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उज्जैन शाही मस्जिद विवाद: वारिस पठान बोले — 'नफरत नहीं, प्यार से बनेगा विकसित भारत'

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उज्जैन शाही मस्जिद विवाद: वारिस पठान बोले — 'नफरत नहीं, प्यार से बनेगा विकसित भारत'

सारांश

उज्जैन की करीब 600 साल पुरानी शाही मस्जिद पर हुई कार्रवाई को लेकर AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने BJP सरकार पर 'ऑपरेशन मुस्लिम' और 'ऑपरेशन मस्जिद' का आरोप लगाया। उनका कहना है कि नफरत से नहीं, प्यार से ही विकसित भारत बनेगा — और इमाम-काजी से बातचीत के बावजूद पुलिस कार्रवाई हुई।

मुख्य बातें

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने 28 सितंबर को मुंबई में उज्जैन शाही मस्जिद विवाद पर केंद्र सरकार और BJP की आलोचना की।
पठान ने आरोप लगाया कि सरकार ने 'ऑपरेशन मुस्लिम' और 'ऑपरेशन मस्जिद' शुरू किए हैं।
विवादित मस्जिद कथित तौर पर करीब 600 साल पुरानी है; मस्जिद के इमाम और मुख्य काजी ने प्रशासन से बातचीत कर अदालत जाने के लिए समय माँगा था।
पठान ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी आरोप लगाए — दावा किया कि 10 महीनों में 14 आपत्तियाँ दर्ज हुईं पर उन पर ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने संविधान के तहत गांधीवादी तरीके से विरोध के अधिकार की वकालत की।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने 28 सितंबर को मुंबई में उज्जैन की शाही मस्जिद से जुड़े विवाद पर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। पठान ने आरोप लगाया कि सरकार ने मुसलमानों के विरुद्ध 'ऑपरेशन मुस्लिम' और 'ऑपरेशन मस्जिद' जैसे अभियान शुरू कर दिए हैं। उनका कहना था कि विवादित मस्जिद करीब 600 साल पुरानी है और उसे हटाने की कोई भी कार्रवाई अनुचित है।

पठान के मुख्य आरोप

पठान ने कहा, 'क्या मस्जिदों और मदरसों को गिराने से भारत विकसित होगा? देश प्यार से आगे बढ़ेगा, नफरत से नहीं।' उन्होंने यह भी कहा कि 'मुसलमानों पर जुल्म करके भारत कभी विकसित नहीं बन पाएगा।' पठान के ये बयान उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण और कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद आए हैं।

उन्होंने तर्क दिया कि यदि सड़क चौड़ी करना आवश्यक है, तो केवल मस्जिदों और मदरसों को नहीं, बल्कि अन्य स्थानों पर मौजूद सभी अवैध कब्जों पर भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की चयनात्मक कार्रवाई धार्मिक भेदभाव का संकेत देती है।

बातचीत और अदालत का हवाला

पठान ने दावा किया कि मस्जिद के इमाम और मुख्य काजी की ओर से प्रशासन के साथ बातचीत की गई थी और अदालत का रुख करने के लिए समय माँगा गया था। उनके अनुसार, बातचीत के दौरान यह भी कहा गया था कि यदि किसी हिस्से को अवैध कब्जा माना जाता है, तो उसे स्वयं हटाने पर विचार किया जा सकता है। इसके बावजूद पुलिस ने कार्रवाई की, जिस पर पठान ने गंभीर सवाल उठाए।

गौरतलब है कि उज्जैन में मस्जिद से जुड़ा यह विवाद सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद उभरा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक निर्माण कार्यों के बीच टकराव की खबरें सामने आ रही हैं।

चुनाव आयोग पर निशाना

मुंबई में दिए एक अन्य बयान में पठान ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाते हुए दावा किया कि उनके साथ काम कर रहे दो चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर 10 महीनों में 14 आपत्तियाँ दर्ज कराई थीं। पठान ने आरोप लगाया कि इन आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया गया और एकतरफा आदेश पारित किए गए।

उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि लोगों में यह धारणा बन रही है कि मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई, जिसके कारण मौजूदा राजनीतिक समस्याएँ पैदा हुईं। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक विरोध

पठान ने यह भी कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को गांधीवादी तरीके से विरोध प्रकट करने का अधिकार देता है और लोगों को लोकतांत्रिक ढंग से अपनी बात रखनी चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब AIMIM लगातार मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों पर सरकार के रुख को चुनौती देती रही है।

आने वाले दिनों में उज्जैन मस्जिद मामले में अदालती कार्यवाही की संभावना है, जो इस विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उज्जैन मामले में असली सवाल प्रशासनिक प्रक्रिया का है — क्या अदालत जाने का समय माँगने के बावजूद कार्रवाई उचित थी? 'ऑपरेशन मस्जिद' जैसे आरोप बिना सत्यापित साक्ष्य के गंभीर दावे हैं, जिन्हें मुख्यधारा की कवरेज अक्सर बिना पर्याप्त जाँच के प्रसारित कर देती है। दूसरी तरफ, सड़क चौड़ीकरण में चयनात्मक कार्रवाई का आरोप भी उतना ही महत्वपूर्ण है — यदि अन्य धर्मों के अतिक्रमण अछूते रहते हैं तो यह कानूनी और संवैधानिक प्रश्न खड़ा करता है। चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोप एक अलग और गंभीर मुद्दा हैं, जिन्हें मस्जिद विवाद के साथ जोड़कर देखना दोनों मुद्दों की जटिलता को कम करता है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उज्जैन शाही मस्जिद विवाद क्या है?
उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण और कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान एक शाही मस्जिद को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है। AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान के अनुसार यह मस्जिद करीब 600 साल पुरानी है और इसे हटाने की कार्रवाई अनुचित है।
वारिस पठान ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
पठान ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और BJP ने मुसलमानों के विरुद्ध 'ऑपरेशन मुस्लिम' और 'ऑपरेशन मस्जिद' शुरू किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केवल मस्जिदों और मदरसों को निशाना बनाना भेदभावपूर्ण है और अन्य अवैध कब्जों पर भी समान कार्रवाई होनी चाहिए।
क्या मस्जिद प्रशासन ने सरकार से बातचीत की थी?
पठान के दावे के अनुसार, मस्जिद के इमाम और मुख्य काजी ने प्रशासन से बातचीत की थी और अदालत जाने के लिए समय माँगा था। बातचीत में यह भी कहा गया था कि यदि कोई हिस्सा अवैध माना जाए तो उसे स्वयं हटाने पर विचार किया जा सकता है, फिर भी पुलिस कार्रवाई हुई।
पठान ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
पठान ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया कि उनके साथ काम कर रहे दो चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर 10 महीनों में 14 आपत्तियाँ दर्ज कराई थीं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया और एकतरफा आदेश पारित किए गए। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
उज्जैन मस्जिद मामले में अदालती कार्यवाही की संभावना है, क्योंकि मस्जिद प्रशासन ने न्यायिक राहत लेने का संकेत दिया था। AIMIM इस मुद्दे को राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर उठाती रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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