सिद्धारमैया स्टिंग विवाद: कर्नाटक भाजपा का दावा — 2028 चुनावों में भी कांग्रेस भुगतेगी खामियाजा
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने 4 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की आंतरिक दरारों को सार्वजनिक कर दिया है। अशोक के अनुसार, इस विवाद का असर न केवल हाल के विधान परिषद (MLC) चुनावों में दिखा, बल्कि यह 2028 के विधानसभा चुनावों तक कांग्रेस का पीछा करता रहेगा।
स्टिंग विवाद और कांग्रेस की अंदरूनी कलह
अशोक ने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया के खिलाफ यह कथित स्टिंग ऑपरेशन कांग्रेस के ही कुछ नाराज नेताओं ने करवाया था। उन्होंने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थक और उनके मतदाता भी अब पार्टी से दूरी बना रहे हैं।
गौरतलब है कि कांग्रेस विधायक और सिद्धारमैया के करीबी सहयोगी के.एन. राजन्ना ने खुद स्वीकार किया कि स्टिंग विवाद से पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचा है, और संभव है कि एमएलसी चुनावों में खराब प्रदर्शन के पीछे यही एक कारण रहा हो। यह पार्टी के भीतर से आया बयान अशोक के आरोपों को और बल देता है।
एमएलसी चुनाव परिणाम और NDA की जीत
हाल ही में सम्पन्न विधान परिषद चुनावों में कर्नाटक की सत्ताधारी कांग्रेस को चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सभी चार सीटें जीतीं — भाजपा को तीन और जनता दल (सेकुलर) को एक सीट मिली।
इस हार के बाद मंगलवार को पार्टी के भीतर सिद्धारमैया और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के खेमों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस 2023 में बड़ी जीत के बाद शासन को लेकर बढ़ते असंतोष का सामना कर रही है।
शिवकुमार पर हमला और शासन के आरोप
अशोक ने मुख्यमंत्री शिवकुमार पर भी निशाना साधा और दावा किया कि कांग्रेस सरकार की आपसी खींचतान और इसकी नीतियाँ ही चुनावी हार की जड़ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बार-बार किसानों को धोखा दिया है, कमजोर वर्गों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों की पेंशन बंद कर दी गई है, और कई सरकारी विभागों को पर्याप्त बजट नहीं दिया गया।
इसके साथ ही उन्होंने राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि दूध और बस किराए में हुई बढ़ोतरी ने आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।
कांग्रेस के भीतर जवाबी आरोप
दूसरी ओर, शिवकुमार खेमे के समर्थक और नगर प्रशासन मंत्री एच.सी. बालकृष्ण ने राजन्ना और उनके पुत्र पर आरोप लगाया कि उन्होंने पार्टी उम्मीदवारों के प्रचार में सहयोग नहीं किया और पार्टी-विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे। बालकृष्ण ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की माँग की है।
यह आंतरिक विवाद दर्शाता है कि सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच नेतृत्व की खींचतान अभी थमी नहीं है। यह कर्नाटक कांग्रेस की पुरानी बीमारी — दो केंद्रों में बँटी सत्ता — का नया अध्याय है।
आगे क्या होगा
अशोक ने कहा कि जनता सरकार के खिलाफ अपना फैसला खुद सुनाएगी — उनके शब्दों में, 'आने वाले चुनावों में जनता एक ऑपरेशन चलाएगी और इस सरकार को सत्ता से बाहर कर देगी।' 2028 के विधानसभा चुनाव अभी दो साल दूर हैं, लेकिन एमएलसी नतीजों और बढ़ती आंतरिक कलह के बाद कांग्रेस के लिए नुकसान की भरपाई करना आसान नहीं होगा।