हरसिमरत कौर बादल का AAP और कांग्रेस पर हमला: '1984 नरसंहार पर आज तक माफी नहीं, पंजाब को लूटा गया'
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल (SAD) की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने 1 नवंबर 2026 को तलवंडी साबो स्थित तख्त श्री दमदमा साहिब में मत्था टेकने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) की भगवंत मान सरकार और कांग्रेस दोनों पर तीखे हमले बोले। उन्होंने AAP पर भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था के पतन और राज्य में नशीले पदार्थों के बेरोकटोक प्रसार का आरोप लगाया, साथ ही कांग्रेस पर 1984 के सिख-विरोधी दंगों के लिए कभी माफी न माँगने का आरोप जड़ा।
AAP सरकार पर सीधा वार
हरसिमरत कौर बादल ने केजरीवाल और उनके सहयोगियों पर निशाना साधते हुए कहा, 'केजरीवाल और उनके 40 चोरों ने पंजाब को लूटा है और उसका शोषण किया है। इन 40 लोगों ने यह संकेत दे दिया है कि पिछले पाँच सालों में पंजाब ने लूट, भ्रष्टाचार, सरकारी खजाने की लूट, हत्याओं और नशीले पदार्थों के कारण जो कुछ झेला है, अगर वे फिर से सत्ता में आते हैं तो यह सब अगले पाँच सालों तक और जारी रहेगा।'
उन्होंने अपील की कि जनता को अब सतर्क हो जाना चाहिए। बादल ने कहा, 'अगर पंजाब को बचाना है, तो लोगों को एकजुट होकर आम आदमी पार्टी को राज्य से पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में शुरू हो चुकी हैं।
1984 दंगों पर भावुक बयान
1984 के सिख-विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए हरसिमरत कौर बादल ने कहा, 'यह बहुत ही दर्दनाक है। दिल्ली में जो नरसंहार हुआ, उसे मैंने खुद अपनी आँखों से देखा था। उस समय हम भी दिल्ली में छोटे बच्चे थे, और हमने शहर के हालात देखे थे।' उनके ये शब्द व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित बयान के रूप में आए।
उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस बहुचर्चित बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि 'जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है।' बादल ने आरोप लगाया कि इस बयान का इस्तेमाल हिंसा को जायज़ ठहराने के लिए किया गया और लोगों को सिखों के विरुद्ध भड़काया गया।
कांग्रेस पर माफी न माँगने का आरोप
बादल ने कांग्रेस नेतृत्व और गांधी परिवार पर आरोप लगाया कि उन्होंने 1984 के दंगों में 'बेहद क्रूरता के साथ काम किया।' उनके अनुसार, सिख समुदाय आज भी न्याय और माफी की प्रतीक्षा में है, जो अब तक नहीं दी गई। गौरतलब है कि यह मसला दशकों से सिख राजनीति में संवेदनशील बिंदु रहा है और अकाली दल इसे बार-बार राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाता रहा है।
यह दिल्ली में कांग्रेस की एक बड़ी रैली के ठीक बाद का बयान था, जिसकी आलोचना करते हुए बादल ने कहा कि रैली का आयोजन करना और 1984 पर मौन रहना एक विरोधाभास है।
तख्त दमदमा साहिब का राजनीतिक संदर्भ
तख्त श्री दमदमा साहिब, जो सिखों के पाँच तख्तों में से एक है, पंजाब के बठिंडा जिले के तलवंडी साबो में स्थित है। यहाँ आकर राजनीतिक नेताओं का बयान देना परंपरागत रूप से सिख समुदाय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताने का प्रतीकात्मक तरीका माना जाता है। हरसिमरत कौर बादल की यह यात्रा और उसके साथ दिए गए बयान आगामी राजनीतिक सक्रियता के संकेत देते हैं।
आगे का राजनीतिक परिदृश्य
शिरोमणि अकाली दल, जो पंजाब में AAP सरकार के सामने मुख्य विपक्ष के रूप में खड़े होने की कोशिश कर रहा है, इस तरह के आक्रामक बयानों के ज़रिए जनाधार पुनर्निर्माण की रणनीति पर काम कर रहा है। बादल का यह बयान जनता से सीधे संवाद की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि SAD को अपनी पिछली सरकारों के कार्यकाल पर भी जवाब देना होगा।