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भद्रासन से घुटने, कूल्हे और रीढ़ होते हैं मजबूत — आयुष मंत्रालय की सलाह और ज़रूरी सावधानियाँ

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भद्रासन से घुटने, कूल्हे और रीढ़ होते हैं मजबूत — आयुष मंत्रालय की सलाह और ज़रूरी सावधानियाँ

सारांश

भद्रासन — यानी 'कल्याणकारी आसन' — सिर्फ एक बैठने की मुद्रा नहीं है। आयुष मंत्रालय इसे घुटनों, कूल्हों, रीढ़, पाचन और मानसिक स्वास्थ्य के लिए प्रभावी मानता है। गर्भवती महिलाओं से लेकर बुजुर्गों तक — सही तकनीक और सावधानी के साथ यह आसन समग्र स्वास्थ्य का सरल माध्यम बन सकता है।

मुख्य बातें

भद्रासन को आयुष मंत्रालय द्वारा घुटनों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने के लिए प्रभावी माना गया है।
यह आसन गुर्दे , प्रोस्टेट स्वास्थ्य और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में सहायक है।
गर्भवती महिलाओं के लिए यह कूल्हों और जांघों की मांसपेशियाँ मजबूत कर प्रसव को सहज बना सकता है।
सिरदर्द , अनिद्रा , कमर दर्द और मासिक धर्म की ऐंठन में राहत मिलती है।
घुटनों या कूल्हों में गंभीर दर्द होने पर पहले डॉक्टर से परामर्श अनिवार्य है।
शुरुआत में अभ्यास का समय धीरे-धीरे बढ़ाएँ और प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ का मार्गदर्शन लें।

भद्रासन — संस्कृत में जिसका अर्थ है 'कल्याणकारी आसन' — योग की उन विधाओं में से एक है जिसे भारत सरकार का आयुष मंत्रालय घुटनों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने के लिए प्रभावी मानता है। यह आसन देखने में सरल लगता है, लेकिन नियमित अभ्यास से शरीर और मन दोनों पर इसके गहरे सकारात्मक प्रभाव देखे जाते हैं। प्राचीन काल से भारतीय योग परंपरा में इसे विशेष स्थान प्राप्त है।

भद्रासन क्या है और यह कैसे काम करता है

संस्कृत शब्द 'भद्र' का अर्थ है 'शुभ' या 'कल्याणकारी'। इस आसन में साधक अपनी बैठने वाली हड्डियों (सिटिंग बोन्स) को भूमि पर टिकाता है, जिससे रीढ़ की हड्डी स्वाभाविक रूप से लंबी और सीधी होती है। यह प्रक्रिया जांघों, घुटनों, टखनों और पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियों को एक साथ खींचती, मजबूत करती और लचीला बनाती है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से पाचन तंत्र बेहतर होता है, कब्ज की समस्या कम होती है और भोजन का पाचन सुचारु रहता है। साथ ही गुर्दे और प्रोस्टेट के स्वास्थ्य पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ता है।

महिलाओं के लिए विशेष लाभ

योग विशेषज्ञों के अनुसार, भद्रासन महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। यह मासिक धर्म की ऐंठन और तकलीफों को कम करने में सहायक माना जाता है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह आसन कूल्हों और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत करता है, जिससे प्रसव की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सहज हो सकती है — हालाँकि गर्भावस्था में कोई भी योगाभ्यास शुरू करने से पहले चिकित्सक की सलाह अनिवार्य है।

मानसिक स्वास्थ्य और अन्य लाभ

भद्रासन केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। नियमित अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है और मस्तिष्क की कार्यक्षमता में सुधार होता है। इसके अतिरिक्त, सिरदर्द, कमर दर्द, आँखों की कमजोरी, अनिद्रा और हिचकी जैसी सामान्य समस्याओं में भी राहत मिलती है। तनाव कम करने में भी यह आसन कारगर बताया जाता है।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

योग विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि भद्रासन हर उम्र के लोग कर सकते हैं, लेकिन कुछ परिस्थितियों में सतर्कता ज़रूरी है। जिन लोगों के घुटनों या कूल्हों में गंभीर दर्द हो, उन्हें पहले डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। शुरुआत में अधिक जोर लगाने से बचें और अभ्यास का समय धीरे-धीरे बढ़ाएँ। किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में आसन सीखना सबसे सुरक्षित रहता है।

आगे क्या करें

आयुष मंत्रालय योग को समग्र स्वास्थ्य के एक अभिन्न अंग के रूप में प्रोत्साहित करता है। भद्रासन को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले किसी प्रमाणित योग विशेषज्ञ से सही तकनीक सीखना उचित है, ताकि आसन का पूरा लाभ मिले और चोट से बचाव हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

और पाठकों को मंत्रालय की अनुशंसाओं को विशेषज्ञ चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं मानना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और घुटने की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए व्यक्तिगत चिकित्सक परामर्श अनिवार्य है — यह बिंदु अक्सर सामान्य योग कवरेज में नज़रअंदाज़ हो जाता है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भद्रासन क्या है और इसे 'कल्याणकारी आसन' क्यों कहते हैं?
भद्रासन एक पारंपरिक योग मुद्रा है जिसमें बैठकर रीढ़ को सीधा रखा जाता है। संस्कृत में 'भद्र' का अर्थ 'शुभ' या 'कल्याणकारी' होता है, इसीलिए इसे कल्याणकारी आसन कहा जाता है।
भद्रासन से घुटनों और रीढ़ को कैसे फायदा होता है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन में बैठने वाली हड्डियों को जमीन पर टिकाने से रीढ़ स्वाभाविक रूप से सीधी होती है और जांघों, घुटनों व टखनों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं। यह पेल्विक क्षेत्र में लचीलापन भी बढ़ाता है।
क्या गर्भवती महिलाएँ भद्रासन कर सकती हैं?
भद्रासन गर्भवती महिलाओं के लिए कूल्हों और जांघों की मांसपेशियाँ मजबूत करने में सहायक बताया जाता है, जिससे प्रसव सहज हो सकता है। हालाँकि गर्भावस्था में कोई भी योगाभ्यास शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक से अनिवार्य रूप से परामर्श लें।
भद्रासन करते समय किन सावधानियों का पालन करना चाहिए?
घुटनों या कूल्हों में गंभीर दर्द होने पर पहले डॉक्टर से सलाह लें। शुरुआत में अधिक जोर न लगाएँ और अभ्यास का समय धीरे-धीरे बढ़ाएँ। प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में सीखना सबसे सुरक्षित विकल्प है।
भद्रासन के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव होते हैं?
नियमित अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है और तनाव कम होता है। सिरदर्द, अनिद्रा और कमर दर्द जैसी सामान्य समस्याओं में भी राहत मिलती है।
राष्ट्र प्रेस
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