मोतीलाल ओसवाल के शेयर में लगातार चौथी गिरावट, 11% टूटकर ₹839 के निचले स्तर पर
सारांश
मुख्य बातें
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) का शेयर शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को करीब 11 प्रतिशत की तीखी गिरावट के साथ ₹900 के स्तर से नीचे आ गया — यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र था जब इस शेयर में बिकवाली का दबाव बना रहा। उल्लेखनीय यह है कि यह गिरावट तब आई जब कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत वित्तीय नतीजे पेश किए थे।
शेयर का कारोबारी हाल
शेयर ने ₹944.50 पर मामूली बढ़त के साथ कारोबार शुरू किया, लेकिन बाज़ार खुलते ही बिकवाली हावी हो गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर यह दिन के निचले स्तर ₹839.90 तक फिसल गया। दोपहर के कारोबार में शेयर 8.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹859.20 पर कारोबार कर रहा था, जो व्यापक बाज़ार की तुलना में काफी कमज़ोर प्रदर्शन रहा। NSE के आँकड़ों के अनुसार, पूरे सत्र में 1 करोड़ से अधिक शेयरों का कारोबार हुआ।
तिमाही नतीजे: रिकॉर्ड मुनाफ़ा
कंपनी ने नियामकीय फाइलिंग में बताया कि जून 2026 को समाप्त तिमाही में समेकित शुद्ध लाभ ₹1,273.7 करोड़ रहा, जबकि पिछली तिमाही में ₹219 करोड़ का शुद्ध घाटा दर्ज हुआ था। सालाना आधार पर शुद्ध लाभ में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
संचालन से प्राप्त राजस्व सालाना आधार पर 25 प्रतिशत बढ़कर ₹3,425.7 करोड़ हो गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में ₹2,679.2 करोड़ था। तिमाही आधार पर कुल आय 27 प्रतिशत बढ़कर ₹3,432 करोड़ पर पहुँची। कंपनी ने कहा कि अन्य व्यापक आय (OCI) सहित यह अब तक का सर्वाधिक तिमाही कर-पश्चात लाभ — ₹1,513 करोड़ — रहा।
एसेट मैनेजमेंट और वेल्थ कारोबार की रफ़्तार
एसेट मैनेजमेंट कारोबार — जिसमें AMC और MO Alternates व्यवसाय शामिल हैं — से कर-पश्चात लाभ सालाना आधार पर 73 प्रतिशत बढ़कर ₹245 करोड़ हो गया। यह कुल कर-पश्चात लाभ में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा। कंपनी की कुल प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियाँ (AUM) सालाना आधार पर 31 प्रतिशत बढ़कर ₹2.12 लाख करोड़ हो गईं।
प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार से राजस्व सालाना आधार पर 42 प्रतिशत बढ़कर ₹157 करोड़ रहा, जबकि वेल्थ मैनेजमेंट खंड का परिचालन राजस्व 26 प्रतिशत बढ़ा। ब्रोकरेज कारोबार से राजस्व में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, और कमोडिटी कारोबार सहित कुल औसत दैनिक कारोबार (ADTO) में बाज़ार हिस्सेदारी 7.6 प्रतिशत रही।
मज़बूत नतीजों के बावजूद बिकवाली क्यों?
यह ऐसे समय में आया है जब बाज़ार विश्लेषक 'बाय ऑन रूमर, सेल ऑन न्यूज़' की प्रवृत्ति की ओर इशारा कर रहे हैं — यानी नतीजों की उम्मीद में शेयर पहले चढ़ता है और नतीजे आने पर मुनाफ़ावसूली शुरू हो जाती है। गौरतलब है कि चार सत्रों में लगातार गिरावट ने शेयर को उसके हालिया उच्च स्तर से काफी नीचे ला दिया है। आगे निवेशकों की नज़र कंपनी के प्रबंधन की टिप्पणी और दूसरी तिमाही के संकेतों पर रहेगी।