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गृह लक्ष्मी योजना: पति के आधार लिंक की शर्त पर भाजपा का हमला, कर्नाटक सरकार पर उत्पीड़न का आरोप

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गृह लक्ष्मी योजना: पति के आधार लिंक की शर्त पर भाजपा का हमला, कर्नाटक सरकार पर उत्पीड़न का आरोप

सारांश

कर्नाटक में गृह लक्ष्मी योजना के पुनः सत्यापन ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। BJP के आर. अशोक का आरोप है कि पति के आधार लिंक और 17 सवालों वाले फॉर्म जैसी नई शर्तें महिला लाभार्थियों को परेशान करने और योजना पर खर्च घटाने का साधन हैं।

मुख्य बातें

अशोक ने 23 सितंबर 2026 को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर गृह लक्ष्मी योजना लाभार्थियों को उत्पीड़ित करने का आरोप लगाया।
नई सत्यापन प्रक्रिया में 17 सवालों का फॉर्म, पति के आधार को लाभार्थी के आधार से लिंक करना और फेशियल वेरिफिकेशन शामिल है।
राज्य सरकार ने अगस्त 2026 के अंत में राज्यव्यापी पुनः सत्यापन अभियान शुरू किया, जिसका उद्देश्य मृत, डुप्लिकेट और अयोग्य लाभार्थियों को हटाना बताया गया।
अशोक का आरोप है कि सरकार ₹2,000 मासिक सहायता जारी रखने के लिए संसाधन नहीं जुटा पा रही, इसलिए लाभार्थियों की संख्या घटाने की कोशिश हो रही है।
BJP ने चेतावनी दी है कि नियम वापस न लिए गए तो राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन होगा।

कर्नाटक में गृह लक्ष्मी योजना के पुनः सत्यापन को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को राज्य की कांग्रेस सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि नई सत्यापन शर्तें लाभार्थी महिलाओं को अनावश्यक उत्पीड़न का शिकार बना रही हैं। विवाद की जड़ वह नई अनिवार्यता है जिसमें लाभार्थी के आधार कार्ड से उनके पति का आधार नंबर जोड़ने की शर्त शामिल है।

क्या है गृह लक्ष्मी योजना

गृह लक्ष्मी योजना कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की पाँच गारंटी योजनाओं में से एक है। इसके तहत घर की पात्र महिला मुखिया को हर महीने ₹2,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। चुनावी अभियान के दौरान कांग्रेस ने सभी महिलाओं को बिना किसी शर्त के यह राशि देने का वादा किया था, जो अब इस विवाद की केंद्रीय कड़ी बन गई है।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने अगस्त 2026 के अंत में राज्यव्यापी पुनः सत्यापन अभियान का आदेश जारी किया था, जिसका घोषित उद्देश्य मृत, डुप्लिकेट और अयोग्य लाभार्थियों की पहचान कर यह सुनिश्चित करना है कि सहायता राशि सही महिलाओं तक पहुँचे।

नई सत्यापन प्रक्रिया में क्या है

संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, सत्यापन फॉर्म में 17 सवाल हैं। डेटा संग्रह करने वाले सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर लाभार्थी की पहचान, परिवार का विवरण, आधार, मतदाता पहचान पत्र (EPIC) और बैंक खाते की जानकारी एकत्र कर रहे हैं।

इसके अलावा बायोमेट्रिक और फेशियल वेरिफिकेशन (चेहरे की पहचान) भी अनिवार्य की गई है। अशोक के अनुसार, नई शर्तों में परिवार के मुखिया या पति का आधार लिंक करना, लाभार्थी का नाम और पता आधार रिकॉर्ड से मिलान करना, तथा बिना किसी ऋण वाला आधार-लिंक्ड बैंक खाता रखना शामिल है।

भाजपा के आरोप और सवाल

अशोक ने कहा, 'कांग्रेस सरकार को कर्नाटक की माताओं के आत्मसम्मान पर इतना शक क्यों है? उन्हें दिए जाने वाले ₹2,000 के लिए इतनी परेशानी क्यों दी जा रही है?' उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इसलिए नई शर्तें लागू कर रही है क्योंकि वह इस योजना के लिए संसाधन नहीं जुटा पा रही और नई जाँच प्रक्रिया का असली मकसद लाभार्थियों की संख्या घटाकर खर्च में कटौती करना है।

अशोक ने सरकार से माँग की कि वह इन 'बेमतलब के नियमों' को तत्काल वापस ले और लाभार्थियों के घर बार-बार अधिकारियों को भेजना बंद करे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर नए नियम वापस नहीं लिए गए तो BJP महिलाओं के समर्थन में राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगी और कांग्रेस सरकार का 'असली चेहरा' जनता के सामने रखेगी।

सरकार का पक्ष और संदर्भ

राज्य सरकार का तर्क है कि यह सत्यापन अभियान पारदर्शिता और योजना की शुचिता बनाए रखने के लिए जरूरी है, ताकि सरकारी धन सही लाभार्थियों तक पहुँचे। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक सरकार की राजकोषीय स्थिति पर सवाल उठते रहे हैं और विभिन्न गारंटी योजनाओं के वित्त-पोषण को लेकर विधानसभा में बहस होती रही है।

हालाँकि, कर्नाटक सरकार की ओर से आर. अशोक के आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक खंडन सामने नहीं आया है।

आम महिलाओं पर असर

पुनः सत्यापन प्रक्रिया उन लाखों महिला लाभार्थियों को प्रभावित करती है जो इस योजना पर निर्भर हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ आधार अपडेट की सुविधा सीमित है या जहाँ महिलाएँ अकेले परिवार चलाती हैं, पति के आधार को अनिवार्य रूप से जोड़ने की शर्त व्यावहारिक कठिनाइयाँ पैदा कर सकती है। यह मामला आगे चलकर राज्य की सामाजिक कल्याण नीतियों और विपक्ष की आक्रामकता का केंद्र बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अकेले रहती हैं, या जिनके पति का आधार अपडेट नहीं है। BJP का राजनीतिक हमला तेज है, पर सरकार की चुप्पी इस मुद्दे को और बड़ा बना सकती है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गृह लक्ष्मी योजना क्या है और इसके तहत क्या मिलता है?
गृह लक्ष्मी योजना कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की पाँच गारंटी योजनाओं में से एक है, जिसके तहत घर की पात्र महिला मुखिया को हर महीने ₹2,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह योजना 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रमुख वादों में से एक थी।
नई सत्यापन प्रक्रिया में पति के आधार लिंक की शर्त क्यों जोड़ी गई है?
राज्य सरकार के अनुसार, पुनः सत्यापन अभियान का उद्देश्य मृत, डुप्लिकेट और अयोग्य लाभार्थियों की पहचान करना है। संशोधित दिशा-निर्देशों में परिवार के मुखिया या पति के आधार को लाभार्थी के आधार से लिंक करना इस प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है, हालाँकि सरकार ने इस शर्त पर अभी कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
BJP के आर. अशोक ने कर्नाटक सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया है कि सरकार नई सत्यापन शर्तों के जरिए लाभार्थियों की संख्या घटाना चाहती है, क्योंकि वह इस योजना के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं जुटा पा रही। उन्होंने नियम वापस न लिए जाने पर राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
पुनः सत्यापन से कौन-सी महिलाएँ सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं?
ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएँ, विधवाएँ, अकेले परिवार चलाने वाली महिलाएँ और वे महिलाएँ जिनके पति का आधार अपडेट नहीं है — ये सब नई शर्तों के कारण व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना कर सकती हैं। पति के आधार को अनिवार्य रूप से जोड़ने की शर्त ऐसे परिवारों के लिए समस्या बन सकती है।
पुनः सत्यापन प्रक्रिया कब शुरू हुई और इसमें क्या-क्या जानकारी माँगी जा रही है?
कर्नाटक सरकार ने अगस्त 2026 के अंत में राज्यव्यापी पुनः सत्यापन अभियान का आदेश जारी किया था। 17 सवालों वाले फॉर्म में लाभार्थी की पहचान, परिवार का विवरण, आधार, मतदाता पहचान पत्र, बैंक खाता, तथा बायोमेट्रिक एवं फेशियल वेरिफिकेशन शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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