14 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आईडीबीआई बैंक में ₹52,878 करोड़ की हिस्सेदारी बिक्री को कैबिनेट की मंजूरी, फेयरफैक्स को 60.72% हिस्सा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आईडीबीआई बैंक में ₹52,878 करोड़ की हिस्सेदारी बिक्री को कैबिनेट की मंजूरी, फेयरफैक्स को 60.72% हिस्सा

सारांश

केंद्रीय कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक में 60.72% हिस्सेदारी ₹52,878 करोड़ में फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बेचने की मंजूरी दी — यह भारत के वित्तीय क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा FDI होगा। 2021 से चली आ रही निजीकरण प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर है।

मुख्य बातें

केंद्रीय कैबिनेट ने 14 अक्टूबर 2026 को आईडीबीआई बैंक में 60.72% हिस्सेदारी की बिक्री को मंजूरी दी।
सौदा फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स के साथ ₹52,878 करोड़ में; प्रति शेयर बोली ₹81 ।
बेची जाने वाली हिस्सेदारी में 30.48% सरकार की और 30.24% LIC की है।
सौदे के बाद सरकार की हिस्सेदारी 15% और LIC की करीब 19% रहेगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे 'रणनीतिक पुनर्गठन' कहा, विनिवेश नहीं।
RBI की नियामकीय मंजूरी के बाद ही अंतिम हस्तांतरण पूरा होगा।

केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री को औपचारिक मंजूरी दे दी। यह सौदा कनाडाई निवेश समूह फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की अनुषंगी कंपनी के साथ ₹52,878 करोड़ में तय हुआ है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह भारत के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) होगा।

सौदे की संरचना

इस लेनदेन में फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स आईडीबीआई बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी अधिग्रहित करेगी। इसमें 30.48 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार का और 30.24 प्रतिशत हिस्सा भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का है। सौदे का कुल मूल्य ₹52,878 करोड़ निर्धारित किया गया है।

सौदे के बाद सरकार की बैंक में हिस्सेदारी घटकर 15 प्रतिशत और LIC की करीब 19 प्रतिशत रह जाएगी। हालाँकि, दोनों संस्थाएँ बैंक में अपनी उपस्थिति बनाए रखेंगी।

मूल्यांकन और बोली प्रक्रिया

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, दो स्वतंत्र पेशेवर वैल्यूएशन एजेंसियों ने बैंक का उचित मूल्यांकन किया। दोनों एजेंसियों के आकलन का औसत ₹75.99 प्रति शेयर निकला, जिसे बेंचमार्क मूल्य माना गया। फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स ने ₹81 प्रति शेयर की सर्वोच्च बोली लगाई, जो बेंचमार्क से अधिक थी और इसी आधार पर इसे स्वीकार किया गया।

यह पूरी प्रक्रिया दो-चरणीय प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के तहत संपन्न हुई, जिसे अंतर-मंत्रालयी समूह (IMG), विनिवेश पर सचिवों का कोर समूह (CGD) और कैबिनेट मंत्रियों के अधिकार-प्राप्त समूह का बहु-स्तरीय अनुमोदन प्राप्त था।

सरकार की प्रतिक्रिया

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस लेनदेन को 'रणनीतिक विनिवेश' की बजाय 'रणनीतिक पुनर्गठन' के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार और LIC बैंक में अपनी-अपनी शेष हिस्सेदारी बनाए रखेंगे, जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग ढाँचे में राज्य की निरंतर भूमिका को रेखांकित करती है।

RBI की नियामकीय भूमिका

मंत्रालय ने बताया कि सफल बोलीकर्ता को 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EOI) चरण में किए गए 'फिट एंड प्रॉपर असेसमेंट' के अनुरूप भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के सामने अपनी योग्यता के प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। इसके साथ ही, निर्धारित नियामकीय शर्तों को पूरा करने का रोडमैप भी जमा करना आवश्यक होगा। यह प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात ही अंतिम हस्तांतरण संभव होगा।

आगे क्या होगा

RBI की अनुमोदन प्रक्रिया और नियामकीय अनुपालन पूरा होने के बाद यह सौदा अंतिम रूप लेगा। गौरतलब है कि आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की यह प्रक्रिया 2021 से चल रही थी और इसे कई बार विलंब का सामना करना पड़ा था। यह लेनदेन भारत के बैंकिंग और FDI परिदृश्य दोनों के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा RBI की अनुमोदन प्रक्रिया में होगी — फेयरफैक्स का 'फिट एंड प्रॉपर' मूल्यांकन और नियामकीय रोडमैप अभी बाकी है। यह भी उल्लेखनीय है कि सरकार और LIC मिलकर अभी भी 34% के करीब हिस्सेदारी रखेंगे, जो इसे पूर्ण निजीकरण की बजाय नियंत्रण-हस्तांतरण बनाता है — बैंक की प्रबंधकीय स्वायत्तता और दीर्घकालिक रणनीति पर इसका असर अभी देखा जाना बाकी है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईडीबीआई बैंक हिस्सेदारी बिक्री का सौदा क्या है?
केंद्रीय कैबिनेट ने 14 अक्टूबर 2026 को आईडीबीआई बैंक में 60.72% हिस्सेदारी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को ₹52,878 करोड़ में बेचने की मंजूरी दी। इसमें सरकार की 30.48% और LIC की 30.24% हिस्सेदारी शामिल है।
फेयरफैक्स ने प्रति शेयर कितनी बोली लगाई?
फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स ने ₹81 प्रति शेयर की बोली लगाई, जो दो स्वतंत्र वैल्यूएशन एजेंसियों द्वारा निर्धारित ₹75.99 प्रति शेयर के बेंचमार्क से अधिक है। इसी आधार पर बोली को उचित मानकर स्वीकार किया गया।
सौदे के बाद सरकार और LIC की आईडीबीआई बैंक में कितनी हिस्सेदारी रहेगी?
सौदे के बाद केंद्र सरकार की आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी घटकर 15% और LIC की करीब 19% रह जाएगी। दोनों संस्थाएँ बैंक में अल्पमत शेयरधारक के रूप में बनी रहेंगी।
क्या यह भारत के वित्तीय क्षेत्र का सबसे बड़ा FDI है?
वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, RBI की नियामकीय मंजूरी और प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह भारत के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) होगा। ₹52,878 करोड़ के इस सौदे को ऐतिहासिक माना जा रहा है।
सौदे को अंतिम रूप देने में अगला कदम क्या है?
फेयरफैक्स को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के समक्ष अपना 'फिट एंड प्रॉपर असेसमेंट' पूरा करना होगा और नियामकीय शर्तों का रोडमैप जमा करना होगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही हिस्सेदारी का अंतिम हस्तांतरण संभव होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले