7 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ओवैसी की तेलंगाना सरकार से माँग: गरीबों को तुरंत जारी हो स्थायी निवास प्रमाण पत्र

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ओवैसी की तेलंगाना सरकार से माँग: गरीबों को तुरंत जारी हो स्थायी निवास प्रमाण पत्र

सारांश

AIMIM अध्यक्ष ओवैसी ने तेलंगाना कांग्रेस सरकार को आईना दिखाया — जब कर्नाटक में कांग्रेस पीआरसी जारी कर सकती है, तो तेलंगाना में क्यों नहीं? SIR के दौरान दस्तावेज़-विहीन गरीबों के मताधिकार पर मंडराता खतरा इस माँग को तात्कालिक बनाता है।

मुख्य बातें

AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने 6 जुलाई को तेलंगाना सरकार से गरीबों को तत्काल स्थायी निवास प्रमाण पत्र (पीआरसी) जारी करने की माँग की।
चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान दस्तावेज़-विहीन नागरिकों के मतदाता सूची से बाहर होने का खतरा है।
ओवैसी ने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ कांग्रेस सरकार पीआरसी जारी कर रही है, फिर तेलंगाना में देरी क्यों।
2002 की मतदाता सूची में नाम दर्ज नागरिकों और उनके परिजनों को पीआरसी देने का सुझाव दिया गया।
पीआरसी के लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड, स्कूल रिकॉर्ड और राजस्व रिकॉर्ड को आधार बनाने की सिफारिश।
ओवैसी ने उपमुख्यमंत्री मल्लु भट्टी विक्रमार्क से यह मुद्दा उठाया और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से मुलाकात का समय माँगा।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार, 6 जुलाई को तेलंगाना की कांग्रेस सरकार से राज्य के गरीब और दस्तावेज़-विहीन नागरिकों को तत्काल स्थायी निवास प्रमाण पत्र (पीआरसी) जारी करने की माँग की। उनका कहना है कि चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान इन नागरिकों के मतदाता सूची से बाहर होने का गंभीर खतरा है।

मुख्य मुद्दा: दस्तावेज़ और मताधिकार

ओवैसी ने स्पष्ट किया कि तेलंगाना में बड़ी संख्या में गरीब नागरिकों के पास वैध पहचान दस्तावेज़ नहीं हैं। उनके अनुसार, SIR प्रक्रिया के अंतर्गत जब मतदाता सूची का पुनरीक्षण होगा, तो ऐसे लोग अपना नाम सूची में दर्ज कराने में असमर्थ रहेंगे और उनका मताधिकार खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सत्ताधारी दल को यह एहसास नहीं है कि राज्य के गरीबों के पास दस्तावेज़ नहीं हैं, तो वह 'वास्तविकता से पूरी तरह कटी हुई है।'

कर्नाटक से तुलना और कांग्रेस पर सवाल

ओवैसी ने तेलंगाना सरकार को कर्नाटक का उदाहरण देते हुए घेरा। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में भी कांग्रेस की सरकार है और वहाँ पीआरसी जारी की जा रही है — फिर तेलंगाना में यह कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा? उन्होंने सत्ताधारी पार्टी को यह भी चेतावनी दी कि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद लोगों को 'सांत्वना' देने आने और 'साजिश' का आरोप लगाने से बेहतर है कि अभी समाधान निकाला जाए — और वह समाधान पीआरसी है।

पात्रता और दस्तावेज़ीकरण के मानदंड

ओवैसी ने पीआरसी जारी करने के लिए स्पष्ट मानदंड भी सुझाए। उनके अनुसार, तेलंगाना में जन्मे वे नागरिक जिनके अपने, या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी के नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज हैं, उन्हें पीआरसी दी जानी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश का भी हवाला दिया जिसके अनुसार राज्य के शिक्षण संस्थानों में लगातार चार वर्षों तक अध्ययन करने वाला व्यक्ति शिक्षा और रोज़गार के लिए पात्र माना जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार आधार कार्ड, राशन कार्ड, स्कूल रिकॉर्ड और राजस्व रिकॉर्ड को पीआरसी जारी करने का आधार बनाए।

सरकार से संपर्क की कोशिश

ओवैसी ने बताया कि वे यह मुद्दा पहले ही उपमुख्यमंत्री मल्लु भट्टी विक्रमार्क के समक्ष उठा चुके हैं। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से मुलाकात का समय माँगा है, हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि मुख्यमंत्री 'बहुत व्यस्त' हैं।

आगे की राह

यह माँग ऐसे समय में आई है जब SIR प्रक्रिया के तहत तेलंगाना में मतदाता सूची का पुनरीक्षण जारी है और हाशिये पर खड़े समुदायों में अपना नाम सूची से कटने की आशंका बढ़ रही है। यदि राज्य सरकार शीघ्र कदम नहीं उठाती, तो आलोचकों का मानना है कि बड़ी संख्या में गरीब नागरिक अगले चुनाव में अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी जड़ें गहरी राजनीतिक ज़मीन में हैं — SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची पुनरीक्षण पहले भी हाशिये के समुदायों को असंगत रूप से प्रभावित करते रहे हैं। कर्नाटक-तेलंगाना की तुलना तेलंगाना कांग्रेस के लिए असहज करने वाली है, क्योंकि दोनों राज्यों में एक ही पार्टी की सरकार है। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार पीआरसी को एक प्रशासनिक समाधान के रूप में देखती है या एक राजनीतिक दायित्व के रूप में — और यह देरी उसका जवाब खुद दे रही है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्थायी निवास प्रमाण पत्र (पीआरसी) क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?
पीआरसी एक सरकारी दस्तावेज़ है जो किसी राज्य में व्यक्ति के स्थायी निवास को प्रमाणित करता है। तेलंगाना में यह इसलिए अहम है क्योंकि SIR प्रक्रिया के दौरान बिना दस्तावेज़ वाले नागरिकों के मतदाता सूची से नाम कटने का जोखिम है।
ओवैसी ने पीआरसी के लिए कौन-से दस्तावेज़ आधार बनाने का सुझाव दिया?
ओवैसी ने सुझाव दिया कि सरकार आधार कार्ड, राशन कार्ड, स्कूल रिकॉर्ड और राजस्व रिकॉर्ड को पीआरसी जारी करने का आधार बनाए। साथ ही, 2002 की मतदाता सूची में नाम दर्ज नागरिकों और उनके परिजनों को भी पात्र माना जाए।
तेलंगाना में SIR (विशेष गहन संशोधन) क्या है?
SIR यानी विशेष गहन संशोधन एक प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाता है। इस दौरान अपात्र या अनुपस्थित नामों को हटाया जाता है, जिससे दस्तावेज़-विहीन नागरिकों के नाम कटने का खतरा बढ़ जाता है।
ओवैसी ने कर्नाटक का उदाहरण क्यों दिया?
ओवैसी ने बताया कि कर्नाटक में भी कांग्रेस की सरकार है और वहाँ पीआरसी जारी की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक ही पार्टी दोनों राज्यों में सत्ता में है, तो तेलंगाना में यह कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा।
ओवैसी ने इस मुद्दे पर तेलंगाना के किन नेताओं से बात की है?
ओवैसी ने यह मुद्दा उपमुख्यमंत्री मल्लु भट्टी विक्रमार्क के समक्ष पहले ही उठाया है। वे मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से भी मुलाकात का समय माँग रहे हैं, हालाँकि अभी तक बैठक नहीं हो पाई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 8 घंटे पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 3 दिन पहले
  4. 5 दिन पहले
  5. 5 दिन पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले