शीर्ष 10 में से 9 कंपनियों का मार्केटकैप ₹2.74 लाख करोड़ घटा, वैश्विक अस्थिरता से बाज़ार में भारी बिकवाली
सारांश
मुख्य बातें
भारत की शीर्ष 10 सूचीबद्ध कंपनियों में से नौ का संयुक्त बाज़ार पूंजीकरण (मार्केटकैप) 20 से 24 जुलाई के कारोबारी सप्ताह में करीब ₹2.74 लाख करोड़ घट गया। वैश्विक अस्थिरता की आँधी में भारतीय शेयर बाज़ार में व्यापक स्तर पर हुई बिकवाली इस गिरावट की प्रमुख वजह रही। अकेला अपवाद हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) रहा, जिसके मार्केटकैप में मामूली बढ़त दर्ज हुई।
बाज़ार का साप्ताहिक हाल
BSE सेंसेक्स इस सप्ताह 2,091.68 अंक यानी 2.68% की कमज़ोरी के साथ 76,059.77 पर बंद हुआ। वहीं NSE निफ्टी 566.85 अंक यानी 2.33% की गिरावट के साथ 23,767.45 पर बंद हुआ। यह पिछले कई हफ्तों की सबसे तीखी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है।
किस कंपनी को कितना नुकसान
HDFC बैंक को सर्वाधिक झटका लगा — उसका मार्केटकैप ₹1,18,383.91 करोड़ घटकर ₹11,43,985.90 करोड़ रह गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाज़ार पूंजीकरण ₹65,429.82 करोड़ की गिरावट के साथ ₹17,29,661.44 करोड़ पर आ गया, हालाँकि वह देश की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनी बनी रही।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का मार्केटकैप ₹26,814.94 करोड़ घटकर ₹9,36,953.84 करोड़ और बजाज फाइनेंस का ₹26,802.74 करोड़ घटकर ₹6,30,471.54 करोड़ रह गया। लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) का मार्केटकैप ₹15,116.74 करोड़ कम होकर ₹5,33,007.56 करोड़ पर आया।
ICICI बैंक का मार्केटकैप ₹6,223.84 करोड़ घटकर ₹10,28,217.93 करोड़, भारती एयरटेल का ₹6,021.64 करोड़ कम होकर ₹11,85,046.13 करोड़, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का ₹5,191.95 करोड़ घटकर ₹8,15,480.75 करोड़ और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का ₹4,092.79 करोड़ कम होकर ₹5,20,747.89 करोड़ रह गया।
एकमात्र लाभ में HUL
गिरावट के इस माहौल में हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) अकेली ऐसी कंपनी रही जिसका मार्केटकैप ₹152.73 करोड़ बढ़कर ₹5,03,928.59 करोड़ हो गया। FMCG क्षेत्र की इस दिग्गज कंपनी ने व्यापक बिकवाली के बावजूद निवेशकों का भरोसा बनाए रखा।
शीर्ष कंपनियों की रैंकिंग
मार्केटकैप के लिहाज़ से रिलायंस इंडस्ट्रीज शीर्ष पर बनी रही। इसके बाद क्रमशः भारती एयरटेल, HDFC बैंक, ICICI बैंक, SBI, TCS, बजाज फाइनेंस, LIC, लार्सन एंड टुब्रो और HUL का स्थान रहा।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में अमेरिकी आर्थिक नीतियों और भू-राजनीतिक तनावों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। विश्लेषकों के अनुसार, अगले सप्ताह के कॉर्पोरेट नतीजे और वैश्विक संकेत बाज़ार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगे।