आईडीबीआई बैंक का Q2 FY27 शुद्ध मुनाफा 39% घटकर ₹2,206 करोड़, NII में 28.7% उछाल
सारांश
मुख्य बातें
आईडीबीआई बैंक का वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (जुलाई–सितंबर 2026) में शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 39.2 प्रतिशत घटकर ₹2,206 करोड़ रह गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में ₹3,627 करोड़ था। हालाँकि, बैंक ने स्पष्ट किया कि यह गिरावट भ्रामक है — पिछले वर्ष के आँकड़े में एनएसडीएल में रणनीतिक निवेश की बिक्री से प्राप्त ₹1,699 करोड़ का एकमुश्त असाधारण लाभ शामिल था, जिसे हटाने पर वास्तविक शुद्ध लाभ में 14 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज हुई है।
मुख्य वित्तीय संकेतक
तिमाही आधार पर बैंक का प्रदर्शन सकारात्मक रहा — शुद्ध मुनाफा पिछली तिमाही के ₹2,115 करोड़ से 4 प्रतिशत बढ़ा। शुद्ध ब्याज आय (NII) सालाना आधार पर 28.7 प्रतिशत बढ़कर ₹4,227 करोड़ हो गई और तिमाही आधार पर इसमें 21 प्रतिशत का उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया।
शुद्ध ब्याज अंतर (NIM) सालाना आधार पर 3.71 प्रतिशत से बढ़कर 4.11 प्रतिशत हो गया, और यह पिछली तिमाही के 3.61 प्रतिशत की तुलना में 50 आधार अंक अधिक है — जो ऋण-मूल्य निर्धारण शक्ति में सुधार का संकेत है।
जमा और अग्रिम में मज़बूत वृद्धि
कुल जमा (डिपॉजिट) सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर ₹3,55,684 करोड़ हो गया, जो पहले ₹3,03,408 करोड़ था। नेट अग्रिम (Net Advances) 18 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹2,30,220 करोड़ से बढ़कर ₹2,71,533 करोड़ पहुँच गया। पिछली तिमाही की तुलना में डिपॉजिट में 9 प्रतिशत और अग्रिम में 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
चालू और बचत खाता जमा (CASA) सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़कर ₹1,55,877 करोड़ हो गया। CASA अनुपात 43.82 प्रतिशत रहा, जो पिछली तिमाही से 18 आधार अंक अधिक है।
परिचालन दक्षता में सुधार
लागत-से-आय अनुपात सितंबर तिमाही में सुधरकर 48.17 प्रतिशत पर आ गया, जो पिछली तिमाही से 385 आधार अंक कम है। डिपॉजिट की लागत भी पिछले वर्ष के 4.69 प्रतिशत से घटकर 4.55 प्रतिशत पर आ गई, जो निधि-लागत प्रबंधन में बेहतरी को दर्शाता है।
फेयरफैक्स को हिस्सेदारी बिक्री की मंजूरी
यह परिणाम ऐसे समय में आए हैं जब केंद्रीय कैबिनेट ने इसी सप्ताह फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी ₹52,878 करोड़ में बेचने की मंजूरी दी है। यह सौदा बैंक के निजीकरण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है और इसका दीर्घकालिक प्रशासनिक ढाँचे पर व्यापक असर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि आईडीबीआई बैंक का निजीकरण लंबे समय से विचाराधीन था और फेयरफैक्स सौदे की मंजूरी इस प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की दिशा में निर्णायक घटनाक्रम है। आने वाली तिमाहियों में स्वामित्व परिवर्तन के बाद बैंक की रणनीतिक प्राथमिकताओं पर बाज़ार की नज़र बनी रहेगी।