15 सितंबर 2026
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पटियाला हाउस कोर्ट ने इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी, POCSO मामला भी दर्ज

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पटियाला हाउस कोर्ट ने इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी, POCSO मामला भी दर्ज

सारांश

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी है — लेकिन उनकी मुश्किलें कम नहीं हुईं। जंतर-मंतर मारपीट, SC/ST एक्ट, POCSO और कथित वायरल वीडियो के घमासान में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी शिकायतकर्ता बन चुके हैं।

मुख्य बातें

पटियाला हाउस कोर्ट ने 15 सितंबर 2026 को इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी।
भारद्वाज पर जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान नाबालिग एक्टिविस्ट के पिता संजय कुमार से कथित मारपीट का आरोप है।
एफआईआर में बीएनएस , एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आपराधिक धमकी की धाराएँ शामिल हैं।
नाबालिग एक्टिविस्ट की ऑनलाइन उत्पीड़न शिकायत पर POCSO अधिनियम के तहत अलग एफआईआर भी दर्ज।
दिल्ली उच्च न्यायालय पहले उनकी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर चुका है।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा — भारद्वाज ने वायरल वीडियो में उनके नाम का 'गलत इस्तेमाल' किया; उन्होंने आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई।

पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को खुद को 'इन्फ्लुएंसर' बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी। भारद्वाज जंतर-मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग एक्टिविस्ट के पिता संजय कुमार के साथ कथित मारपीट के मामले में न्यायिक हिरासत में थे। यह आदेश कोर्ट द्वारा उनकी रेगुलर जमानत अर्जी पर फैसला सुरक्षित रखने के ठीक एक दिन बाद आया है।

मुख्य घटनाक्रम

एडिशनल सेशन जज सौरभ प्रताप सिंह लालर ने यह अंतरिम राहत प्रदान की। उल्लेखनीय है कि भारद्वाज को 4 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से हिरासत में लिया गया था, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों ने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर उनकी गिरफ्तारी की माँग की थी।

सोमवार की सुनवाई में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा था कि क्या कथित घटना के दौरान भारद्वाज ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया था। अभियोजन पक्ष ने स्वीकार किया कि शुरुआती शिकायत में ऐसी किसी भाषा का उल्लेख नहीं था — यह आरोप बाद में लगाया गया जब शिकायतकर्ता का बयान दोबारा दर्ज किया गया, और तब एफआईआर में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएँ जोड़ी गईं।

एफआईआर में धाराएँ और पुलिस का रुख

वर्तमान एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आपराधिक धमकी से संबंधित धाराएँ शामिल हैं। पुलिस ने पहले कहा था कि पीड़ित को लगी चोटें 'मामूली' थीं और कथित तौर पर स्टील के ब्रेसलेट से लगी थीं।

सीजेपी ने हत्या के प्रयास का आरोप जोड़ने की भी माँग की थी, जिस पर पुलिस ने कहा कि विशेषज्ञ मेडिकल राय प्राप्त होने के बाद इस प्रावधान पर विचार किया जाएगा।

POCSO मामला और हाईकोर्ट का आदेश

नाबालिग एक्टिविस्ट की शिकायत पर भारद्वाज के खिलाफ प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज (POCSO) अधिनियम के तहत एक अलग एफआईआर भी दर्ज की गई है। एक्टिविस्ट ने ऑनलाइन बलात्कार की धमकी और उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इससे पहले भारद्वाज की 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' (हेबियस कॉर्पस) याचिका खारिज कर दी थी। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ ने याचिका तब अस्वीकार की जब दिल्ली पुलिस ने बताया कि भारद्वाज को पहले ही न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है, इसलिए याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद उस वायरल वीडियो के सामने आने के बाद शुरू हुआ जिसमें भारद्वाज ने कथित तौर पर दावा किया कि उन्होंने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान नाबालिग एक्टिविस्ट के पिता से मारपीट की और यह भी कहा कि उन्हें उनके 'राजनीतिक संपर्कों' की वजह से छोड़ दिया गया। बाद में भारद्वाज ने मीडिया को बताया कि उन्होंने यह कथित तौर पर आत्मरक्षा में किया था।

केंद्रीय मंत्री एवं लोक जनशक्ति पार्टी-रामविलास (एलजेपी-आरवी) प्रमुख चिराग पासवान ने कहा कि उस वीडियो में भारद्वाज ने उनके नाम का 'गलत इस्तेमाल' किया। पासवान ने बताया कि उन्होंने भारद्वाज के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है और वे नाबालिग पीड़िता व उसके परिवार को न्याय दिलाना सुनिश्चित करेंगे।

आगे क्या होगा

अदालत ने रेगुलर जमानत अर्जी पर अपना फैसला अभी सुरक्षित रखा हुआ है। तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत अवधि समाप्त होने के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। एससी/एसटी अधिनियम की धाराओं के जोड़े जाने और POCSO एफआईआर के चलते भारद्वाज की कानूनी चुनौतियाँ अभी समाप्त नहीं हुई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिनका जवाब अदालत को देना होगा। साथ ही, एक केंद्रीय मंत्री का खुद शिकायतकर्ता बनना इस प्रकरण को सामान्य आपराधिक मुकदमे से परे ले जाता है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वतंत्र भारद्वाज को अंतरिम जमानत क्यों मिली?
पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल सेशन जज सौरभ प्रताप सिंह लालर ने 15 सितंबर 2026 को तीन सप्ताह की अंतरिम राहत दी। यह आदेश रेगुलर जमानत अर्जी पर फैसला सुरक्षित रखने के एक दिन बाद आया।
स्वतंत्र भारद्वाज पर क्या-क्या आरोप हैं?
भारद्वाज पर जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान नाबालिग एक्टिविस्ट के पिता संजय कुमार से मारपीट का आरोप है। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता, एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आपराधिक धमकी की धाराएँ हैं; इसके अलावा नाबालिग की ऑनलाइन उत्पीड़न शिकायत पर POCSO के तहत अलग मामला भी दर्ज है।
SC/ST अधिनियम की धाराएँ बाद में क्यों जोड़ी गईं?
अभियोजन पक्ष ने स्वीकार किया कि शुरुआती शिकायत में जातिसूचक भाषा का उल्लेख नहीं था। शिकायतकर्ता का बयान दोबारा दर्ज होने के बाद यह आरोप जोड़ा गया, जिस पर अदालत ने दिल्ली पुलिस से सोमवार की सुनवाई में स्पष्टीकरण माँगा था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने भारद्वाज की याचिका क्यों खारिज की?
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका इसलिए खारिज की क्योंकि दिल्ली पुलिस ने बताया कि भारद्वाज को पहले ही न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है, अतः याचिका सुनवाई योग्य नहीं रहती।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का इस मामले से क्या संबंध है?
लोक जनशक्ति पार्टी-रामविलास प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि भारद्वाज ने वायरल वीडियो में उनके नाम का 'गलत इस्तेमाल' किया। उन्होंने भारद्वाज के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है और नाबालिग पीड़िता व उसके परिवार को न्याय दिलाने का संकल्प जताया है।
राष्ट्र प्रेस
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