रणबीर कपूर ने बताया: कपूर खानदान में पीढ़ियों से क्यों नहीं होती बेटों की तारीफ?
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर ने 4 नवंबर 2026 को टीवी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत के दौरान कपूर परिवार की एक ऐसी पीढ़ियों पुरानी परंपरा का खुलासा किया, जिसमें पिता जानबूझकर अपने बेटों के काम की खुलकर तारीफ नहीं करते। इसके पीछे मकसद बेटों को आत्मसंतुष्टि से दूर रखकर निरंतर बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना है। रणबीर ने इस सिलसिले में अपने परदादा पृथ्वीराज कपूर और दादा राज कपूर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया।
राज कपूर की किताब से निकली कहानी
रणबीर ने बताया कि उन्होंने यह किस्सा राज कपूर की किताब में पढ़ा था। एक बार राज कपूर ने अपने पिता पृथ्वीराज कपूर से पूछा था कि जब वे इतने बड़े स्टार बन चुके हैं और फिल्मों में इतना अच्छा काम कर रहे हैं, तो पिता कभी उनकी तारीफ क्यों नहीं करते — यहाँ तक कि पीठ थपथपाकर शाबाशी भी नहीं देते।
रणबीर ने कहा, 'मैंने यह कहानी राज कपूर की किताब में पढ़ी थी। एक बार राज कपूर ने अपने पिता पृथ्वीराज कपूर से पूछा था कि जब उनका बेटा आज इतना बड़ा स्टार बन चुका है और फिल्मों में इतना अच्छा काम कर रहा है, तो वे कभी उनकी तारीफ क्यों नहीं करते? यहाँ तक कि कभी पीठ थपथपाकर शाबाशी भी नहीं देते।'
पृथ्वीराज कपूर की गहरी सीख
रणबीर के अनुसार, इस सवाल के जवाब में पृथ्वीराज कपूर ने राज कपूर को एक छोटे बच्चे की कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि एक छोटा लड़का सड़क किनारे रस्सी पर संतुलन बनाकर करतब दिखाता था और रोज़ बड़ी संख्या में लोग उसका प्रदर्शन देखने आते, तालियाँ बजाते और पैसे देते। लेकिन हर बार करतब खत्म होने पर जब वह बच्चा पिता के पास अपना प्रदर्शन जानने जाता, तो पिता का एक ही जवाब होता — 'कसर रह गई।'
रणबीर ने बताया कि कई सालों तक यही क्रम चलता रहा। एक दिन बच्चे ने पिता से पूछ ही लिया कि जब सब लोग उसकी इतनी तारीफ करते हैं, तो पिता हमेशा कमी ही क्यों निकालते हैं? इस पर पिता ने जवाब दिया — 'बेटा, जिस दिन मैं तुम्हारी तारीफ करना शुरू कर दूंगा, उस दिन तुम्हारा लक्ष्य और ध्यान अपने काम से हट जाएगा। तुम अपनी मंज़िल पर पहुँचने के बजाय तारीफ में ही खो जाओगे।'
कपूर परिवार की विरासत और यह परंपरा
रणबीर ने कहा कि कपूर परिवार में बच्चों को कामयाबी के बाद भी लगातार मेहनत करते रहने की सीख दी जाती रही है। परिवार के बड़े तारीफ और वाहवाही के बजाय काम को बेहतर बनाने पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करते रहे हैं।
गौरतलब है कि कपूर परिवार को भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली फिल्मी परिवारों में गिना जाता है। इस विरासत की नींव पृथ्वीराज कपूर ने रखी, जिन्होंने भारतीय थिएटर और सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। इसके बाद उनके बेटों राज कपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर ने इस विरासत को आगे बढ़ाया।
राज कपूर ने अभिनेता होने के साथ-साथ निर्देशक और निर्माता के रूप में भी हिंदी सिनेमा को कई यादगार फिल्में दीं। उनके बाद रणधीर कपूर, ऋषि कपूर और राजीव कपूर ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा। आगे की पीढ़ी में करिश्मा कपूर, करीना कपूर खान और रणबीर कपूर ने इस शानदार सिनेमाई परंपरा को जीवित रखा है।
आम जनता पर असर
यह किस्सा केवल एक फिल्मी परिवार की परंपरा नहीं है — यह पेरेंटिंग और प्रेरणा की एक सार्वभौमिक सोच को दर्शाता है। रणबीर की इस साझेदारी ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है, जहाँ लोग इस 'तारीफ-मुक्त प्रेरणा' के दर्शन पर अपने विचार रख रहे हैं।
यह इस मायने में भी दिलचस्प है कि जहाँ आज का दौर तत्काल प्रशंसा और सोशल मीडिया वैलिडेशन का है, वहाँ कपूर परिवार की यह पुरानी परंपरा एक अलग और गहरी सोच का प्रतिनिधित्व करती है।