ICICI बैंक का Q2 मुनाफा 20% उछलकर ₹14,843 करोड़, ग्रॉस NPA घटकर 1.20% पर आया
सारांश
मुख्य बातें
आईसीआईसीआई बैंक ने 17 अक्टूबर 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के परिणाम जारी किए, जिसमें बैंक का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 20.1 प्रतिशत बढ़कर ₹14,843 करोड़ पर पहुँच गया। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आँकड़ा ₹12,359 करोड़ था। मुनाफे में इस उछाल के साथ-साथ बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार और प्रोविजनिंग में उल्लेखनीय कमी भी दर्ज की गई है।
मुख्य वित्तीय संकेतक
बैंक की शुद्ध ब्याज आय (NII) इस तिमाही में 18 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹25,339 करोड़ रही, जबकि एक वर्ष पूर्व यह ₹21,529 करोड़ थी। हालाँकि, शुद्ध ब्याज अंतर (NIM) पिछली तिमाही के 4.36 प्रतिशत से मामूली रूप से घटकर 4.18 प्रतिशत पर आ गया, जो निवेशकों के लिए एक सतर्कता का संकेत माना जा सकता है।
बैंक की प्रोविजनिंग जून तिमाही के ₹1,260 करोड़ और एक वर्ष पहले के ₹914 करोड़ की तुलना में घटकर ₹851 करोड़ पर आ गई, जो ऋण गुणवत्ता में सुधार का स्पष्ट संकेत है।
एसेट क्वालिटी में सुधार
बैंक का ग्रॉस NPA जून तिमाही के 1.38 प्रतिशत से घटकर 1.20 प्रतिशत पर आ गया — यह बैंक के लिए एक सकारात्मक संकेत है। वहीं नेट NPA भी 0.35 प्रतिशत से घटकर 0.30 प्रतिशत पर पहुँच गया। यह ऐसे समय में आया है जब कुछ अन्य निजी बैंकों में NPA दबाव बढ़ने की खबरें आ रही हैं, जो ICICI बैंक की बेहतर रिकवरी रणनीति को रेखांकित करता है।
नेतृत्व संबंधी आवेदन
एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, आईसीआईसीआई बैंक ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के समक्ष एक आवेदन दायर किया है, जिसमें प्रदीप कुमार सिन्हा को 1 जुलाई 2027 से 16 फरवरी 2029 तक बैंक के नॉन-एग्जीक्यूटिव पार्ट-टाइम चेयरपर्सन के पद पर बनाए रखने की अनुमति माँगी गई है। गौरतलब है कि यह प्रस्तावित अवधि उस कार्यकाल के भीतर ही आती है, जिसके लिए बोर्ड और शेयरधारकों ने उन्हें स्वतंत्र निदेशक के रूप में पहले ही मंजूरी दे दी है।
शेयर बाज़ार में प्रदर्शन
परिणामों की घोषणा से पूर्व पिछले कारोबारी सत्र में आईसीआईसीआई बैंक का शेयर 0.55 प्रतिशत की तेजी के साथ ₹1,397 पर बंद हुआ। बीते एक माह में शेयर ने लगभग 4 प्रतिशत का रिटर्न दिया है, जबकि पिछले एक वर्ष में इसमें करीब 3 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। मजबूत तिमाही परिणामों के बाद आगामी कारोबारी सत्रों में शेयर की चाल पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
आगे क्या
बैंक के NIM में आई मामूली गिरावट और RBI की ब्याज दर नीति के संदर्भ में यह देखना अहम होगा कि तीसरी तिमाही में बैंक किस तरह की ब्याज आय बनाए रख पाता है। प्रोविजनिंग में कमी और NPA में सुधार का रुझान यदि जारी रहा, तो ICICI बैंक की बैलेंस शीट और मजबूत होने की संभावना है।