उज्जैन शाही मस्जिद विवाद: वारिस पठान बोले — 'नफरत नहीं, प्यार से बनेगा विकसित भारत'
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने 28 सितंबर को मुंबई में उज्जैन की शाही मस्जिद से जुड़े विवाद पर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। पठान ने आरोप लगाया कि सरकार ने मुसलमानों के विरुद्ध 'ऑपरेशन मुस्लिम' और 'ऑपरेशन मस्जिद' जैसे अभियान शुरू कर दिए हैं। उनका कहना था कि विवादित मस्जिद करीब 600 साल पुरानी है और उसे हटाने की कोई भी कार्रवाई अनुचित है।
पठान के मुख्य आरोप
पठान ने कहा, 'क्या मस्जिदों और मदरसों को गिराने से भारत विकसित होगा? देश प्यार से आगे बढ़ेगा, नफरत से नहीं।' उन्होंने यह भी कहा कि 'मुसलमानों पर जुल्म करके भारत कभी विकसित नहीं बन पाएगा।' पठान के ये बयान उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण और कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद आए हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि यदि सड़क चौड़ी करना आवश्यक है, तो केवल मस्जिदों और मदरसों को नहीं, बल्कि अन्य स्थानों पर मौजूद सभी अवैध कब्जों पर भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की चयनात्मक कार्रवाई धार्मिक भेदभाव का संकेत देती है।
बातचीत और अदालत का हवाला
पठान ने दावा किया कि मस्जिद के इमाम और मुख्य काजी की ओर से प्रशासन के साथ बातचीत की गई थी और अदालत का रुख करने के लिए समय माँगा गया था। उनके अनुसार, बातचीत के दौरान यह भी कहा गया था कि यदि किसी हिस्से को अवैध कब्जा माना जाता है, तो उसे स्वयं हटाने पर विचार किया जा सकता है। इसके बावजूद पुलिस ने कार्रवाई की, जिस पर पठान ने गंभीर सवाल उठाए।
गौरतलब है कि उज्जैन में मस्जिद से जुड़ा यह विवाद सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद उभरा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक निर्माण कार्यों के बीच टकराव की खबरें सामने आ रही हैं।
चुनाव आयोग पर निशाना
मुंबई में दिए एक अन्य बयान में पठान ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाते हुए दावा किया कि उनके साथ काम कर रहे दो चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर 10 महीनों में 14 आपत्तियाँ दर्ज कराई थीं। पठान ने आरोप लगाया कि इन आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया गया और एकतरफा आदेश पारित किए गए।
उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि लोगों में यह धारणा बन रही है कि मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई, जिसके कारण मौजूदा राजनीतिक समस्याएँ पैदा हुईं। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक विरोध
पठान ने यह भी कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को गांधीवादी तरीके से विरोध प्रकट करने का अधिकार देता है और लोगों को लोकतांत्रिक ढंग से अपनी बात रखनी चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब AIMIM लगातार मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों पर सरकार के रुख को चुनौती देती रही है।
आने वाले दिनों में उज्जैन मस्जिद मामले में अदालती कार्यवाही की संभावना है, जो इस विवाद की दिशा तय करेगी।