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राजीव कपूर जयंती: जिन्हें 'फ्लॉप' कहा गया, ऋषि कपूर ने बताया था तीनों भाइयों में 'सबसे टैलेंटेड'

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राजीव कपूर जयंती: जिन्हें 'फ्लॉप' कहा गया, ऋषि कपूर ने बताया था तीनों भाइयों में 'सबसे टैलेंटेड'

सारांश

दुनिया उन्हें 'राज कपूर का फ्लॉप बेटा' कहती रही, लेकिन ऋषि कपूर की नज़र में राजीव तीनों भाइयों में सबसे प्रतिभाशाली थे — पियानो, एडिटिंग और कहानी की समझ से लैस एक कलाकार, जिसे शायद सही मंच कभी नहीं मिला। 25 अगस्त को उनकी जयंती पर यह सवाल फिर उठता है।

मुख्य बातें

राजीव कपूर का जन्म 25 अगस्त 1962 को मुंबई में हुआ; परिवार में उन्हें 'चिंपू' कहा जाता था।
ऋषि कपूर ने आत्मकथा 'खुल्लम खुल्ला' में राजीव को रणधीर और ऋषि दोनों से अधिक प्रतिभाशाली बताया।
राजीव ने बिना औपचारिक शिक्षा के पियानो बजाया और फिल्म एडिटिंग में स्वाभाविक दक्षता दिखाई।
सबसे बड़ी सफलता 1985 की फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' से मिली, जो राज कपूर की अंतिम निर्देशित फिल्म थी।
1996 में निर्देशित 'प्रेम ग्रंथ' सफल नहीं रही; धीरे-धीरे फिल्मों से दूरी बन गई।
निधन 9 फरवरी 2021 को 58 वर्ष की आयु में हुआ।

राजीव कपूर — कपूर खानदान का वह नाम, जिसे बॉलीवुड की दुनिया ने अक्सर राज कपूर के 'असफल बेटे' के रूप में याद किया — आज 25 अगस्त को अपनी 63वीं जयंती पर एक अलग नज़रिए से याद किए जा रहे हैं। उनके बड़े भाई और दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा में राजीव को तीनों कपूर भाइयों में सबसे अधिक प्रतिभाशाली बताया था — एक ऐसा खुलासा जो मुख्यधारा की चर्चा में अक्सर दब जाता है।

कपूर खानदान में एक अलग पहचान

हिंदी सिनेमा के इतिहास में कपूर परिवार का योगदान अतुलनीय रहा है। पृथ्वीराज कपूर से शुरू हुई यह विरासत राज कपूर के 'शोमैन' के रूप में अपने शिखर पर पहुँची और फिर रणधीर कपूर, ऋषि कपूर, करिश्मा कपूर, करीना कपूर और रणबीर कपूर के ज़रिए आगे बढ़ती रही। इसी परिवार में राजीव कपूर का जन्म 25 अगस्त 1962 को मुंबई में हुआ। परिवार में उन्हें प्यार से 'चिंपू' पुकारा जाता था।

ऋषि कपूर की आत्मकथा में राजीव का असली चित्र

ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा 'खुल्लम खुल्ला: ऋषि कपूर अनसेंसर्ड' में राजीव के बारे में जो लिखा, वह उनकी सार्वजनिक छवि से बिल्कुल अलग था। ऋषि के अनुसार, राजीव में प्रतिभा की कोई कमी नहीं थी — बल्कि वह रणधीर और ऋषि, दोनों से अधिक प्रतिभाशाली थे। ऋषि ने लिखा कि उन्हें हमेशा अपने छोटे भाई की चिंता रहती थी, क्योंकि राजीव कभी अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाए।

ऋषि कपूर के अनुसार, राजीव ने संगीत की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी, फिर भी वे पियानो बेहद कुशलता से बजाते थे। इसके अलावा उनमें फिल्म एडिटिंग की स्वाभाविक समझ थी। जब ऋषि कपूर ने 1999 में फिल्म 'आ अब लौट चलें' का निर्देशन किया, तब राजीव ने उसकी एडिटिंग में सक्रिय भूमिका निभाई। ऋषि का मानना था कि यदि राजीव ने एडिटिंग को अपना मुख्य क्षेत्र बनाया होता, तो वे उस विधा में बड़ा नाम कमा सकते थे।

फिल्मी करियर: एक बड़ी सफलता, फिर लंबा संघर्ष

राजीव कपूर को बड़े पर्दे पर सबसे बड़ी पहचान 1985 में आई फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' से मिली। यह उनके पिता राज कपूर द्वारा निर्देशित अंतिम फिल्म थी, जिसमें राजीव मुख्य भूमिका में थे। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता रही। गौरतलब है कि यह सफलता उनके लिए एक साथ वरदान और अभिशाप दोनों साबित हुई — पिता की छाया में मिली इस कामयाबी के बाद स्वतंत्र पहचान बनाना कठिन हो गया।

इसके बाद 'आसमान', 'लवर बॉय' और 'जबरदस्त' जैसी फिल्में आईं, लेकिन कोई भी उस ऊँचाई को नहीं छू सकी। निर्माता और निर्देशक के रूप में भी उन्होंने कोशिशें कीं। 1991 में उन्होंने 'हिना' का निर्माण किया, जिसका निर्देशन रणधीर कपूर ने किया। 1996 में उन्होंने 'प्रेम ग्रंथ' का निर्देशन किया, परंतु फिल्म अपेक्षित सफलता नहीं पा सकी। उन्होंने टीवी सीरियल 'वंश' का भी निर्माण किया।

परदे के पीछे की प्रतिभा

यह ऐसे समय में आता है जब हिंदी सिनेमा में 'सफलता' को केवल बॉक्स ऑफिस के आँकड़ों से मापा जाता है। राजीव कपूर उन कलाकारों की श्रेणी में आते हैं जिनकी प्रतिभा परदे के सामने की बजाय परदे के पीछे अधिक चमकती थी। ऋषि कपूर की आत्मकथा इस बात का प्रमाण है कि परिवार के भीतर राजीव की कद्र कहीं अधिक थी, जितनी बाहरी दुनिया ने कभी स्वीकार की।

विदाई और विरासत

राजीव कपूर का निधन 9 फरवरी 2021 को 58 वर्ष की आयु में हुआ। उनके जाने के बाद कपूर परिवार ने उन्हें गहरी श्रद्धांजलि दी। उनकी जयंती पर उनके प्रशंसक और परिवार उन्हें उस बहुआयामी व्यक्तित्व के रूप में याद कर रहे हैं — जो संगीतकार, संपादक, अभिनेता और फिल्मकार था — और जिसे शायद वह मंच कभी नहीं मिला जिसका वह हकदार था।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ किसी कलाकार को उसके पिता की विरासत के बोझ तले आँका जाता है, न कि उसकी अपनी क्षमता से। ऋषि कपूर का यह स्वीकारोक्ति — कि राजीव सबसे प्रतिभाशाली थे — इंडस्ट्री की उस प्रवृत्ति पर सवाल खड़ा करता है जो बॉक्स ऑफिस को ही प्रतिभा का एकमात्र पैमाना मानती है। राजीव की एडिटिंग और संगीत की समझ बताती है कि वे परदे के पीछे के कलाकार थे — और शायद उन्हें वह भूमिका कभी नहीं दी गई। यह सवाल आज भी प्रासंगिक है कि क्या बॉलीवुड का स्टार सिस्टम बहुआयामी प्रतिभाओं को पहचान पाने में सक्षम है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजीव कपूर कौन थे और उनकी जयंती कब है?
राजीव कपूर महान फिल्मकार राज कपूर के सबसे छोटे बेटे और ऋषि कपूर के अनुज थे, जिनका जन्म 25 अगस्त 1962 को मुंबई में हुआ था। परिवार में उन्हें 'चिंपू' कहा जाता था और उन्होंने अभिनेता, निर्माता व निर्देशक के रूप में काम किया।
ऋषि कपूर ने राजीव कपूर को 'सबसे टैलेंटेड' क्यों कहा था?
ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा 'खुल्लम खुल्ला: ऋषि कपूर अनसेंसर्ड' में लिखा कि राजीव में बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के पियानो बजाने की क्षमता थी और फिल्म एडिटिंग की स्वाभाविक समझ थी। ऋषि का मानना था कि राजीव रणधीर और उनसे भी अधिक प्रतिभाशाली थे, लेकिन कभी अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाए।
राजीव कपूर की सबसे बड़ी फिल्म कौन सी थी?
राजीव कपूर को सबसे बड़ी पहचान 1985 में आई फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' से मिली, जिसमें वे मुख्य भूमिका में थे। यह उनके पिता राज कपूर द्वारा निर्देशित अंतिम फिल्म थी और बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता रही।
राजीव कपूर ने निर्देशक के रूप में कौन सी फिल्में बनाईं?
राजीव कपूर ने 1996 में 'प्रेम ग्रंथ' का निर्देशन किया, जो अपेक्षित सफलता नहीं पा सकी। इससे पहले 1991 में उन्होंने 'हिना' का निर्माण किया था, जिसका निर्देशन रणधीर कपूर ने किया था।
राजीव कपूर का निधन कब हुआ?
राजीव कपूर का निधन 9 फरवरी 2021 को 58 वर्ष की आयु में हुआ। उनके जाने पर कपूर परिवार ने गहरा दुख व्यक्त किया था।
राष्ट्र प्रेस
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