अमित शाह के बयान पर एनडीए एकजुट: चुनाव आयोग पर सवाल उठाकर कांग्रेस फैला रही अराजकता
सारांश
मुख्य बातें
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित इंडी गठबंधन की रैली पर उठाए गए सवालों और कांग्रेस व राहुल गांधी पर किए गए तीखे हमले को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के तमाम नेताओं ने 1 नवंबर 2026 को एकस्वर से समर्थन दिया। एनडीए नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर बेबुनियाद सवाल उठाकर कांग्रेस देश में अराजकता का माहौल बना रही है।
उपेंद्र कुशवाहा की प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक मोर्चा के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि चुनाव आयोग को लेकर सारी बातें पहले ही स्पष्ट हो चुकी हैं, फिर भी इस मुद्दे पर आंदोलन की बात करना संस्थाओं को कमज़ोर करना है और देश के लिए नुकसानदेह है। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस विपक्ष में है, आंदोलन करना उसका पूरा अधिकार है, लेकिन किस मुद्दे पर और किस तरह आंदोलन करना है, इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।'
राजीव प्रताप रूडी का हमला
भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि कांग्रेस के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देकर की जाने वाली राजनीति को देश की जनता अराजकता के रूप में ही देखती है। रूडी के अनुसार इस तरह के कदमों से माहौल कांग्रेस के खिलाफ ही बनता जा रहा है।
दयाशंकर सिंह और मनोज कुमार पांडेय के तर्क
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दयाशंकर सिंह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी लोकतंत्र को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं और विदेशों में जाकर भी देश की छवि को नुकसान पहुँचाते हैं। उन्होंने गृह मंत्री शाह की नक्सलवाद के खिलाफ सफलता का हवाला देते हुए कहा कि नशे के खिलाफ उनका अभियान भी सफल होगा।
वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने वोट चोरी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यही लोग चुनाव आयोग के ज़रिये वर्षों तक सत्ता में रहे और हिमाचल प्रदेश, पंजाब, कर्नाटक तथा केरल में मिली जीत पर खुशियाँ मनाते हैं, लेकिन हार होने पर चुनाव आयोग पर उंगली उठाते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान की आड़ लेने वाले लोग आज संविधान का अपमान कर रहे हैं।
संस्थाओं पर हमले का व्यापक संदर्भ
यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब इंडी गठबंधन की रैली को लेकर सत्तारूढ़ और विपक्षी खेमे में तनातनी बढ़ी हुई है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना विपक्ष की पुरानी रणनीति रही है, परंतु एनडीए नेताओं का तर्क है कि इससे संवैधानिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कम होता है।
आगे क्या होगा
एनडीए का यह एकजुट रुख़ आगामी चुनावी माहौल में विपक्ष को घेरने की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता का मुद्दा आने वाले समय में सियासी बहस के केंद्र में बना रहेगा।