निशु आजाद मामला: स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत पर फैसला सुरक्षित, 15 सितंबर को आएगा पटियाला हाउस कोर्ट का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
पटियाला हाउस कोर्ट ने 14 सितंबर 2026 को निशु आजाद के पिता के साथ मारपीट के मामले में गिरफ्तार आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत यह निर्णय 15 सितंबर 2026 को सुनाएगी, तब तय होगा कि आरोपी को न्यायिक हिरासत से राहत मिलेगी या नहीं।
मुख्य घटनाक्रम
यह मामला जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर कॉकरोच जनता पार्टी के एक प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता के साथ कथित मारपीट से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को 4 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया था। दर्ज एफआईआर में मारपीट के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएँ भी जोड़ी गई हैं, जिससे मामले की गंभीरता बढ़ गई है।
अदालत के तीखे सवाल
सोमवार की सुनवाई में पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कड़े सवाल किए। अदालत ने विशेष रूप से पूछा कि क्या घटना के समय आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज ने जाति सूचक शब्द का इस्तेमाल किया था। पुलिस ने जवाब दिया कि पीड़ित परिवार की पहली शिकायत में जाति सूचक शब्द के प्रयोग का कोई उल्लेख नहीं था। बाद में दोबारा दर्ज बयान में यह जिक्र आया, जिसके आधार पर एफआईआर में SC/ST एक्ट की धारा जोड़ी गई।
बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें
आरोपी पक्ष के वकील ने जमानत की माँग करते हुए तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को झूठे मामले में फँसाया गया है। उनका कहना है कि पहली शिकायत में SC/ST एक्ट का कोई उल्लेख नहीं था और बाद में इसे जोड़ा जाना संदिग्ध है। दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला संवेदनशील प्रकृति का है और जाँच अभी जारी है। गौरतलब है कि SC/ST एक्ट के तहत आरोप जुड़ने से जमानत प्रक्रिया अपेक्षाकृत कठिन हो जाती है।
आरोपी की न्यायिक हिरासत
स्वतंत्र भारद्वाज फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। 4 सितंबर 2026 को बुलंदशहर से गिरफ्तारी के बाद से वे जेल में हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा। यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान होने वाली हिंसा और उस पर SC/ST एक्ट के प्रावधानों के अनुप्रयोग को लेकर कानूनी बहस तेज़ हो रही है।
क्या होगा आगे
15 सितंबर 2026 को पटियाला हाउस कोर्ट का आदेश आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि स्वतंत्र भारद्वाज को जमानत मिलती है या उन्हें न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा। यदि जमानत अस्वीकार होती है, तो बचाव पक्ष उच्च न्यायालय का रुख कर सकता है। इस मामले का फैसला भविष्य में इसी तरह के प्रदर्शन-संबंधी विवादों में SC/ST एक्ट के आरोप जोड़ने की प्रक्रिया पर भी असर डाल सकता है।