15 सितंबर 2026
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मनोज झा का यूसीसी पर प्रहार: 'डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स है, संविधान का अनुच्छेद 44 नहीं'

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मनोज झा का यूसीसी पर प्रहार: 'डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स है, संविधान का अनुच्छेद 44 नहीं'

सारांश

RJD सांसद मनोज झा ने यूसीसी को 'डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स' करार दिया — रोज़गार और परीक्षा सुधार की माँग पर यूसीसी को हथियार बनाने का आरोप। साथ ही गलवान, पुलवामा, पहलगाम और ईरान स्कूल हमले पर भी सरकार से सीधे सवाल।

मुख्य बातें

RJD सांसद मनोज झा ने 15 सितंबर 2026 को यूसीसी को 'डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स' बताते हुए गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा।
झा का आरोप — रोज़गार और ईमानदार परीक्षा व्यवस्था की माँग पर सरकार यूसीसी को ध्यान भटकाने के लिए इस्तेमाल करती है।
उन्होंने RSS प्रमुख मोहन भागवत के 'यूनिटी के लिए यूनिफॉर्मिटी ज़रूरी नहीं' वाले बयान को लेकर सरकार पर अंतर्विरोध का आरोप लगाया।
LAC पर चीनी सैनिकों की वापसी की रिपोर्टों को झा ने 'सूत्रों से प्लांट खबर' बताते हुए खारिज किया।
पुलवामा और पहलगाम हमलों पर जवाबदेही तय न होने पर विदेश मंत्री जयशंकर के बयान पर भी सवाल उठाए।
ईरान में स्कूल पर हमले के बाद भारत की चुप्पी को 'मानवता के आधार पर अनुचित' बताया।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने 15 सितंबर 2026 को समान नागरिक संहिता (UCC) पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यूसीसी सरकार के लिए अब संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं रह गया, बल्कि यह शुद्ध रूप से 'डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स' का औज़ार बन चुका है। उनकी यह टिप्पणी तब आई जब नई दिल्ली में यूसीसी और कई राष्ट्रीय मुद्दों पर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज़ हो गई है।

यूसीसी पर झा का सीधा प्रहार

मनोज झा ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा, 'मैं लगातार इस पर लिख और बोल रहा हूं, लेकिन मुझे पता है कि यूसीसी इनके लिए कॉन्स्टिट्यूशनल प्रोविजन अंडर आर्टिकल 44 नहीं हुई है, बल्कि डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स का हिस्सा है।' उन्होंने व्यंग्यपूर्वक जोड़ा, 'बच्चे रोज़गार मांगें तो यूसीसी ले लो, बच्चे ईमानदार परीक्षा व्यवस्था मांगें तो गृह मंत्री कहें कि यूसीसी ले लो।'

गौरतलब है कि डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स वह राजनीतिक भाषा होती है जिसमें छिपे संकेतों के ज़रिए किसी खास वर्ग तक संदेश पहुँचाया जाता है, जबकि सतह पर वह संदेश सामान्य और स्वीकार्य दिखता है। झा का आरोप है कि सरकार इसी तकनीक का इस्तेमाल यूसीसी के मुद्दे पर कर रही है।

मोहन भागवत के बयान का संदर्भ

RJD सांसद ने गृह मंत्री को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान की याद दिलाई। उन्होंने कहा, 'मैं याद कराना चाहूंगा गृह मंत्री को — शायद आर्काइव में चला गया होगा — अभी मोहन भागवत ने विदेश में कहा था कि यूनिटी के लिए यूनिफॉर्मिटी आवश्यक नहीं है।' झा ने सवाल उठाया कि यह किसके लिए कहा गया — विदेश में बड़ा हृदय दिखाने के लिए, या इसलिए कि अपने लोगों को नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा है।

भारत-चीन सीमा विवाद पर प्रतिक्रिया

LAC पर चीन द्वारा सैनिकों की संख्या कम करने की खबरों पर झा ने कहा कि उन्होंने ऐसी कोई विश्वसनीय रिपोर्ट नहीं देखी है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'सूत्रों के हवाले से जो खबरें प्लांट होती हैं, उन पर प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है।' झा के अनुसार भारत-चीन संबंधों में असली मुद्दा यह है कि प्रधानमंत्री ने गलवान के बारे में क्या कहा, और क्या वे आज भी कहते हैं कि 'न कोई घुसा है, न कोई घुसेगा।' अरुणाचल और लद्दाख के बारे में उन्होंने स्पष्ट जवाब की माँग की।

आतंकवाद और विदेश नीति पर सवाल

विदेश मंत्री एस. जयशंकर के आतंकवाद को लेकर दोहरे मापदंड न रखने वाले बयान पर झा ने कहा कि यह बात भारत लगातार कहता आ रहा है, लेकिन सवाल यह है कि पुलवामा क्यों हुआ, यह आज तक नहीं पता चला। उन्होंने पहलगाम हमले का भी उल्लेख करते हुए जवाबदेही तय किए जाने की माँग की और कहा, 'आप दूसरे विभाग से बात करके संसद को और जनता को बताइए।'

झा ने यह भी कहा कि जब ईरान में बच्चियों के स्कूल पर हमला हुआ तो भारत की ओर से उसकी निंदा नहीं की गई, जो उनके अनुसार 'कम से कम मानवता के आधार पर होनी चाहिए थी।'

राजनीतिक संदर्भ और आगे की दिशा

यह ऐसे समय में आया है जब संसद के आगामी सत्र से पहले विपक्ष यूसीसी, बेरोज़गारी और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तेज़ कर रहा है। झा की यह बहुआयामी आलोचना — यूसीसी, चीन नीति और आतंकवाद — संकेत देती है कि RJD इन मुद्दों को एकसाथ राष्ट्रीय एजेंडे पर लाना चाहता है। आने वाले दिनों में इन बयानों पर BJP की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे आतंकवाद पर 'दोहरे मापदंड नहीं' वाले सरकारी बयान के ठीक बाद उठाना विपक्ष की रणनीतिक टाइमिंग को दर्शाता है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोज झा ने यूसीसी को 'डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स' क्यों कहा?
RJD सांसद मनोज झा का कहना है कि सरकार यूसीसी को संविधान के अनुच्छेद 44 के संवैधानिक उद्देश्य के लिए नहीं, बल्कि रोज़गार और परीक्षा सुधार जैसी असली माँगों से ध्यान भटकाने के लिए इस्तेमाल करती है। उनके अनुसार यही 'डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स' है — जहाँ सतह पर संवैधानिक बात होती है, लेकिन असल मकसद खास वर्ग को राजनीतिक संकेत देना होता है।
डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स क्या होती है?
डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स वह राजनीतिक भाषा है जिसमें छिपे संकेतों के ज़रिए किसी खास वर्ग या समूह तक संदेश पहुँचाया जाता है, जबकि सतह पर वह संदेश सामान्य और स्वीकार्य दिखता है। मनोज झा ने आरोप लगाया कि यूसीसी का मुद्दा इसी तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
मनोज झा ने मोहन भागवत के किस बयान का हवाला दिया?
मनोज झा ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने विदेश में कहा था कि 'यूनिटी के लिए यूनिफॉर्मिटी आवश्यक नहीं है।' झा ने सवाल उठाया कि यह बात विदेश में बड़ा हृदय दिखाने के लिए कही गई या वास्तव में संघ परिवार के भीतर अंतर्विरोध है।
झा ने LAC और चीन के बारे में क्या कहा?
मनोज झा ने LAC पर चीनी सैनिकों की वापसी की खबरों को 'सूत्रों से प्लांट खबर' बताते हुए प्रतिक्रिया देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा गलवान, अरुणाचल और लद्दाख पर सरकार की स्थिति स्पष्ट करना है।
झा ने पुलवामा और पहलगाम पर क्या सवाल उठाए?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के आतंकवाद पर दोहरे मापदंड न रखने के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए झा ने कहा कि पुलवामा क्यों हुआ, यह आज तक नहीं पता चला। उन्होंने पहलगाम हमले पर भी जवाबदेही तय करने की माँग की और संसद व जनता को स्पष्ट जवाब देने का आग्रह किया।
राष्ट्र प्रेस
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