ओवैसी की तेलंगाना सरकार से माँग: गरीबों को तुरंत जारी हो स्थायी निवास प्रमाण पत्र
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार, 6 जुलाई को तेलंगाना की कांग्रेस सरकार से राज्य के गरीब और दस्तावेज़-विहीन नागरिकों को तत्काल स्थायी निवास प्रमाण पत्र (पीआरसी) जारी करने की माँग की। उनका कहना है कि चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान इन नागरिकों के मतदाता सूची से बाहर होने का गंभीर खतरा है।
मुख्य मुद्दा: दस्तावेज़ और मताधिकार
ओवैसी ने स्पष्ट किया कि तेलंगाना में बड़ी संख्या में गरीब नागरिकों के पास वैध पहचान दस्तावेज़ नहीं हैं। उनके अनुसार, SIR प्रक्रिया के अंतर्गत जब मतदाता सूची का पुनरीक्षण होगा, तो ऐसे लोग अपना नाम सूची में दर्ज कराने में असमर्थ रहेंगे और उनका मताधिकार खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सत्ताधारी दल को यह एहसास नहीं है कि राज्य के गरीबों के पास दस्तावेज़ नहीं हैं, तो वह 'वास्तविकता से पूरी तरह कटी हुई है।'
कर्नाटक से तुलना और कांग्रेस पर सवाल
ओवैसी ने तेलंगाना सरकार को कर्नाटक का उदाहरण देते हुए घेरा। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में भी कांग्रेस की सरकार है और वहाँ पीआरसी जारी की जा रही है — फिर तेलंगाना में यह कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा? उन्होंने सत्ताधारी पार्टी को यह भी चेतावनी दी कि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद लोगों को 'सांत्वना' देने आने और 'साजिश' का आरोप लगाने से बेहतर है कि अभी समाधान निकाला जाए — और वह समाधान पीआरसी है।
पात्रता और दस्तावेज़ीकरण के मानदंड
ओवैसी ने पीआरसी जारी करने के लिए स्पष्ट मानदंड भी सुझाए। उनके अनुसार, तेलंगाना में जन्मे वे नागरिक जिनके अपने, या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी के नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज हैं, उन्हें पीआरसी दी जानी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश का भी हवाला दिया जिसके अनुसार राज्य के शिक्षण संस्थानों में लगातार चार वर्षों तक अध्ययन करने वाला व्यक्ति शिक्षा और रोज़गार के लिए पात्र माना जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार आधार कार्ड, राशन कार्ड, स्कूल रिकॉर्ड और राजस्व रिकॉर्ड को पीआरसी जारी करने का आधार बनाए।
सरकार से संपर्क की कोशिश
ओवैसी ने बताया कि वे यह मुद्दा पहले ही उपमुख्यमंत्री मल्लु भट्टी विक्रमार्क के समक्ष उठा चुके हैं। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से मुलाकात का समय माँगा है, हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि मुख्यमंत्री 'बहुत व्यस्त' हैं।
आगे की राह
यह माँग ऐसे समय में आई है जब SIR प्रक्रिया के तहत तेलंगाना में मतदाता सूची का पुनरीक्षण जारी है और हाशिये पर खड़े समुदायों में अपना नाम सूची से कटने की आशंका बढ़ रही है। यदि राज्य सरकार शीघ्र कदम नहीं उठाती, तो आलोचकों का मानना है कि बड़ी संख्या में गरीब नागरिक अगले चुनाव में अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।