उमर अब्दुल्ला बोले — भारतीय विदेश नीति को किसी देश के 'सर्टिफिकेट' की दरकार नहीं, UCC पर भी साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 15 सितंबर 2026 को श्रीनगर में तीन अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी — चीन द्वारा भारतीय विदेश नीति की तारीफ, समान नागरिक संहिता (UCC) विवाद और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव में कमी की खबरें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत की विदेश नीति किसी दूसरे देश की मंजूरी की मोहताज नहीं है।
विदेश नीति पर उमर का दो-टूक जवाब
चीन द्वारा भारत की विदेश नीति की सराहना किए जाने के सवाल पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'हमारी विदेश नीति हमारी अपनी है। हम दूसरे देशों के सर्टिफिकेट क्यों देखते हैं?' उन्होंने चेतावनी के अंदाज़ में जोड़ा, 'इसमें खतरा यह है कि कल अगर चीन हमारी विदेश नीति के खिलाफ कुछ कहे, तो आप क्या करेंगे? इसलिए मुझे नहीं लगता कि हमें दूसरे देशों द्वारा हमारी विदेश नीति के बारे में कही गई बातों को, चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक, ज़्यादा महत्व देना चाहिए।'
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-चीन संबंधों में हालिया कूटनीतिक हलचल देखी जा रही है। उमर का यह बयान उन आवाज़ों से एकदम अलग है जो बाहरी मान्यता को घरेलू नीति की सफलता का पैमाना मानती हैं।
UCC पर तीखा हमला — 'बैकडोर से नहीं, संसद में लाइए'
समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर मुख्यमंत्री ने सीधे सवाल दागा कि यदि केंद्र सरकार के पास बहुमत है तो इसे अलग-अलग राज्यों में लागू करने की बजाय संसद में क्यों नहीं लाया जाता। उन्होंने कहा, 'वैसे भी उनके अपने एनडीए में ही इस पर सहमति नहीं है।'
रिपोर्टों का हवाला देते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'जनता दल यूनाइटेड ने सीधे हाथ खड़े कर दिए हैं और कहा है कि यह बिहार में लागू नहीं होगा। तो अगर उनके अपने लोग ही इसके लिए तैयार नहीं हैं, तो वे कैसे कह सकते हैं कि इसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए? उन्हें बैकडोर से नहीं आना चाहिए — उन्हें संसद में बिल लाना चाहिए और देखना चाहिए कि उनके पास नंबर हैं या नहीं।'
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अगर UCC पूरे देश में एकसमान रूप से लागू नहीं होती, तो वह 'यूनिवर्सल' कैसे कहलाएगी। उनके मुताबिक, 'पूरा देश भाजपा शासित नहीं है। कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भाजपा का शासन नहीं है, इसलिए यदि इसे केवल भाजपा शासित राज्यों में लागू किया जाता है तो यह यूनिवर्सल नहीं है।'
गौरतलब है कि UCC को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज़ है और कई विपक्षी दल इसी तर्ज पर सवाल उठाते रहे हैं।
LAC पर तनाव कम होना — सीमावर्ती लोगों के लिए राहत
वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी सैन्य तैनाती में कमी की खबरों पर मुख्यमंत्री ने सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'कोई भी चीज़ जो नियंत्रण रेखा या वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव कम करती है, वह एक अच्छा कदम है — खासकर उन लोगों के लिए जो इसके करीब रहते हैं।'
उमर ने सीमावर्ती निवासियों की पीड़ा को रेखांकित करते हुए कहा, 'हम जानते हैं कि LOC या LAC के करीब रहने वाले लोगों के लिए यह कितना मुश्किल है। यदि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनाती कम करने वाला कोई कदम है, तो यह एक अच्छा कदम है। और इसी तरह, हम उम्मीद करते हैं कि समय के साथ नियंत्रण रेखा पर भी चीजें बेहतर होंगी।'
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
उमर अब्दुल्ला का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल होने की माँग ज़ोर पकड़ रही है और केंद्र-राज्य संबंधों पर नई बहस छिड़ी हुई है। विदेश नीति से लेकर UCC तक उनके तीखे बयानों को राजनीतिक विश्लेषक नेशनल कॉन्फ्रेंस की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को स्थापित करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में UCC और LAC, दोनों मुद्दों पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।