शीर्ष 10 में से 5 कंपनियों का मार्केटकैप ₹1 लाख करोड़ घटा, TCS और रिलायंस सबसे ज़्यादा प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाज़ार में बीते सप्ताह हुई व्यापक बिकवाली के चलते देश की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से पाँच का संयुक्त बाज़ार पूंजीकरण (मार्केटकैप) करीब ₹1 लाख करोड़ घट गया। सेंसेक्स सप्ताह के अंत में 489.92 अंक (0.62%) की गिरावट के साथ 78,009.25 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 204.65 अंक (0.83%) फिसलकर 24,366.00 पर आ गया।
सबसे अधिक नुकसान किसे हुआ
टाटा ग्रुप की आईटी दिग्गज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को इस गिरावट में सबसे बड़ा झटका लगा। कंपनी का मार्केटकैप ₹34,263.28 करोड़ घटकर ₹8.53 लाख करोड़ रह गया।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाज़ार पूंजीकरण ₹31,869.13 करोड़ की कमी के साथ ₹17.70 लाख करोड़ पर आ गया। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का मार्केटकैप ₹25,891.88 करोड़ घटकर ₹9.86 लाख करोड़ रहा।
HDFC बैंक की बाज़ार वैल्यू ₹7,165.37 करोड़ की गिरावट के साथ ₹11.21 लाख करोड़ और ICICI बैंक का मार्केटकैप ₹2,792.65 करोड़ घटकर ₹10.18 लाख करोड़ हो गया।
किन कंपनियों ने दर्ज की बढ़त
गिरावट के बीच शीर्ष 10 की शेष पाँच कंपनियों के मार्केटकैप में कुल मिलाकर करीब ₹55,149.45 करोड़ का इज़ाफा हुआ।
लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) सर्वाधिक लाभ में रही — इसकी बाज़ार वैल्यू ₹26,438.49 करोड़ बढ़कर ₹5.23 लाख करोड़ हो गई। भारती एयरटेल की वैल्यूएशन ₹20,592.13 करोड़ की बढ़त के साथ ₹12.43 लाख करोड़ पर पहुँच गई।
बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप ₹3,548.79 करोड़ बढ़कर ₹6.77 लाख करोड़, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) की वैल्यूएशन ₹2,490.66 करोड़ की वृद्धि के साथ ₹5.59 लाख करोड़, और हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) का बाज़ार पूंजीकरण ₹2,079.38 करोड़ बढ़कर ₹4.91 लाख करोड़ हो गया।
शीर्ष 10 की मौजूदा रैंकिंग
सप्ताह के अंत में रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी रही। उसके बाद क्रमशः भारती एयरटेल, HDFC बैंक, ICICI बैंक, SBI, TCS, बजाज फाइनेंस, L&T, LIC और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।
आम निवेशक पर असर
यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब घरेलू बाज़ार वैश्विक अनिश्चितताओं और मुनाफावसूली के दबाव में है। बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, बड़े-कैप शेयरों में बिकवाली का असर म्यूचुअल फंड NAV और रिटेल निवेशकों के पोर्टफोलियो पर भी पड़ा है। आने वाले सप्ताह में वैश्विक संकेत और घरेलू आर्थिक आँकड़े बाज़ार की दिशा तय करेंगे।