससे तिमाही में ₹57 करोड़ का एकमुश्त खर्च हुआ। इन दोनों मदों को मिलाकर कुल असाधारण खर्च ₹339 करोड़ रहा, जिसने कंपनी के शुद्ध लाभ को सीधे नुकसान पहुँचाया।
अंतरिम लाभांश की घोषणा
घाटे के बीच कंपनी के निदेशक मंडल ने 26 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में शेयरधारकों के लिए अंतरिम लाभांश को मंजूरी दी। ₹2 अंकित मूल्य वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर ₹4 का अंतरिम लाभांश घोषित किया गया, जो अंकित मूल्य का 200 प्रतिशत है।
आगे की दिशा
गौरतलब है कि एकमुश्त असाधारण खर्चों को छोड़ दें तो कंपनी का परिचालन राजस्व वृद्धि की दिशा में है, जो नवीकरणीय ऊर्जा की ओर पुनर्गठन की दीर्घकालिक रणनीति का संकेत देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह असाधारण खर्च एकबारगी प्रकृति का है और अगली तिमाहियों में कंपनी के परिचालन प्रदर्शन पर इसका प्रभाव कम हो सकता है। सीमेंट क्षेत्र में मूल्य दबाव और कच्चे माल की लागत आगे भी कंपनी के मार्जिन के लिए परीक्षण का विषय बने रहेंगे।