18 जुलाई 2026
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तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर उपेंद्र कुशवाहा का हमला, बोले — 'आरजेडी बिखरती पार्टी, नेता कहीं दिखते नहीं'

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तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर उपेंद्र कुशवाहा का हमला, बोले — 'आरजेडी बिखरती पार्टी, नेता कहीं दिखते नहीं'

सारांश

बांकीपुर उपचुनाव से ठीक पहले उपेंद्र कुशवाहा ने तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी को सार्वजनिक मुद्दा बना दिया। मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे के बाद आरजेडी के भीतर असंतोष की खबरें और तेज़ हो गई हैं — यह बिहार विपक्ष के लिए एक नाज़ुक मोड़ है।

मुख्य बातें

उपेंद्र कुशवाहा ने 17 जुलाई 2026 को रोहतास में तेजस्वी यादव की सार्वजनिक गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए।
कुशवाहा ने आरजेडी को 'बिखरती पार्टी' बताया और कहा कि विपक्ष के नेता का पद जनता के प्रति जवाबदेही माँगता है।
आरजेडी के वरिष्ठ नेता व राज्य प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया, अपमान और उपेक्षा का हवाला देते हुए।
यह विवाद बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव और बिहार विधानसभा सत्र से ठीक पहले उभरा है।
आरजेडी की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने 17 जुलाई 2026 को रोहतास में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और उसके नेता तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला। कुशवाहा ने आरोप लगाया कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में तेजस्वी यादव सार्वजनिक जीवन से गायब हैं और बिहार के आम नागरिकों की समस्याओं से कटे हुए हैं।

मुख्य आरोप और बयान

कुशवाहा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'आरजेडी पहले से ही बिखरती हुई पार्टी है। संवैधानिक रूप से इसके नेता विधानसभा में विपक्ष के नेता का पद संभालते हैं, फिर भी वे कहीं दिखाई नहीं देते। जब नेता ही गायब हो तो पार्टी से क्या उम्मीद की जा सकती है?' उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष के नेता की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह सरकार की कमियों को उजागर करे और जनता के मुद्दे उठाए, लेकिन तेजस्वी यादव इस दायित्व से दूर हैं।

निजी स्वतंत्रता बनाम सार्वजनिक जवाबदेही

कुशवाहा ने यह ज़रूर स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की आवाजाही उसकी निजी स्वतंत्रता का विषय है, परंतु विपक्ष के नेता का संवैधानिक पद जनता के प्रति जवाबदेही की माँग करता है। उनके अनुसार, तेजस्वी यादव की लंबी गैरमौजूदगी उन्हें बिहार की जमीनी समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाने से रोकती है।

आरजेडी में अंदरूनी असंतोष

आरएलएम प्रमुख ने दावा किया कि आरजेडी के भीतर असंतोष चरम पर है और पार्टी कार्यकर्ता व नेता संगठन छोड़ रहे हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब आरजेडी के वरिष्ठ नेता और राज्य प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के करीबी माने जाने वाले तिवारी ने इस्तीफे में पार्टी के भीतर अपमान और उपेक्षा को कारण बताया।

बांकीपुर उपचुनाव का राजनीतिक संदर्भ

कुशवाहा की इन टिप्पणियों ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव और आगामी बिहार विधानसभा सत्र से पहले राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्ष दोनों ही इस महत्वपूर्ण उपचुनाव में अपनी स्थिति मज़बूत करने की कोशिश में लगे हैं। गौरतलब है कि बांकीपुर सीट पटना का एक प्रतिष्ठित शहरी क्षेत्र है और यहाँ का परिणाम दोनों पक्षों के लिए राजनीतिक संदेश देगा।

आगे क्या

आरजेडी की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे और कुशवाहा के हमले के बाद आरजेडी के लिए यह ज़रूरी हो गया है कि वह अपने संगठनात्मक ढाँचे को दुरुस्त करे और बांकीपुर उपचुनाव से पहले अपनी छवि को पुनर्जीवित करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह 2025 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में और गहरा होगा।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपेंद्र कुशवाहा ने तेजस्वी यादव पर क्या आरोप लगाए?
कुशवाहा ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव राजनीतिक दृश्य से गायब हैं और बिहार के आम नागरिकों की समस्याओं से कटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता का संवैधानिक पद जनता के प्रति जवाबदेही की माँग करता है, जो तेजस्वी पूरी नहीं कर रहे।
मृत्युंजय तिवारी ने आरजेडी से इस्तीफा क्यों दिया?
आरजेडी के वरिष्ठ नेता और राज्य प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते समय पार्टी के भीतर अपमान और उपेक्षा का हवाला दिया। वे लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के करीबी माने जाते थे।
बांकीपुर उपचुनाव का इस विवाद से क्या संबंध है?
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय है जब विपक्ष से सक्रिय भूमिका की अपेक्षा होती है। कुशवाहा ने इसी संदर्भ में तेजस्वी की गैरमौजूदगी को उठाया, जिससे आरजेडी की चुनावी तैयारी पर सवाल खड़े हो गए हैं।
आरजेडी में अंदरूनी संकट कितना गहरा है?
कुशवाहा के अनुसार, आरजेडी के भीतर असंतोष के कारण पार्टी कार्यकर्ता और नेता संगठन छोड़ रहे हैं। मृत्युंजय तिवारी का इस्तीफा इस दावे को बल देता है, हालाँकि आरजेडी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) और आरजेडी का बिहार की राजनीति में क्या रिश्ता है?
राष्ट्रीय लोक मोर्चा उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी है, जो बिहार में एनडीए की सहयोगी है और आरजेडी की मुख्य विरोधी। कुशवाहा पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे हैं और कुशवाहा समुदाय में उनका राजनीतिक प्रभाव है, जो आरजेडी के परंपरागत वोट आधार को प्रभावित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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