टेरर फंडिंग केस: बारामूला सांसद रशीद इंजीनियर ने दिल्ली हाई कोर्ट में अंतरिम जमानत याचिका दाखिल की
सारांश
Key Takeaways
- बारामूला सांसद रशीद इंजीनियर ने 25 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट में अंतरिम जमानत याचिका दाखिल की।
- पटियाला हाउस कोर्ट ने उनके बीमार पिता (जो वेंटिलेटर पर हैं) से मिलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
- NIA ने सुझाव दिया था कि रशीद को कस्टडी पैरोल पर रिहा किया जा सकता है।
- रशीद को 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक संसद के पूरे बजट सत्र में भाग लेने की अनुमति दी गई थी।
- रशीद ने लोकसभा चुनाव 2024 में उमर अब्दुल्ला को करीब एक लाख मतों से हराया था।
- 16 मार्च 2022 को पटियाला हाउस कोर्ट ने रशीद समेत हाफिज सईद, यासिन मलिक और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल: टेरर फंडिंग मामले में न्यायिक हिरासत में बंद बारामूला के सांसद रशीद इंजीनियर ने दिल्ली हाई कोर्ट में अंतरिम जमानत के लिए याचिका दाखिल की है। यह याचिका उन्होंने तब दाखिल की जब दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने उनके बीमार पिता से मिलने के लिए अंतरिम जमानत की मांग को शुक्रवार, 25 अप्रैल को खारिज कर दिया। अब रशीद ने पटियाला हाउस कोर्ट के इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
पटियाला हाउस कोर्ट में क्या हुआ?
रशीद इंजीनियर ने पटियाला हाउस कोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि उनके पिता गंभीर रूप से बीमार हैं और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। इस मानवीय आधार पर उन्होंने अंतरिम जमानत की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि रशीद को कस्टडी पैरोल पर रिहा किया जा सकता है। हालांकि अदालत ने याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद रशीद ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
रशीद को पहले कब-कब मिली थी छूट?
गौरतलब है कि रशीद इंजीनियर को इससे पहले कई अवसरों पर अदालत ने विशेष अनुमति दी थी। 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक चले संसद के पूरे बजट सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति उन्हें दी गई थी।
नवंबर 2025 में भी अदालत ने उन्हें संसद सत्र में भाग लेने की इजाजत दी थी। इसके अलावा सितंबर 2025 में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान करने की भी अनुमति उन्हें प्राप्त हुई थी। इन सभी मौकों पर अदालत ने उनकी संवैधानिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी थी।
टेरर फंडिंग केस की पृष्ठभूमि
NIA के अनुसार, हाफिज सईद ने हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं के साथ मिलकर हवाला और अन्य अवैध चैनलों के जरिए आतंकी गतिविधियों के लिए धन का लेनदेन किया। इस रकम का इस्तेमाल कश्मीर घाटी में अशांति फैलाने, सुरक्षाबलों पर हमले करने, स्कूलों को जलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में किया गया।
जब इस षड्यंत्र की सूचना गृह मंत्रालय को मिली, तो NIA ने भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के साथ-साथ UAPA के तहत मामला दर्ज किया। 2016 में रशीद इंजीनियर को इसी मामले में गिरफ्तार किया गया था।
आरोपियों की सूची और आरोप तय करने का आदेश
पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 मार्च 2022 को इस मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया था। आरोपियों में हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासिन मलिक, शब्बीर शाह, मसरत आलम, रशीद इंजीनियर, जहूर अहमद वताली, बिट्टा कराटे, आफताब अहमद शाह, अवतार अहमद शाह, नईम खान और बशीर अहमद बट्ट उर्फ पीर सैफुल्ला समेत कई अन्य शामिल हैं।
रशीद की राजनीतिक ताकत और विरोधाभास
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रशीद इंजीनियर ने लोकसभा चुनाव 2024 में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को करीब एक लाख मतों के बड़े अंतर से पराजित किया था। हिरासत में रहते हुए चुनाव जीतना और सांसद बनना — यह भारतीय लोकतंत्र की एक अनूठी परिस्थिति है जो न्यायिक, राजनीतिक और संवैधानिक सवाल एक साथ खड़े करती है।
यह भी उल्लेखनीय है कि एक ओर जहां रशीद को संसद में मतदान और सत्र में भाग लेने की अनुमति मिलती रही है, वहीं बीमार पिता से मिलने की उनकी मानवीय अपील को अदालत ने अस्वीकार कर दिया। यह विरोधाभास इस मामले के कानूनी और मानवीय दोनों पहलुओं को जटिल बनाता है।
अब सभी की निगाहें दिल्ली हाई कोर्ट पर टिकी हैं कि वह इस याचिका पर कब सुनवाई करता है और क्या रशीद को अपने बीमार पिता से मिलने का मौका मिल पाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख जल्द ही तय होने की संभावना है।