एचयूएल का मुनाफा Q1 FY27 में 4% घटकर ₹2,631 करोड़, शेयर 5.60% लुढ़ककर ₹2,052 पर
सारांश
मुख्य बातें
हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा अप्रैल-जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर करीब 4 प्रतिशत घटकर ₹2,631 करोड़ रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह ₹2,732 करोड़ था। देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी ने 28 जुलाई 2026 को ये तिमाही नतीजे जारी किए, जिसके बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर कंपनी का शेयर 5.60 प्रतिशत टूटकर ₹2,052 पर आ गया।
मुख्य वित्तीय आँकड़े
कंसोलिडेटेड आधार पर भी मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई — यह 3.17 प्रतिशत घटकर ₹2,680 करोड़ रह गया, जो एक वर्ष पहले ₹2,741 करोड़ था। हालाँकि कंपनी की कुल आय इस अवधि में सालाना आधार पर 9.8 प्रतिशत बढ़कर ₹17,529 करोड़ हो गई, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹15,958 करोड़ थी।
दूसरी ओर, कंपनी का कुल खर्च भी सालाना आधार पर 10 प्रतिशत उछलकर ₹13,822 करोड़ पहुँच गया — पिछले साल यह ₹12,565 करोड़ था। यह बढ़ा हुआ व्यय ही मुनाफे पर दबाव का मुख्य कारण बना।
मुनाफे में गिरावट की वजह
आँकड़ों के अनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता के चलते कंपनी की इनपुट लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसे मुनाफे में गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कमोडिटी बाज़ार पहले से ही दबाव में हैं।
प्रबंधन की प्रतिक्रिया
एचयूएल की सीईओ और एमडी प्रिया नायर ने कहा, 'वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई, जिसे सरकार और केंद्रीय बैंक की सक्रिय राजकोषीय तथा मौद्रिक नीतियों का समर्थन मिला। तिमाही के दौरान मांग स्थिर रही।'
नायर ने आगे कहा, 'यह प्रदर्शन हमारे ब्रांडों की मजबूती, हमारे उत्पाद पोर्टफोलियो की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता और हमारी रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुशासित क्रियान्वयन को दर्शाता है। बाज़ार विकास, वितरण चैनलों के विस्तार और पोर्टफोलियो में किए जा रहे निवेश हमें दीर्घकालिक विकास के लिए और अधिक मजबूत स्थिति में ला रहे हैं।'
शेयर बाज़ार पर असर
नतीजों की घोषणा के तुरंत बाद NSE पर एचयूएल के शेयर में तेज़ बिकवाली देखी गई। 28 जुलाई 2026 को दोपहर 12 बजे IST तक शेयर 5.60 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹2,052 पर कारोबार कर रहा था। गौरतलब है कि आय में वृद्धि के बावजूद मुनाफे में संकुचन ने निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया।
आगे की राह
विश्लेषकों की नज़र अब इस बात पर है कि एचयूएल बढ़ती इनपुट लागत को उपभोक्ताओं तक कितनी हद तक पास-थ्रू कर पाती है और ग्रामीण माँग की रफ्तार दूसरी तिमाही में किस दिशा में जाती है। कंपनी का दीर्घकालिक विकास-दृष्टिकोण बरकरार है, लेकिन निकट भविष्य में लागत दबाव एक चुनौती बना रहेगा।