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सिद्धारमैया स्टिंग विवाद: कर्नाटक भाजपा का दावा — 2028 चुनावों में भी कांग्रेस भुगतेगी खामियाजा

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सिद्धारमैया स्टिंग विवाद: कर्नाटक भाजपा का दावा — 2028 चुनावों में भी कांग्रेस भुगतेगी खामियाजा

सारांश

कर्नाटक में एमएलसी की चारों सीटें हारने के बाद कांग्रेस की अंदरूनी दरारें खुलकर सामने आ गई हैं। सिद्धारमैया और शिवकुमार खेमों की तीखी बयानबाजी के बीच भाजपा नेता अशोक ने दावा किया कि स्टिंग विवाद का साया 2028 के विधानसभा चुनावों तक कांग्रेस का पीछा करेगा।

मुख्य बातें

अशोक ने दावा किया कि सिद्धारमैया स्टिंग विवाद का असर 2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों पर भी पड़ेगा।
हालिया MLC चुनावों में कांग्रेस को चारों सीटों पर हार मिली; NDA ने सभी सीटें जीतीं — भाजपा को 3 , जेडी(एस) को 1 ।
कांग्रेस विधायक के.एन.
राजन्ना ने खुद माना कि स्टिंग विवाद ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचाया।
बालकृष्ण ने राजन्ना और उनके पुत्र पर पार्टी-विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया, अनुशासनात्मक कार्रवाई की माँग की।
भाजपा ने सरकार पर किसानों को धोखा, पेंशन बंद करने और दूध-बस किराया बढ़ाने के आरोप भी लगाए।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने 4 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की आंतरिक दरारों को सार्वजनिक कर दिया है। अशोक के अनुसार, इस विवाद का असर न केवल हाल के विधान परिषद (MLC) चुनावों में दिखा, बल्कि यह 2028 के विधानसभा चुनावों तक कांग्रेस का पीछा करता रहेगा।

स्टिंग विवाद और कांग्रेस की अंदरूनी कलह

अशोक ने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया के खिलाफ यह कथित स्टिंग ऑपरेशन कांग्रेस के ही कुछ नाराज नेताओं ने करवाया था। उन्होंने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थक और उनके मतदाता भी अब पार्टी से दूरी बना रहे हैं।

गौरतलब है कि कांग्रेस विधायक और सिद्धारमैया के करीबी सहयोगी के.एन. राजन्ना ने खुद स्वीकार किया कि स्टिंग विवाद से पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचा है, और संभव है कि एमएलसी चुनावों में खराब प्रदर्शन के पीछे यही एक कारण रहा हो। यह पार्टी के भीतर से आया बयान अशोक के आरोपों को और बल देता है।

एमएलसी चुनाव परिणाम और NDA की जीत

हाल ही में सम्पन्न विधान परिषद चुनावों में कर्नाटक की सत्ताधारी कांग्रेस को चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सभी चार सीटें जीतीं — भाजपा को तीन और जनता दल (सेकुलर) को एक सीट मिली।

इस हार के बाद मंगलवार को पार्टी के भीतर सिद्धारमैया और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के खेमों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस 2023 में बड़ी जीत के बाद शासन को लेकर बढ़ते असंतोष का सामना कर रही है।

शिवकुमार पर हमला और शासन के आरोप

अशोक ने मुख्यमंत्री शिवकुमार पर भी निशाना साधा और दावा किया कि कांग्रेस सरकार की आपसी खींचतान और इसकी नीतियाँ ही चुनावी हार की जड़ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बार-बार किसानों को धोखा दिया है, कमजोर वर्गों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों की पेंशन बंद कर दी गई है, और कई सरकारी विभागों को पर्याप्त बजट नहीं दिया गया।

इसके साथ ही उन्होंने राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि दूध और बस किराए में हुई बढ़ोतरी ने आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।

कांग्रेस के भीतर जवाबी आरोप

दूसरी ओर, शिवकुमार खेमे के समर्थक और नगर प्रशासन मंत्री एच.सी. बालकृष्ण ने राजन्ना और उनके पुत्र पर आरोप लगाया कि उन्होंने पार्टी उम्मीदवारों के प्रचार में सहयोग नहीं किया और पार्टी-विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे। बालकृष्ण ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की माँग की है।

यह आंतरिक विवाद दर्शाता है कि सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच नेतृत्व की खींचतान अभी थमी नहीं है। यह कर्नाटक कांग्रेस की पुरानी बीमारी — दो केंद्रों में बँटी सत्ता — का नया अध्याय है।

आगे क्या होगा

अशोक ने कहा कि जनता सरकार के खिलाफ अपना फैसला खुद सुनाएगी — उनके शब्दों में, 'आने वाले चुनावों में जनता एक ऑपरेशन चलाएगी और इस सरकार को सत्ता से बाहर कर देगी।' 2028 के विधानसभा चुनाव अभी दो साल दूर हैं, लेकिन एमएलसी नतीजों और बढ़ती आंतरिक कलह के बाद कांग्रेस के लिए नुकसान की भरपाई करना आसान नहीं होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह पार्टी के भीतर जवाबी आरोपों में बदल गई है — यह कर्नाटक कांग्रेस की संरचनागत समस्या है, कोई एकाकी घटना नहीं। सिद्धारमैया बनाम शिवकुमार की रस्साकशी 2023 की जीत के बाद से ही जारी है; स्टिंग प्रकरण ने बस उस घाव को सार्वजनिक किया। असली सवाल यह है कि क्या पार्टी नेतृत्व इस विवाद को शांत कर पाएगा या 2028 तक यह दोनों खेमों के बीच की दूरी और बढ़ाएगा। भाजपा के लिए यह राजनीतिक अवसर जरूर है, लेकिन उसे भी यह याद रखना होगा कि 2023 में जनता ने उसे ही सत्ता से बाहर किया था।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्धारमैया स्टिंग ऑपरेशन विवाद क्या है?
यह पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़ा एक कथित स्टिंग ऑपरेशन है, जिसने कर्नाटक कांग्रेस में आंतरिक कलह को सार्वजनिक कर दिया। भाजपा का आरोप है कि यह स्टिंग कांग्रेस के ही असंतुष्ट नेताओं ने करवाया था।
कर्नाटक MLC चुनावों में कांग्रेस की हार कितनी बड़ी रही?
हाल ही में हुए विधान परिषद चुनावों में सत्ताधारी कांग्रेस को चारों सीटों पर हार झेलनी पड़ी। NDA ने सभी चार सीटें जीतीं — भाजपा को तीन और जेडी(एस) को एक सीट मिली।
आर. अशोक ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा नेता आर. अशोक ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने किसानों को धोखा दिया, कमजोर वर्गों की पेंशन बंद की और वित्तीय प्रबंधन में गड़बड़ी की। उन्होंने यह भी कहा कि दूध और बस किराए में बढ़ोतरी ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ाई हैं।
कांग्रेस विधायक के.एन. राजन्ना ने स्टिंग विवाद पर क्या कहा?
सिद्धारमैया के करीबी सहयोगी और कांग्रेस विधायक के.एन. राजन्ना ने माना कि स्टिंग ऑपरेशन विवाद ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचाया है और संभवतः एमएलसी चुनावों में खराब प्रदर्शन में इसका योगदान रहा। उनके इस बयान के बाद शिवकुमार समर्थकों ने उन पर पार्टी-विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया।
क्या यह विवाद कर्नाटक के 2028 विधानसभा चुनावों को प्रभावित करेगा?
भाजपा का दावा है कि स्टिंग विवाद और कांग्रेस की आंतरिक कलह का असर 2028 के विधानसभा चुनावों तक बना रहेगा। हालाँकि 2028 के चुनाव अभी दो साल दूर हैं और इस दावे की पुष्टि अभी नहीं की जा सकती।
राष्ट्र प्रेस
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