मनोज झा का यूसीसी पर प्रहार: 'डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स है, संविधान का अनुच्छेद 44 नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने 15 सितंबर 2026 को समान नागरिक संहिता (UCC) पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यूसीसी सरकार के लिए अब संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं रह गया, बल्कि यह शुद्ध रूप से 'डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स' का औज़ार बन चुका है। उनकी यह टिप्पणी तब आई जब नई दिल्ली में यूसीसी और कई राष्ट्रीय मुद्दों पर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज़ हो गई है।
यूसीसी पर झा का सीधा प्रहार
मनोज झा ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा, 'मैं लगातार इस पर लिख और बोल रहा हूं, लेकिन मुझे पता है कि यूसीसी इनके लिए कॉन्स्टिट्यूशनल प्रोविजन अंडर आर्टिकल 44 नहीं हुई है, बल्कि डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स का हिस्सा है।' उन्होंने व्यंग्यपूर्वक जोड़ा, 'बच्चे रोज़गार मांगें तो यूसीसी ले लो, बच्चे ईमानदार परीक्षा व्यवस्था मांगें तो गृह मंत्री कहें कि यूसीसी ले लो।'
गौरतलब है कि डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स वह राजनीतिक भाषा होती है जिसमें छिपे संकेतों के ज़रिए किसी खास वर्ग तक संदेश पहुँचाया जाता है, जबकि सतह पर वह संदेश सामान्य और स्वीकार्य दिखता है। झा का आरोप है कि सरकार इसी तकनीक का इस्तेमाल यूसीसी के मुद्दे पर कर रही है।
मोहन भागवत के बयान का संदर्भ
RJD सांसद ने गृह मंत्री को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान की याद दिलाई। उन्होंने कहा, 'मैं याद कराना चाहूंगा गृह मंत्री को — शायद आर्काइव में चला गया होगा — अभी मोहन भागवत ने विदेश में कहा था कि यूनिटी के लिए यूनिफॉर्मिटी आवश्यक नहीं है।' झा ने सवाल उठाया कि यह किसके लिए कहा गया — विदेश में बड़ा हृदय दिखाने के लिए, या इसलिए कि अपने लोगों को नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा है।
भारत-चीन सीमा विवाद पर प्रतिक्रिया
LAC पर चीन द्वारा सैनिकों की संख्या कम करने की खबरों पर झा ने कहा कि उन्होंने ऐसी कोई विश्वसनीय रिपोर्ट नहीं देखी है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'सूत्रों के हवाले से जो खबरें प्लांट होती हैं, उन पर प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है।' झा के अनुसार भारत-चीन संबंधों में असली मुद्दा यह है कि प्रधानमंत्री ने गलवान के बारे में क्या कहा, और क्या वे आज भी कहते हैं कि 'न कोई घुसा है, न कोई घुसेगा।' अरुणाचल और लद्दाख के बारे में उन्होंने स्पष्ट जवाब की माँग की।
आतंकवाद और विदेश नीति पर सवाल
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के आतंकवाद को लेकर दोहरे मापदंड न रखने वाले बयान पर झा ने कहा कि यह बात भारत लगातार कहता आ रहा है, लेकिन सवाल यह है कि पुलवामा क्यों हुआ, यह आज तक नहीं पता चला। उन्होंने पहलगाम हमले का भी उल्लेख करते हुए जवाबदेही तय किए जाने की माँग की और कहा, 'आप दूसरे विभाग से बात करके संसद को और जनता को बताइए।'
झा ने यह भी कहा कि जब ईरान में बच्चियों के स्कूल पर हमला हुआ तो भारत की ओर से उसकी निंदा नहीं की गई, जो उनके अनुसार 'कम से कम मानवता के आधार पर होनी चाहिए थी।'
राजनीतिक संदर्भ और आगे की दिशा
यह ऐसे समय में आया है जब संसद के आगामी सत्र से पहले विपक्ष यूसीसी, बेरोज़गारी और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तेज़ कर रहा है। झा की यह बहुआयामी आलोचना — यूसीसी, चीन नीति और आतंकवाद — संकेत देती है कि RJD इन मुद्दों को एकसाथ राष्ट्रीय एजेंडे पर लाना चाहता है। आने वाले दिनों में इन बयानों पर BJP की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।