4 नवंबर 2026
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कदीमी मस्जिद विवाद: ओवैसी का केंद्र पर हमला, बोले 'सरकार को मस्जिद से एलर्जी है'

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कदीमी मस्जिद विवाद: ओवैसी का केंद्र पर हमला, बोले 'सरकार को मस्जिद से एलर्जी है'

सारांश

नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर में 1912 से पहले की कदीमी मस्जिद को सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के नाम पर हटाने की माँग ने नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। ओवैसी ने सरकार के धर्मनिरपेक्षता के तर्क को खोखला बताते हुए भूमि पूजा का हवाला दिया — मामला अब दिल्ली उच्च न्यायालय में है।

मुख्य बातें

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 4 नवंबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर केंद्र सरकार पर 'मस्जिद से एलर्जी' का आरोप लगाया।
केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर कृषि भवन परिसर स्थित कदीमी मस्जिद को हटाने की माँग की।
सरकार का तर्क है कि सरकारी परिसर में स्थायी धार्मिक ढाँचा धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के विरुद्ध है और यह सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में बाधक है।
कदीमी मस्जिद 1912 से भी पहले से उस स्थान पर मौजूद बताई जाती है, यानी कृषि भवन के निर्माण से भी पहले।
केंद्र ने बताया कि 2 किलोमीटर के दायरे में शाही मस्जिद जाब्तागंज उपलब्ध है, अतः परिसर में अलग मस्जिद की ज़रूरत नहीं।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने 4 नवंबर 2026 को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला, जब सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर स्थित 100 वर्ष पुरानी कदीमी मस्जिद को हटाने की माँग की। ओवैसी ने कहा कि सरकार को 'मस्जिद से एलर्जी है', और केंद्र के धर्मनिरपेक्षता संबंधी तर्क को खोखला बताया।

ओवैसी का एक्स पर पोस्ट और तर्क

असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया है कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) के पुनर्विकास के लिए कृषि भवन परिसर की कदीमी मस्जिद को हटाना अनिवार्य है।

उन्होंने अपने पोस्ट में सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा, 'मोदी सरकार ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का उद्घाटन भूमि पूजा के साथ किया। साफ है, सेक्युलरिज्म को किसी पब्लिक प्रोजेक्ट के लिए एक धर्म के रीति-रिवाजों के इस्तेमाल से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन उसे एक ऐसी मस्जिद से एलर्जी है जो 1912 से भी पहले से, कृषि भवन के बनने से बहुत पहले से वहाँ मौजूद है।'

केंद्र सरकार का हलफनामा: मुख्य तर्क

केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में दाखिल अपने हलफनामे में स्पष्ट किया है कि कृषि भवन और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट परिसर धर्मनिरपेक्ष सार्वजनिक प्रतिष्ठान हैं, जो विशेष रूप से सरकारी और प्रशासनिक कार्यों के लिए समर्पित हैं।

सरकार ने तर्क दिया कि किसी भी केंद्रीय सरकारी कार्यालय परिसर की सीमा के भीतर स्थायी धार्मिक ढाँचा स्थापित करना, बनाए रखना या उस पर दावा करना, सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के विपरीत है। साथ ही यह भी कहा गया कि CCS बिल्डिंग 4 और 5 का पुनर्विकास सेंट्रल विस्टा मास्टर प्लान का अहम हिस्सा है और मस्जिद की मौजूदगी इस राष्ट्रीय महत्व की परियोजना के क्रियान्वयन में बाधक है।

वैकल्पिक नमाज़ की सुविधा का दावा

अपने हलफनामे में केंद्र ने यह भी बताया कि कृषि भवन के आसपास दो किलोमीटर के दायरे में शाही मस्जिद जाब्तागंज स्थित है, जो आसपास के किसी भी व्यक्ति को नमाज़ की पूरी सुविधा देने में सक्षम है। सरकार का कहना है कि इसे देखते हुए परिसर के भीतर अलग मस्जिद की कोई आवश्यकता नहीं रहती।

ऐतिहासिक और कानूनी संदर्भ

गौरतलब है कि कदीमी मस्जिद की उपस्थिति 1912 से पहले की बताई जाती है, यानी यह इमारत कृषि भवन के निर्माण से भी पहले से उस भूखंड पर थी। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब सेंट्रल विस्टा परियोजना अपने विभिन्न चरणों में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रही है और देश में धार्मिक स्थलों और सरकारी भूमि के उपयोग को लेकर बहस जारी है। यह पहली बार नहीं है जब सेंट्रल विस्टा किसी विवाद के केंद्र में आया हो — इससे पहले भी इस परियोजना पर कई संवैधानिक और नागरिक चुनौतियाँ लगाई जा चुकी हैं।

आगे क्या होगा

मामला अब दिल्ली उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। अदालत दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद अपना निर्णय सुनाएगी। ओवैसी सहित विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों की नज़र इस मामले पर बनी हुई है, और इसका असर व्यापक धार्मिक-राजनीतिक विमर्श पर भी पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कानूनी दृष्टि से बचाव योग्य हो सकता है — लेकिन ओवैसी की यह काट कि उसी परियोजना का उद्घाटन भूमि पूजा से हुआ, राजनीतिक रूप से बेहद धारदार है। असली सवाल यह है कि जब मस्जिद कृषि भवन से भी पुरानी है, तो क्या उसे 'अवैध' कहना ऐतिहासिक तथ्यों के साथ न्याय करता है? दिल्ली उच्च न्यायालय को यह तय करना होगा कि राष्ट्रीय पुनर्निर्माण की ज़रूरत धार्मिक विरासत पर भारी पड़ती है या नहीं — और इस फैसले का असर सेंट्रल विस्टा तक सीमित नहीं रहेगा।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कदीमी मस्जिद विवाद क्या है?
नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर में स्थित 100 वर्ष से भी पुरानी कदीमी मस्जिद को केंद्र सरकार सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत हटाना चाहती है। सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि यह मस्जिद सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के विरुद्ध है।
ओवैसी ने केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए?
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सरकार ने सेंट्रल विस्टा का उद्घाटन भूमि पूजा से किया, लेकिन 1912 से भी पहले से मौजूद एक मस्जिद को 'नाजायज' बता रही है। उन्होंने इसे सरकार की 'मस्जिद से एलर्जी' बताया।
केंद्र सरकार ने मस्जिद हटाने के लिए क्या तर्क दिए हैं?
सरकार ने कहा है कि सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव एरिया की सार्वजनिक भूमि पर कोई स्थायी धार्मिक निर्माण नहीं हो सकता। साथ ही CCS बिल्डिंग 4 और 5 के पुनर्विकास के लिए मस्जिद की जगह की ज़रूरत है, और पास में शाही मस्जिद जाब्तागंज उपलब्ध है।
कदीमी मस्जिद कितनी पुरानी है और इसका इतिहास क्या है?
कदीमी मस्जिद 1912 से भी पहले से उस स्थान पर मौजूद बताई जाती है, यानी यह कृषि भवन के निर्माण से भी पहले वहाँ थी। इसकी ऐतिहासिक उपस्थिति ही इस विवाद का केंद्रीय बिंदु है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
मामला अब दिल्ली उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। अदालत दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद निर्णय सुनाएगी। इस फैसले का असर सेंट्रल विस्टा परियोजना की समयसीमा और धार्मिक स्थलों पर सरकारी नीति दोनों पर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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