इंजीनियर राशिद की अंतरिम जमानत याचिका: दिल्ली हाई कोर्ट में NIA का कड़ा विरोध, पिता की बीमारी का हवाला

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इंजीनियर राशिद की अंतरिम जमानत याचिका: दिल्ली हाई कोर्ट में NIA का कड़ा विरोध, पिता की बीमारी का हवाला

सारांश

बारामूला सांसद इंजीनियर राशिद की अंतरिम जमानत की लड़ाई अब दिल्ली हाई कोर्ट में पहुँच गई है। पटियाला हाउस कोर्ट की अस्वीकृति के बाद, बीमार पिता से मिलने की मानवीय अपील और NIA का कड़ा विरोध — दोनों आमने-सामने हैं। यह मामला टेरर फंडिंग केसों में मानवीय राहत की सीमाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

Key Takeaways

  • दिल्ली हाई कोर्ट में 28 अप्रैल को इंजीनियर राशिद की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई दोपहर 2:30 बजे IST निर्धारित थी।
  • NIA के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने गोपनीय दस्तावेज़ पेश करने के लिए अतिरिक्त समय माँगा।
  • NIA ने संरक्षित गवाह के बयान बदलने का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया।
  • राशिद के वकील हरिहरन ने बुजुर्ग पिता की गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने का मानवीय आधार पेश किया।
  • पटियाला हाउस कोर्ट पहले ही इस याचिका को खारिज कर चुका है; राशिद ने हाई कोर्ट में अपील की है।

टेरर फंडिंग मामले में न्यायिक हिरासत में बंद बारामूला से सांसद इंजीनियर राशिद की अंतरिम जमानत याचिका पर मंगलवार, 28 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। यह सुनवाई दोपहर 2:30 बजे IST निर्धारित थी, जिसमें राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने जमानत का कड़ा विरोध किया, जबकि राशिद के वकील ने उनके बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार पिता से मिलने की मानवीय अपील की।

मुख्य घटनाक्रम

NIA की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत के सवालों पर गोपनीय दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय माँगा। उन्होंने कहा कि इस विषय पर निर्देश प्राप्त करने के लिए उन्हें कुछ और समय की आवश्यकता है।

एजेंसी ने जमानत का विरोध करते हुए तर्क दिया कि पिछली सुनवाई में स्पेशल जज के समक्ष एक संरक्षित गवाह से पूछताछ की गई थी, जो अपने पूर्व बयान से पलट गया। NIA ने इसी आधार पर अंतरिम जमानत देने का विरोध किया।

बचाव पक्ष की दलीलें

राशिद के वकील हरिहरन ने कोर्ट के समक्ष मानवीय आधार पर जमानत की माँग रखी। उन्होंने बताया कि यह याचिका मूलतः ट्रायल कोर्ट में राशिद के बुजुर्ग पिता की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए दाखिल की गई थी। उनके अनुसार, राशिद के पिता अपने जीवन के अंतिम दौर में प्रतीत होते हैं और उन्हें किसी चिकित्सा प्रक्रिया के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

हरिहरन ने यह भी रेखांकित किया कि जब राशिद को चुनाव प्रचार के लिए बाहर जाने की अनुमति दी गई थी, उस दौरान NIA ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बीमार पिता से मिलने जैसे मानवीय कारण के लिए जमानत माँगी जा रही है, तो विरोध क्यों किया जा रहा है।

पटियाला हाउस कोर्ट का पूर्व फैसला

गौरतलब है कि पटियाला हाउस कोर्ट पहले ही राशिद की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर चुका है। इस फैसले को चुनौती देते हुए राशिद ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। यह ऐसे समय में आया है जब टेरर फंडिंग से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की गति और मानवीय आधार पर राहत का सवाल एक बार फिर केंद्र में आ गया है।

आगे क्या होगा

दिल्ली हाई कोर्ट की यह सुनवाई निर्णायक मानी जा रही है। NIA द्वारा गोपनीय दस्तावेज़ पेश करने पर अदालत का रुख स्पष्ट होने के बाद ही अगली तारीख या कोई आदेश संभावित है। राशिद के समर्थकों और कानूनी विशेषज्ञों की नज़रें इस सुनवाई के नतीजे पर टिकी हैं।

Point of View

लेकिन इसे अदालत में स्वतंत्र रूप से परखा जाना चाहिए। टेरर फंडिंग मामलों में मानवीय राहत की सीमाएँ तय करने का यह मामला एक मिसाल बन सकता है।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

इंजीनियर राशिद कौन हैं और वे जेल में क्यों हैं?
इंजीनियर राशिद बारामूला से निर्वाचित सांसद हैं, जो टेरर फंडिंग मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज मुकदमे के चलते न्यायिक हिरासत में हैं। उन पर आतंकवाद से जुड़े वित्तीय लेन-देन के आरोप हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट में 28 अप्रैल की सुनवाई किस बारे में थी?
यह सुनवाई राशिद की उस अंतरिम जमानत याचिका पर थी, जो उन्होंने अपने गंभीर रूप से बीमार पिता से मिलने के मानवीय आधार पर दाखिल की है। पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की है।
NIA ने जमानत का विरोध किस आधार पर किया?
NIA ने तर्क दिया कि पिछली सुनवाई में एक संरक्षित गवाह अपने पूर्व बयान से पलट गया, जिससे मामले की संवेदनशीलता बढ़ गई है। एजेंसी ने गोपनीय दस्तावेज़ पेश करने के लिए भी अतिरिक्त समय माँगा।
बचाव पक्ष ने मानवीय आधार पर क्या दलीलें दीं?
राशिद के वकील हरिहरन ने कहा कि राशिद के बुजुर्ग पिता अपने जीवन के अंतिम दौर में हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि चुनाव प्रचार के लिए जब जमानत दी गई तब NIA ने आपत्ति नहीं जताई थी।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
दिल्ली हाई कोर्ट NIA के गोपनीय दस्तावेज़ों की समीक्षा के बाद अगली तारीख या आदेश दे सकता है। अदालत का फैसला टेरर फंडिंग मामलों में मानवीय जमानत की सीमाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
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