शीर्ष 10 में से 4 कंपनियों का मार्केटकैप ₹87,960 करोड़ घटा, एयरटेल को सबसे बड़ा झटका
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई — 17 से 21 अगस्त 2026 के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाज़ार में व्यापक बिकवाली के चलते देश की शीर्ष 10 कंपनियों में से चार का संयुक्त बाज़ार पूंजीकरण (मार्केटकैप) ₹87,960.29 करोड़ सिकुड़ गया। सबसे अधिक नुकसान भारती एयरटेल को हुआ, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी रही।
साप्ताहिक बाज़ार प्रदर्शन
इस अवधि में BSE सेंसेक्स 468.42 अंक यानी 0.60 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,540.83 पर बंद हुआ। NSE निफ्टी भी 114 अंक यानी 0.47 प्रतिशत कमज़ोर होकर 24,252 पर आ गया। बाज़ार में यह दबाव व्यापक आधार पर था, जिसका असर बड़े-कैप शेयरों पर भी पड़ा।
किन कंपनियों को हुआ नुकसान
भारती एयरटेल का मार्केटकैप सबसे अधिक — ₹28,052.96 करोड़ — घटकर ₹12,14,963.15 करोड़ रह गया। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का बाज़ार मूल्यांकन ₹22,070.34 करोड़ की गिरावट के साथ ₹8,31,436.51 करोड़ पर आया। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का मार्केटकैप ₹20,861.20 करोड़ घटकर ₹9,64,968.76 करोड़ हो गया। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) का बाज़ार मूल्यांकन ₹16,975.79 करोड़ की कमी के साथ ₹4,73,912.56 करोड़ रहा।
किन कंपनियों को मिला फायदा
इसी दौरान कुछ कंपनियों के मार्केटकैप में बढ़त दर्ज हुई। लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) का मार्केटकैप ₹12,650 करोड़ बढ़कर ₹5,35,980.31 करोड़ हो गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाज़ार पूंजीकरण ₹8,119.53 करोड़ की वृद्धि के साथ ₹17,78,175.59 करोड़ पर पहुँचा। लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का मूल्यांकन ₹3,487.83 करोड़ बढ़कर ₹5,62,460.94 करोड़ और बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप ₹3,424.28 करोड़ की बढ़त के साथ ₹6,80,621.62 करोड़ हो गया।
ICICI बैंक का बाज़ार मूल्यांकन ₹752.47 करोड़ बढ़कर ₹10,18,330.45 करोड़ और HDFC बैंक का मार्केटकैप ₹356.95 करोड़ की मामूली बढ़त के साथ ₹11,21,159.05 करोड़ पर रहा।
शीर्ष 10 की रैंकिंग
बाज़ार पूंजीकरण के आधार पर रिलायंस इंडस्ट्रीज शीर्ष स्थान पर बनी रही। इसके बाद क्रमशः भारती एयरटेल, HDFC बैंक, ICICI बैंक, SBI, TCS, बजाज फाइनेंस, L&T, LIC और हिंदुस्तान यूनिलीवर शीर्ष 10 में शामिल रहे।
आगे क्या
यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक बाज़ारों में अनिश्चितता बनी हुई है और घरेलू निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत और घरेलू आर्थिक आँकड़े बाज़ार की दिशा तय करेंगे।