शीर्ष 10 में से 6 कंपनियों का मार्केटकैप ₹88,678 करोड़ बढ़ा, ICICI बैंक सबसे आगे
सारांश
मुख्य बातें
देश की शीर्ष 10 कंपनियों में से छह का संयुक्त बाजार पूंजीकरण बीते सप्ताह ₹88,678.1 करोड़ की बढ़त के साथ बंद हुआ, जिसमें आईसीआईसीआई बैंक सबसे बड़े लाभार्थी के रूप में उभरा। 28 जून 2025 को समाप्त हुए इस कारोबारी सप्ताह में बीएसई सेंसेक्स 0.39% की बढ़त के साथ 77,100.47 पर और निफ्टी 50 0.18% की मामूली तेजी के साथ 24,056 पर बंद हुआ।
मार्केटकैप में बढ़त: कौन रहा आगे
आईसीआईसीआई बैंक का बाजार पूंजीकरण इस सप्ताह ₹29,588.75 करोड़ उछलकर ₹9,95,610.74 करोड़ पर पहुँच गया, जो शीर्ष 10 में सर्वाधिक साप्ताहिक बढ़त रही। एचडीएफसी बैंक का मार्केटकैप ₹24,718.3 करोड़ बढ़कर ₹12,25,981.44 करोड़ हो गया, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण ₹12,043.96 करोड़ की वृद्धि के साथ ₹17,83,926.92 करोड़ पर पहुँचा।
बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप ₹11,580.28 करोड़ बढ़कर ₹6,10,081.53 करोड़, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का बाजार पूंजीकरण ₹9,322.93 करोड़ की बढ़त के साथ ₹9,64,738 करोड़ और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का मार्केटकैप ₹1,423.88 करोड़ उछलकर ₹5,80,550.83 करोड़ पर पहुँच गया।
गिरावट में रहीं ये प्रमुख कंपनियाँ
दूसरी ओर, भारती एयरटेल को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा — उसका मार्केटकैप ₹35,615.21 करोड़ घटकर ₹11,27,348.09 करोड़ रह गया। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का बाजार पूंजीकरण ₹21,188.74 करोड़ कम होकर ₹5,35,537.56 करोड़ पर आ गया।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का मार्केटकैप ₹11,143.71 करोड़ की गिरावट के साथ ₹7,58,206.42 करोड़ और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) का बाजार पूंजीकरण ₹5,321.83 करोड़ घटकर ₹5,10,624.92 करोड़ पर बंद हुआ।
बाजार की चाल और उतार-चढ़ाव
गौरतलब है कि बीता सप्ताह घरेलू शेयर बाजार के लिए मिला-जुला रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने मामूली बढ़त दर्ज की, लेकिन व्यक्तिगत शेयरों में उल्लेखनीय उठापटक देखी गई। बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र ने बाजार को सहारा दिया, जबकि दूरसंचार और आईटी क्षेत्र दबाव में रहे।
अगले सप्ताह बाजार पर क्या रहेगा असर
आगामी सप्ताह घरेलू निवेशकों के लिए कई अहम संकेत लेकर आएगा। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की दिशा पर सबकी निगाहें टिकी हैं — केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि दोनों देश एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुझान और घरेलू आर्थिक आँकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे।