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IDBI बैंक निजीकरण के विरोध में 2-3 नवंबर को देशव्यापी हड़ताल, फेयरफैक्स को बिक्री रोकने की माँग

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IDBI बैंक निजीकरण के विरोध में 2-3 नवंबर को देशव्यापी हड़ताल, फेयरफैक्स को बिक्री रोकने की माँग

सारांश

आईडीबीआई बैंक कर्मचारी यूनियन का फेयरफैक्स अधिग्रहण के खिलाफ 2-3 नवंबर को भूख हड़ताल का ऐलान — 51% सरकारी हिस्सेदारी की माँग और संसद के 2003 के आश्वासन का हवाला। माँगें न मानी गईं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी।

मुख्य बातें

आईडीबीआई बैंक की संयुक्त यूनियन ने 2 और 3 नवंबर 2026 को देशव्यापी दो दिवसीय भूख हड़ताल का ऐलान किया है।
विरोध कनाडा स्थित फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स ग्रुप को बैंक की प्रस्तावित बिक्री के खिलाफ है।
यूनियन ने माँग की है कि सरकार LIC से या खुले बाज़ार से 6% अतिरिक्त हिस्सेदारी ख़रीदकर सरकारी स्वामित्व 51% से ऊपर रखे।
यूनियन ने दिसंबर 2003 में संसद को दिए गए बहुमत हिस्सेदारी के आश्वासन का हवाला दिया।
कर्मचारियों ने पेंशन, आरक्षण नीति और सेवा शर्तों की सुरक्षा के लिए लिखित एवं कानूनी रूप से बाध्यकारी आश्वासन माँगे हैं।
माँगें न मानी गईं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की भी चेतावनी दी गई है।

आईडीबीआई बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों की संयुक्त यूनियन ने कनाडा स्थित फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स ग्रुप को बैंक की प्रस्तावित बिक्री के विरोध में 2 और 3 नवंबर 2026 को देशव्यापी दो दिवसीय भूख हड़ताल का ऐलान किया है। बैंक प्रबंधन को औपचारिक नोटिस सौंप दिया गया है और हड़ताल सभी शाखाओं एवं कार्यालयों में एक साथ आयोजित होगी।

हड़ताल की पृष्ठभूमि और माँगें

ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन और ऑल इंडिया इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन से मिलकर बनी इस यूनियन ने माँग की है कि केंद्र सरकार प्रस्तावित बिक्री तत्काल रोके। साथ ही सरकार भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) से या खुले बाज़ार के ज़रिये कम से कम 6 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी ख़रीदे, ताकि बैंक में सरकार का स्वामित्व न्यूनतम 51 प्रतिशत बना रहे।

यूनियन ने तर्क दिया है कि यह माँग दिसंबर 2003 में संसद में दिए गए उस सरकारी आश्वासन के अनुरूप है, जिसमें आईडीबीआई बैंक में बहुमत हिस्सेदारी बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई गई थी।

कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर चिंता

यूनियन ने सरकार और बैंक प्रबंधन से लिखित और कानूनी रूप से बाध्यकारी आश्वासन माँगे हैं। इसमें मौजूदा सेवा शर्तें, कल्याणकारी उपाय, पेंशन लाभ और आरक्षण नीतियाँ शामिल हैं।

यदि बिक्री आगे बढ़ती है, तो यूनियन ने माँग की है कि मौजूदा कर्मचारियों और अधिकारियों को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में स्थानांतरित होने का विकल्प दिया जाए — और उनकी सेवा अवधि, वेतनमान, वरिष्ठता तथा सेवानिवृत्ति लाभ पूरी तरह सुरक्षित रहें। बैंक में कार्यरत आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों को भी समायोजित करने की माँग रखी गई है।

निजीकरण के व्यापक असर की आशंका

यूनियन ने कहा कि बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार के बावजूद इस बिक्री से उसका सार्वजनिक क्षेत्र का स्वरूप प्रभावित होगा। यूनियन के अनुसार, निजीकरण का असर जमाकर्ताओं, किसानों, छोटे कर्जदारों और कर्मचारियों पर पड़ सकता है।

यूनियन ने यह भी रेखांकित किया कि आईडीबीआई बैंक ने औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब सरकार विनिवेश कार्यक्रम के तहत कई सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी कम करने की प्रक्रिया में है।

आगे क्या होगा

यूनियन ने बैंक कर्मचारियों, ट्रेड यूनियनों, ग्राहकों, जमाकर्ताओं और नागरिक समाज संगठनों से अपने आंदोलन का समर्थन करने की अपील की है। यूनियन ने स्पष्ट किया कि वह सरकार और बैंक प्रबंधन के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन चेतावनी दी है कि यदि माँगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज होगा — जिसमें दीर्घकालिक या अनिश्चितकालीन हड़ताल भी शामिल हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की सार्वजनिक क्षेत्र विनिवेश नीति पर गहराते सार्वजनिक असंतोष का प्रतिबिंब है। फेयरफैक्स जैसे विदेशी समूह को एक रणनीतिक बैंक सौंपने का विरोध उस समय और पैना हो जाता है जब बैंक खुद वित्तीय रूप से सुधरे हालत में है — यह सवाल उठता है कि आखिर बिक्री की जल्दबाज़ी क्यों। 2003 का संसदीय आश्वासन इस पूरे मामले में एक राजनीतिक और कानूनी दोनों आयाम जोड़ता है, जिसे सरकार आसानी से नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों का भविष्य इस सौदे में सबसे अनिश्चित है — और उनकी आवाज़ सबसे कम सुनी जाती है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईडीबीआई बैंक कर्मचारी हड़ताल क्यों कर रहे हैं?
कर्मचारी यूनियन कनाडा स्थित फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स ग्रुप को आईडीबीआई बैंक की प्रस्तावित बिक्री के विरोध में हड़ताल पर जा रही है। यूनियन का कहना है कि इस सौदे से बैंक का सार्वजनिक चरित्र नष्ट होगा और कर्मचारियों की नौकरी, पेंशन व आरक्षण पर संकट आएगा।
आईडीबीआई बैंक हड़ताल कब होगी?
यूनियन ने 2 और 3 नवंबर 2026 को देशव्यापी दो दिवसीय भूख हड़ताल का ऐलान किया है। यह हड़ताल बैंक की सभी शाखाओं और कार्यालयों में एक साथ आयोजित होगी।
यूनियन की प्रमुख माँगें क्या हैं?
यूनियन ने माँग की है कि सरकार प्रस्तावित बिक्री रोके और LIC से या खुले बाज़ार से कम से कम 6% अतिरिक्त हिस्सेदारी ख़रीदकर सरकारी स्वामित्व 51% से ऊपर रखे। इसके अलावा, पेंशन, आरक्षण नीति और सेवा शर्तों की सुरक्षा के लिए लिखित एवं कानूनी रूप से बाध्यकारी आश्वासन भी माँगे गए हैं।
फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स ग्रुप कौन है और आईडीबीआई बैंक से इसका क्या संबंध है?
फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स ग्रुप कनाडा स्थित एक बड़ा वित्तीय समूह है, जिसे केंद्र सरकार और LIC की आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बेचकर बैंक का प्रबंधन नियंत्रण सौंपने का प्रस्ताव है। इसी प्रस्ताव के खिलाफ कर्मचारी यूनियन आंदोलन कर रही है।
यदि माँगें नहीं मानी गईं तो यूनियन क्या करेगी?
यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और बैंक प्रबंधन उनकी माँगों का समाधान नहीं करते, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा — जिसमें दीर्घकालिक या अनिश्चितकालीन हड़ताल भी शामिल हो सकती है। यूनियन ने हालाँकि यह भी कहा है कि वह बातचीत के लिए तैयार है।
राष्ट्र प्रेस
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