शीर्ष 10 में 8 कंपनियों का मार्केटकैप ₹1.90 लाख करोड़ बढ़ा, HDFC बैंक ₹11.89 लाख करोड़ पर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाज़ार में बीते सप्ताह शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से 8 का संयुक्त बाज़ार पूंजीकरण (मार्केटकैप) ₹1.90 लाख करोड़ बढ़ गया। घरेलू बाज़ार में आई मज़बूत तेज़ी और वैश्विक अनिश्चितता में कमी इस उछाल की प्रमुख वजह रही। 14 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में निवेशकों की धारणा स्पष्ट रूप से सकारात्मक रही।
बाज़ार में तेज़ी की वजह
विश्लेषकों के अनुसार इस सप्ताह की रैली के पीछे अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में प्रगति का अहम योगदान रहा। विदेशी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों पक्ष युद्धविराम समझौते के अंतिम चरण में हैं और जल्द ही एक औपचारिक डील की संभावना जताई जा रही है। इस खबर से वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक जोखिम में कमी आई, जिसका सीधा असर भारत सहित दुनिया भर के शेयर बाज़ारों पर पड़ा।
समीक्षा अवधि में बीएसई सेंसेक्स 1,284.61 अंक यानी 1.73 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,527.95 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 256.20 अंक यानी 1.10 प्रतिशत चढ़कर 23,622.90 पर बंद हुआ।
किन कंपनियों को सबसे ज़्यादा फायदा
आईसीआईसीआई बैंक का मार्केटकैप इस सप्ताह ₹56,223 करोड़ बढ़कर ₹9.61 लाख करोड़ हो गया — यह सप्ताह की सबसे बड़ी एकल बढ़त रही। एचडीएफसी बैंक का बाज़ार मूल्यांकन ₹38,571 करोड़ की वृद्धि के साथ ₹11.89 लाख करोड़ पर पहुँच गया, जो शीर्ष 10 में सर्वाधिक मार्केटकैप है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का मूल्यांकन ₹36,138 करोड़ बढ़कर ₹9.39 लाख करोड़ हो गया। बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप ₹18,367 करोड़ की बढ़त के साथ ₹5.72 लाख करोड़ पर पहुँचा। भारती एयरटेल का बाज़ार पूंजीकरण ₹14,380 करोड़ बढ़कर ₹11.11 लाख करोड़ हो गया।
लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) का मार्केटकैप ₹13,241 करोड़ की वृद्धि के साथ ₹5.57 लाख करोड़ पर पहुँचा। हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) का बाज़ार मूल्यांकन ₹10,984 करोड़ बढ़कर ₹5.09 लाख करोड़ हो गया।
किन कंपनियों का मूल्यांकन घटा
इस सकारात्मक माहौल के बावजूद दो प्रमुख कंपनियों के मार्केटकैप में गिरावट दर्ज हुई। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (टीसीएस) का बाज़ार पूंजीकरण ₹13,296 करोड़ घटकर ₹7.82 लाख करोड़ रह गया। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का मार्केटकैप ₹822 करोड़ की मामूली कमी के साथ ₹5.05 लाख करोड़ पर आ गया। गौरतलब है कि आईटी क्षेत्र पर वैश्विक तकनीकी खर्च में नरमी की चिंताओं का दबाव बना हुआ है, जो टीसीएस के मूल्यांकन पर असर डाल रहा है।
बाज़ार पर व्यापक असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय बाज़ार पिछले कुछ महीनों से वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण दबाव में थे। अमेरिका-ईरान तनाव में कमी के संकेतों ने कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर डाला, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए सकारात्मक संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शांति समझौता औपचारिक रूप से संपन्न होता है, तो घरेलू बाज़ार में यह तेज़ी और मज़बूत हो सकती है।