कर्नाटक 'गृह लक्ष्मी' विवाद: भाजपा नेता सी.टी. रवि का ₹5,000 करोड़ घोटाले का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता सी.टी. रवि ने 4 नवंबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर 'गृह लक्ष्मी' योजना में ₹5,000 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया है। उनके अनुसार, 1.27 करोड़ महिला लाभार्थियों को फरवरी-मार्च 2025 में देय राशि का भुगतान नहीं किया गया — और इस विफलता के लिए सरकार ने विधानसभा में अलग कारण और हाई कोर्ट में अलग कारण बताया।
आरोपों का मूल आधार
रवि ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा कि फरवरी और मार्च 2025 में राज्य सरकार 'गृह लक्ष्मी' योजना के तहत 1.27 करोड़ महिला लाभार्थियों को ₹5,000 करोड़ का भुगतान करने में विफल रही। जब कर्नाटक विधानसभा में इस विषय पर सवाल उठाए गए, तो सरकार ने 'सर्वर की समस्या' का हवाला दिया। किंतु जब यही मामला हाई कोर्ट में पहुँचा, तो सरकार ने हलफनामे में 'गंभीर वित्तीय संकट' को कारण बताया।
रवि ने इसे दोहरी भाषा करार देते हुए कहा कि सरकार ने विधानसभा में एक सफाई दी और न्यायालय में कुछ और — यह जनप्रतिनिधित्व की अवमानना है।
फंड ट्रांसफर पर गंभीर सवाल
भाजपा नेता ने फंड के हस्तांतरण को लेकर भी आरोप लगाए। उनके अनुसार, धनराशि को 'लैप्स' होने से बचाने के नाम पर 31 मार्च 2025 को सरकारी ट्रेजरी के डीबीटी सिस्टम से ₹2,660.26 करोड़ की सार्वजनिक राशि केएसडब्ल्यूडीसी कॉर्पोरेशन के एक कमर्शियल बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी गई। रवि का कहना है कि यह कदम स्वयं वित्तीय नियमों का उल्लंघन है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार का रुख यह है कि लाभार्थी महिलाओं को बकाया भुगतान न मिलने पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है — जिसे उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के सर्वथा विरुद्ध बताया।
भाजपा की चेतावनी
रवि ने स्पष्ट किया कि भाजपा कर्नाटक सरकार को इस मामले में 'आसानी से बच निकलने' नहीं देगी। उन्होंने कहा कि पार्टी राज्य की महिलाओं के साथ मजबूती से खड़ी है और तब तक संघर्ष जारी रखेगी जब तक लाभार्थियों को उनका पूरा बकाया नहीं मिल जाता।
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक सरकार पहले से ही अपनी कई गारंटी योजनाओं के वित्तपोषण को लेकर विपक्षी दबाव में है।
सरकार का पक्ष और पृष्ठभूमि
'गृह लक्ष्मी' योजना कांग्रेस सरकार की पाँच चुनावी गारंटियों में से एक है, जिसके तहत परिवार की मुखिया महिला को प्रतिमाह वित्तीय सहायता देने का वादा किया गया था। कर्नाटक सरकार की ओर से इन नवीनतम आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई। गौरतलब है कि इससे पहले सरकार ने कहा था कि योजना के क्रियान्वयन में तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियाँ आई हैं।
आने वाले दिनों में हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई और विधानसभा में विपक्ष के हमले, दोनों तेज होने के संकेत हैं।