15 सितंबर 2026
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उमर अब्दुल्ला बोले — विदेश नीति पर चीन का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए, यूसीसी संसद से लागू हो

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उमर अब्दुल्ला बोले — विदेश नीति पर चीन का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए, यूसीसी संसद से लागू हो

सारांश

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तीन मोर्चों पर एक साथ बयान दिए — चीन की तारीफ को ठुकराया, यूसीसी को बैकडोर से नहीं बल्कि संसद से लागू करने की माँग की, और LAC पर तनाव घटने को सकारात्मक बताया। NDA के भीतर ही यूसीसी पर दरार उजागर करने वाला यह बयान सीधे केंद्र को चुनौती है।

मुख्य बातें

उमर अब्दुल्ला ने 15 सितंबर 2026 को श्रीनगर में कहा — भारत की विदेश नीति को किसी देश के अनुमोदन की ज़रूरत नहीं।
चीन की सराहना को उन्होंने दोधारी तलवार बताया — जो आज तारीफ करे, कल विरोध भी कर सकता है।
यूसीसी पर कहा — केवल भाजपा-शासित राज्यों में लागू करने से वह 'यूनिवर्सल' नहीं बनती; कानून संसद में आना चाहिए।
जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बिहार में यूसीसी न लागू करने के रुख का हवाला देकर NDA के भीतर असहमति उजागर की।
LAC पर चीनी तैनाती कम होने की रिपोर्टों को सीमावर्ती आबादी के लिए राहत की खबर बताया।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को श्रीनगर में कई राष्ट्रीय मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाया — चीन द्वारा भारत की विदेश नीति की प्रशंसा, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विवाद और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम होने की रिपोर्टें। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि भारत की विदेश नीति को किसी दूसरे देश के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है।

विदेश नीति पर उमर अब्दुल्ला का स्पष्ट रुख

चीन द्वारा भारत की विदेश नीति की सराहना किए जाने पर उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'हमारी विदेश नीति हमारी अपनी है। हम दूसरे देशों के सर्टिफिकेट क्यों देखते हैं? इसमें खतरा यह है कि कल अगर चीन हमारी विदेश नीति के खिलाफ कुछ कहे, तो आप क्या करेंगे? इसलिए मुझे नहीं लगता कि हमें दूसरे देशों द्वारा हमारी विदेश नीति के बारे में कही गई बातों को, चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक, ज्यादा महत्व देना चाहिए।'

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत-चीन संबंधों को लेकर कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हैं और LAC पर स्थिति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

यूसीसी पर तीखा सवाल — 'संसद में लाइए, बैकडोर से नहीं'

समान नागरिक संहिता को राज्यों में लागू किए जाने की कोशिशों पर उमर अब्दुल्ला ने सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास बहुमत है, तो यूसीसी को संसद में लाया जाए — अलग-अलग राज्यों में इसे लागू करने का प्रयास उचित नहीं।

उन्होंने कहा, 'रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनता दल यूनाइटेड ने सीधे हाथ खड़े कर दिए हैं और कहा है कि यह बिहार में लागू नहीं होगा। तो अगर उनके अपने लोग ही इसके लिए तैयार नहीं हैं, तो वे कैसे कह सकते हैं कि इसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए? उन्हें बैकडोर से नहीं आना चाहिए, उन्हें संसद में बिल लाना चाहिए और देखना चाहिए कि उनके पास नंबर हैं या नहीं।'

गौरतलब है कि एनडीए के भीतर ही यूसीसी पर एकमत नहीं है, जो इसकी केंद्रीय स्तर पर व्यावहारिकता पर सवाल खड़े करता है।

यूसीसी की सार्वभौमिकता पर सवाल

उमर अब्दुल्ला ने तर्क दिया कि यदि यह संहिता पूरे देश में लागू नहीं होती, तो यह 'यूनिवर्सल' कैसे कही जाएगी। उन्होंने कहा कि पूरा देश भाजपा-शासित नहीं है और कई राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार नहीं है। इसलिए केवल भाजपा-शासित राज्यों में लागू करने से यह 'यूनिवर्सल सिविल कोड' नहीं बनता।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के कानून का निर्णय राज्यों का नहीं, बल्कि पूरे देश का है — और पूरे देश का प्रतिनिधित्व संसद में होता है।

LAC पर तनाव घटने पर स्वागत

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी तैनाती कम होने की रिपोर्टों पर उमर अब्दुल्ला ने इसे सकारात्मक कदम बताया, खासकर सीमा के नज़दीक रहने वाले लोगों के लिए।

उन्होंने कहा, 'हम जानते हैं कि एलओसी या एलएसी के करीब रहने वाले लोगों के लिए यह कितना मुश्किल है। इसलिए यदि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनाती कम करने वाला कोई कदम है, तो यह एक अच्छा कदम है। और इसी तरह हम उम्मीद करते हैं कि समय के साथ, नियंत्रण रेखा पर भी चीजें बेहतर होंगी।'

आगे क्या

उमर अब्दुल्ला के ये बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण हैं जब केंद्र और राज्यों के बीच यूसीसी पर संवैधानिक अधिकार को लेकर बहस तेज़ हो रही है। साथ ही LAC पर किसी भी सकारात्मक घटनाक्रम का सीधा असर जम्मू-कश्मीर और उसकी सीमावर्ती आबादी पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूसीसी को संसदीय बहुमत के बिना राज्यों में थोपने का प्रयास कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चुनौतियाँ पैदा कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक अप्रत्यक्ष संदेश भी है कि चीन की तारीफ को जश्न की तरह पेश करना कूटनीतिक समझदारी नहीं। LAC पर सकारात्मक टिप्पणी उनकी उस राजनीतिक ज़िम्मेदारी को भी दर्शाती है जो सीमावर्ती राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में उन पर है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन तीनों बयानों को अलग-अलग देखती है, जबकि मिलकर ये एक सुसंगत राजनीतिक संदेश बनाते हैं — केंद्र से जवाबदेही माँगने का।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमर अब्दुल्ला ने चीन के सर्टिफिकेट को लेकर क्या कहा?
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि भारत की विदेश नीति स्वतंत्र है और इसे किसी दूसरे देश की सराहना या आलोचना से नहीं आँका जाना चाहिए। उन्होंने चेताया कि जो देश आज तारीफ करे, वही कल विरोध भी कर सकता है — इसलिए बाहरी अनुमोदन को महत्व नहीं देना चाहिए।
उमर अब्दुल्ला ने यूसीसी पर क्या रुख अपनाया?
उन्होंने माँग की कि यूसीसी को राज्यों में बैकडोर से नहीं, बल्कि संसद में विधिवत बिल लाकर लागू किया जाए। उनका तर्क है कि यदि यह केवल भाजपा-शासित राज्यों में लागू होती है, तो यह 'यूनिवर्सल' नहीं कही जा सकती।
NDA के भीतर यूसीसी पर मतभेद क्यों हैं?
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि रिपोर्ट्स के अनुसार जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने स्पष्ट कर दिया है कि यूसीसी बिहार में लागू नहीं होगा। यह NDA गठबंधन के भीतर ही इस मुद्दे पर आम सहमति की कमी को दर्शाता है।
LAC पर तनाव कम होने पर उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने LAC पर चीनी तैनाती घटने की रिपोर्टों का स्वागत किया और इसे सीमावर्ती आबादी के लिए अच्छा कदम बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में नियंत्रण रेखा (LOC) पर भी स्थिति बेहतर होगी।
यूसीसी संसद में क्यों आना चाहिए, राज्यों में क्यों नहीं?
उमर अब्दुल्ला के अनुसार, पूरे देश का प्रतिनिधित्व राज्य विधानसभाओं में नहीं बल्कि संसद में होता है। इसलिए देशव्यापी कानून का निर्णय संसद को करना चाहिए — राज्यों को अलग-अलग नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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