1 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आईडीबीआई बैंक निजीकरण के खिलाफ 10,000 कर्मचारियों की 2-3 नवंबर को देशव्यापी हड़ताल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आईडीबीआई बैंक निजीकरण के खिलाफ 10,000 कर्मचारियों की 2-3 नवंबर को देशव्यापी हड़ताल

सारांश

आईडीबीआई बैंक के 10,000 से अधिक कर्मचारी 2-3 नवंबर को हड़ताल पर जा रहे हैं — उस बैंक को बचाने के बाद जिसे सरकार और LIC ने ₹46,000 करोड़ से उबारा। अब जब बैंक मुनाफे में है, तो कनाडा के फेयरफैक्स ग्रुप को इसे सौंपने की तैयारी पर कर्मचारियों का सवाल है: यह किसकी जीत है?

मुख्य बातें

आईडीबीआई बैंक के 10,000 से अधिक कर्मचारी निजीकरण के विरोध में 2 और 3 नवंबर 2026 को देशव्यापी हड़ताल पर जाएँगे।
हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज ने किया है।
सरकार और LIC ने बैंक को उबारने के लिए ₹46,000 करोड़ से अधिक की पूंजी सहायता दी थी।
बैंक का सकल NPA 31.78% (2018) से घटकर 2.30% पर आया; पिछले छह वर्षों में ₹30,100 करोड़ से अधिक का शुद्ध लाभ।
सरकार कथित तौर पर बैंक का नियंत्रण कनाडा के फेयरफैक्स ग्रुप को हस्तांतरित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
यूनियन ने बिक्री मूल्यांकन और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं।

यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज के आह्वान पर आईडीबीआई बैंक के 10,000 से अधिक कर्मचारी बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में 2 और 3 नवंबर 2026 को देशव्यापी दो दिवसीय हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं। कर्मचारी संगठन ने केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन से निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल वापस लेने की माँग की है।

हड़ताल की पृष्ठभूमि

आईडीबीआई बैंक को 2016 से 2020 के बीच भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की एसेट क्वालिटी रिव्यू प्रक्रिया के बाद भारी मात्रा में फंसे कर्ज (NPA) की पहचान के चलते गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा था। इस संकट से उबारने के लिए सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने मिलकर ₹46,000 करोड़ से अधिक की पूंजी सहायता उपलब्ध कराई थी।

कर्मचारी संगठन का तर्क है कि बैंक का यह पुनरुद्धार किसी निजी निवेश के कारण नहीं, बल्कि सरकार, LIC और बैंककर्मियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। उनके अनुसार, वित्तीय संकट के दौरान कर्मचारियों ने ग्राहकों का भरोसा बनाए रखा और परिचालन को सुचारु रखकर संस्थान को दोबारा मजबूत स्थिति में पहुँचाया।

बैंक की मौजूदा वित्तीय स्थिति

यूनियन के मुताबिक, पिछले छह वर्षों में बैंक ने ₹30,100 करोड़ से अधिक का संचयी शुद्ध लाभ दर्ज किया है। सकल NPA अनुपात 2018 के 31.78% से घटकर 2.30% पर आ गया है, जो उल्लेखनीय सुधार का संकेत है।

इसके अलावा, संगठन के अनुसार बैंक का नेट NPA अनुपात मात्र 0.16%, पूंजी पर्याप्तता अनुपात 26.38% और प्रोविजन कवरेज अनुपात 99.31% के स्तर पर पहुँच चुका है। संगठन का कहना है कि ये आँकड़े बैंक की सुदृढ़ वित्तीय स्थिति को रेखांकित करते हैं।

फेयरफैक्स ग्रुप को हस्तांतरण पर विवाद

इन सकारात्मक संकेतकों के बावजूद, केंद्र सरकार कथित तौर पर बैंक का नियंत्रण कनाडा के फेयरफैक्स ग्रुप को हस्तांतरित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कर्मचारी संगठन इस प्रस्ताव का लगातार विरोध करता आ रहा है। यूनियन ने बैंक के प्रस्तावित मूल्यांकन पर भी सवाल उठाए हैं और बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को लेकर चिंता जताई है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण को लेकर देशभर में बहस तेज है। आलोचकों का कहना है कि जनता के पैसे से पुनर्जीवित बैंक को निजी हाथों में सौंपना नीतिगत रूप से उचित नहीं है।

सरकार और प्रबंधन की प्रतिक्रिया

अभी तक केंद्र सरकार या आईडीबीआई बैंक प्रबंधन की ओर से हड़ताल की घोषणा पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। निजीकरण प्रक्रिया की समय-सीमा और अंतिम रूपरेखा अभी तक स्पष्ट नहीं की गई है।

आम जनता और बैंकिंग सेवाओं पर असर

दो दिवसीय हड़ताल के दौरान आईडीबीआई बैंक की शाखाओं में सामान्य बैंकिंग सेवाएँ प्रभावित हो सकती हैं। ग्राहकों को डिजिटल बैंकिंग और ATM सेवाओं का उपयोग करने की सलाह दी जा सकती है। यह हड़ताल उस व्यापक बहस को और तीव्र करती है कि सार्वजनिक धन से पुनर्जीवित संस्थाओं के विनिवेश में कर्मचारियों और जनहित को कितना महत्व दिया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ से पुनर्जीवित संस्था को विदेशी निजी समूह को सौंपने की तैयारी हो, तो 'किसके लिए टर्नअराउंड?' यह सवाल स्वाभाविक है। बैंक के मजबूत वित्तीय संकेतक — NPA 2.30%, प्रोविजन कवरेज 99.31% — यह तर्क कमज़ोर करते हैं कि निजीकरण 'मजबूरी' है। असली परीक्षा यह है कि सरकार बिक्री मूल्यांकन और फेयरफैक्स ग्रुप के चयन की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से संसद और जनता के सामने रखती है या नहीं — वरना यह विरोध सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईडीबीआई बैंक कर्मचारियों की हड़ताल कब और क्यों है?
आईडीबीआई बैंक के 10,000 से अधिक कर्मचारी 2 और 3 नवंबर 2026 को देशव्यापी हड़ताल पर जाएँगे। यह हड़ताल बैंक के प्रस्तावित निजीकरण और कनाडा के फेयरफैक्स ग्रुप को नियंत्रण हस्तांतरित करने के विरोध में बुलाई गई है।
आईडीबीआई बैंक का निजीकरण क्यों विवादास्पद है?
सरकार और LIC ने बैंक को संकट से उबारने के लिए ₹46,000 करोड़ से अधिक की पूंजी लगाई थी। अब जब बैंक मुनाफे में है और NPA घटकर 2.30% पर आ गया है, तो कर्मचारी संगठन का तर्क है कि इसे निजी हाथों में सौंपना जनहित के विरुद्ध है।
आईडीबीआई बैंक की मौजूदा वित्तीय स्थिति क्या है?
कर्मचारी संगठन के अनुसार, पिछले छह वर्षों में बैंक ने ₹30,100 करोड़ से अधिक का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। सकल NPA 2018 के 31.78% से घटकर 2.30% पर आ गया है और प्रोविजन कवरेज अनुपात 99.31% है।
फेयरफैक्स ग्रुप कौन है और इसे आईडीबीआई क्यों बेचा जा रहा है?
फेयरफैक्स ग्रुप कनाडा स्थित एक वित्तीय होल्डिंग कंपनी है। केंद्र सरकार कथित तौर पर आईडीबीआई बैंक में अपनी और LIC की हिस्सेदारी बेचकर इसका नियंत्रण फेयरफैक्स को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया में है, हालाँकि अंतिम सौदे की शर्तें और मूल्यांकन अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
हड़ताल के दौरान बैंकिंग सेवाएँ प्रभावित होंगी?
2 और 3 नवंबर को आईडीबीआई बैंक की शाखाओं में सामान्य बैंकिंग सेवाएँ प्रभावित हो सकती हैं। ग्राहकों को इन दो दिनों में डिजिटल बैंकिंग और ATM का उपयोग करना उचित रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले