गृह लक्ष्मी योजना: भाजपा का दावा — 17 जिलों में 1.12 लाख महिलाएँ हटाई जाएंगी, कांग्रेस पर धोखे का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने गुरुवार, 11 जून को कांग्रेस सरकार पर 'गृह लक्ष्मी गारंटी योजना' की महिला लाभार्थियों के साथ धोखा करने का गंभीर आरोप लगाया। उनके अनुसार, राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही वेरिफिकेशन ड्राइव के चलते 17 जिलों में 1,12,092 महिलाओं को इस योजना से बाहर किए जाने की आशंका है। यह योजना घर की महिला मुखिया को हर महीने ₹2,000 का भत्ता प्रदान करती है।
मुख्य आरोप और भाजपा का पक्ष
अशोक ने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने बिना किसी शर्त के घर की महिला मुखिया को ₹2,000 प्रति माह देने का वादा किया था और उसी आधार पर मतदाताओं का भरोसा जीता था। उनका आरोप है कि सत्ता में आने के बाद कांग्रेस अब वेरिफिकेशन के नाम पर लाभार्थियों को योजना से बाहर करने की कोशिश कर रही है।
अशोक ने तीखे शब्दों में कहा, "चुनाव से पहले यह 'गृह लक्ष्मी' थी; चुनाव के बाद यह 'अयोग्य लक्ष्मी' बन गई है। यही कांग्रेस की गारंटियों का असली चेहरा है।"
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया पर सवाल
भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की उस प्रतिक्रिया की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। अशोक ने सवाल उठाया, "अगर मुख्यमंत्री कहते हैं कि उन्हें राज्य की 1.1 लाख महिलाओं के जीवन पर असर डालने वाले मामले के बारे में पता नहीं है, तो सरकार कौन चला रहा है?" यह टिप्पणी सरकार के भीतर समन्वय की कमी की ओर इशारा करती है।
बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन पर विवाद
अशोक ने आगे आरोप लगाया कि सरकार बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की प्रक्रियाओं के ज़रिए लाभार्थियों के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर रही है। उनके अनुसार, यह एक सुनियोजित पैटर्न है — चुनाव से पहले आर्थिक मदद का वादा, फिर अयोग्य लाभार्थियों की सूची तैयार करना और अब वेरिफिकेशन के नाम पर अड़चनें डालना।
भाजपा की माँग और राजनीतिक संदर्भ
अशोक ने कांग्रेस सरकार पर महिलाओं को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए माँग की कि सरकार इस अन्याय को तुरंत रोके और यह सुनिश्चित करे कि योग्य लाभार्थियों को बिना किसी उलझन के गृह लक्ष्मी योजना का लाभ मिले। गौरतलब है कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने इस योजना के तहत लाभार्थियों के पुनः सत्यापन का आदेश दिया है, जो इस विवाद की जड़ में है। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों का जवाब किस रूप में देती है और क्या वेरिफिकेशन प्रक्रिया में कोई बदलाव किया जाता है।