होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी: रूट बदला तो वॉरशिप होंगे निशाने पर
सारांश
मुख्य बातें
ईरान ने 4 अगस्त 2026 को अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी युद्धपोत होर्मुज स्ट्रेट में तेहरान द्वारा निर्धारित शिपिंग कॉरिडोर से अलग रास्ता अपनाने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें निशाना बनाया जाएगा। ईरान के सुप्रीम लीडर के वरिष्ठ सलाहकार मोहसेन रेज़ाई ने यह भी कहा कि नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहने पर अमेरिकी जहाज़ों और ठिकानों पर हमले किए जाएंगे।
मुख्य घटनाक्रम
ईरान के सुप्रीम लीडर के वरिष्ठ सलाहकार मोहसेन रेज़ाई ने सोमवार को ईरान की सरकारी मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में कहा, 'हम दूसरा कॉरिडोर खुलने नहीं देंगे। अगर वे वॉरशिप भी तैनात करते हैं, तो भी हम उन्हें निशाना बनाएंगे।' रेज़ाई ने आगे कहा, 'अमेरिका के जहाज़ों और बेस को निश्चित रूप से गंभीर खतरा होगा। हम बैठकर अमेरिका को नौसेना की नाकेबंदी जारी रखते हुए नहीं देखेंगे।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जिससे होकर वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है।
ओमान के साथ कॉरिडोर समझौते की कोशिश
ईरान ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल ओमान के साथ केवल होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग के लिए एक अस्थायी रास्ते पर समझौता करने में जुटा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने तेहरान में एक न्यूज़ ब्रीफिंग में बताया कि यह व्यवस्था स्ट्रेट में शिपिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग उत्तरी और दक्षिणी रूट की जगह एक 'सिंगल इंटरमीडिएट कॉरिडोर' से लेगी, जिसे दोनों तटीय देशों के हितों और सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है।
हालाँकि, ओमान के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार सुबह से इस विषय पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है — न तो इन वार्ताओं की पुष्टि की और न ही खंडन किया।
ट्रंप की बातचीत की उम्मीद, ईरान का इनकार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगले एक-दो दिनों में बातचीत शुरू हो जाएगी। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी थी कि तेहरान के साथ नई योजनाबद्ध वार्ता ईरान के लिए खतरनाक हमलों से पहले समझौता करने का अंतिम अवसर है।
ईरान ने तत्काल नई वार्ता से इनकार करते हुए कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक अभी केवल ओमान के साथ होर्मुज़ शिपिंग व्यवस्था पर काम कर रहा है। यह ऐसे समय में है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीतिक गतिरोध बना हुआ है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
रणनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ईरान की यह चेतावनी महज़ कूटनीतिक दबाव की रणनीति हो सकती है, लेकिन होर्मुज़ स्ट्रेट पर किसी भी सैन्य टकराव की स्थिति में वैश्विक तेल बाज़ार और समुद्री व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है। आलोचकों का कहना है कि अमेरिका की नाकेबंदी की नीति और ईरान की जवाबी धमकियाँ मिलकर क्षेत्रीय अस्थिरता को और गहरा कर रही हैं।
आगे क्या होगा
फिलहाल सभी की निगाहें ओमान की आधिकारिक प्रतिक्रिया और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित वार्ता की दिशा पर टिकी हैं। यदि ओमान-मध्यस्थ कॉरिडोर समझौता आकार लेता है, तो यह तनाव को कुछ हद तक कम कर सकता है — लेकिन अमेरिकी नाकेबंदी और ईरानी धमकियों के बीच यह संतुलन कितना टिकाऊ होगा, यह देखना बाकी है।