गृह लक्ष्मी योजना: पति के आधार लिंक की शर्त पर भाजपा का हमला, कर्नाटक सरकार पर उत्पीड़न का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में गृह लक्ष्मी योजना के पुनः सत्यापन को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को राज्य की कांग्रेस सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि नई सत्यापन शर्तें लाभार्थी महिलाओं को अनावश्यक उत्पीड़न का शिकार बना रही हैं। विवाद की जड़ वह नई अनिवार्यता है जिसमें लाभार्थी के आधार कार्ड से उनके पति का आधार नंबर जोड़ने की शर्त शामिल है।
क्या है गृह लक्ष्मी योजना
गृह लक्ष्मी योजना कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की पाँच गारंटी योजनाओं में से एक है। इसके तहत घर की पात्र महिला मुखिया को हर महीने ₹2,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। चुनावी अभियान के दौरान कांग्रेस ने सभी महिलाओं को बिना किसी शर्त के यह राशि देने का वादा किया था, जो अब इस विवाद की केंद्रीय कड़ी बन गई है।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने अगस्त 2026 के अंत में राज्यव्यापी पुनः सत्यापन अभियान का आदेश जारी किया था, जिसका घोषित उद्देश्य मृत, डुप्लिकेट और अयोग्य लाभार्थियों की पहचान कर यह सुनिश्चित करना है कि सहायता राशि सही महिलाओं तक पहुँचे।
नई सत्यापन प्रक्रिया में क्या है
संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, सत्यापन फॉर्म में 17 सवाल हैं। डेटा संग्रह करने वाले सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर लाभार्थी की पहचान, परिवार का विवरण, आधार, मतदाता पहचान पत्र (EPIC) और बैंक खाते की जानकारी एकत्र कर रहे हैं।
इसके अलावा बायोमेट्रिक और फेशियल वेरिफिकेशन (चेहरे की पहचान) भी अनिवार्य की गई है। अशोक के अनुसार, नई शर्तों में परिवार के मुखिया या पति का आधार लिंक करना, लाभार्थी का नाम और पता आधार रिकॉर्ड से मिलान करना, तथा बिना किसी ऋण वाला आधार-लिंक्ड बैंक खाता रखना शामिल है।
भाजपा के आरोप और सवाल
अशोक ने कहा, 'कांग्रेस सरकार को कर्नाटक की माताओं के आत्मसम्मान पर इतना शक क्यों है? उन्हें दिए जाने वाले ₹2,000 के लिए इतनी परेशानी क्यों दी जा रही है?' उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इसलिए नई शर्तें लागू कर रही है क्योंकि वह इस योजना के लिए संसाधन नहीं जुटा पा रही और नई जाँच प्रक्रिया का असली मकसद लाभार्थियों की संख्या घटाकर खर्च में कटौती करना है।
अशोक ने सरकार से माँग की कि वह इन 'बेमतलब के नियमों' को तत्काल वापस ले और लाभार्थियों के घर बार-बार अधिकारियों को भेजना बंद करे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर नए नियम वापस नहीं लिए गए तो BJP महिलाओं के समर्थन में राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगी और कांग्रेस सरकार का 'असली चेहरा' जनता के सामने रखेगी।
सरकार का पक्ष और संदर्भ
राज्य सरकार का तर्क है कि यह सत्यापन अभियान पारदर्शिता और योजना की शुचिता बनाए रखने के लिए जरूरी है, ताकि सरकारी धन सही लाभार्थियों तक पहुँचे। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक सरकार की राजकोषीय स्थिति पर सवाल उठते रहे हैं और विभिन्न गारंटी योजनाओं के वित्त-पोषण को लेकर विधानसभा में बहस होती रही है।
हालाँकि, कर्नाटक सरकार की ओर से आर. अशोक के आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक खंडन सामने नहीं आया है।
आम महिलाओं पर असर
पुनः सत्यापन प्रक्रिया उन लाखों महिला लाभार्थियों को प्रभावित करती है जो इस योजना पर निर्भर हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ आधार अपडेट की सुविधा सीमित है या जहाँ महिलाएँ अकेले परिवार चलाती हैं, पति के आधार को अनिवार्य रूप से जोड़ने की शर्त व्यावहारिक कठिनाइयाँ पैदा कर सकती है। यह मामला आगे चलकर राज्य की सामाजिक कल्याण नीतियों और विपक्ष की आक्रामकता का केंद्र बन सकता है।